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अमर उजाला की खबर का असर केंद्र सरकार तक पहुंची कृष्णा की पुकार, एम्स ने बुलाया
Wed, 04 Sep 2019 07:10 AM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Trainee Trainee
Updated Wed, 04 Sep 2019 07:10 AM IST
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मयूर विहार निवासी 13 वर्षीय कृष्णा
- फोटो : अमर उजाला
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आखिरकार हिमनजियोमस नामक दुर्लभ रोग से पीड़ित 13 वर्षीय कृष्णा की पुकार सरकार के कानों तक पहुंच गई। मंगलवार को अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कृष्णा को दोबारा से एम्स भेजने के निर्देश दिए। इसके बाद एम्स पहुंचे कृष्णा के पिता लाल सिंह से बुधवार को मरीज के तमाम कागजों के साथ आने को कहा गया।
बुधवार को एम्स के वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम इस केस पर आपस में चर्चा के बाद ये तय करेगी कि उपचार एम्स में हो सकता है या नहीं। डॉक्टरों के अनुसार, कृष्णा को गंभीर रोग है। वर्ष 2006 में जन्म से ही उसे ये दिक्कत है। हालांकि तब से अब काफी तकनीक भी बदली हैं। ऐसे में प्रयास है कि कृष्णा का उपचार एम्स में ही संभव हो।
लाल सिंह ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की ओर से उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन मिला है। दरअसल मयूर विहार निवासी लाल सिंह लंबे समय से अपने बेटे कृष्णा की बीमारी को लेकर इधर उधर भटक रहे हैं। अन्ना आंदोलन के वक्त उनका बेटा उस वक्त सुर्खियों में आया था जब वे उपचार के लिए अन्ना के पास प्रदर्शन मंच पर पहुंचा था।
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करीब 8 साल तक एम्स में उपचार के बाद भी उसे राहत नहीं मिली। उसके पिता के अनुसार, 2014 में एम्स के डॉक्टरों ने बिस्तर खाली न होने के कारण घर जाने और फोन पर भर्ती होने की जानकारी देने का आश्वासन दिया था, लेकिन पांच साल गुजरने के बाद इस परिवार को अभी भी एम्स से फोन आने का इंतजार है। 3 सितंबर के अंक में अमर उजाला ने कृष्णा की पीड़ा को पाठकों तक पहुंचाया। इसके बाद एम्स प्रबंधन से कृष्णा की बीमारी को लेकर जल्द से जल्द विकल्प तलाशने के निर्देश दिए गए।
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बुधवार को एम्स के वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम इस केस पर आपस में चर्चा के बाद ये तय करेगी कि उपचार एम्स में हो सकता है या नहीं। डॉक्टरों के अनुसार, कृष्णा को गंभीर रोग है। वर्ष 2006 में जन्म से ही उसे ये दिक्कत है। हालांकि तब से अब काफी तकनीक भी बदली हैं। ऐसे में प्रयास है कि कृष्णा का उपचार एम्स में ही संभव हो।
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लाल सिंह ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की ओर से उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन मिला है। दरअसल मयूर विहार निवासी लाल सिंह लंबे समय से अपने बेटे कृष्णा की बीमारी को लेकर इधर उधर भटक रहे हैं। अन्ना आंदोलन के वक्त उनका बेटा उस वक्त सुर्खियों में आया था जब वे उपचार के लिए अन्ना के पास प्रदर्शन मंच पर पहुंचा था।
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करीब 8 साल तक एम्स में उपचार के बाद भी उसे राहत नहीं मिली। उसके पिता के अनुसार, 2014 में एम्स के डॉक्टरों ने बिस्तर खाली न होने के कारण घर जाने और फोन पर भर्ती होने की जानकारी देने का आश्वासन दिया था, लेकिन पांच साल गुजरने के बाद इस परिवार को अभी भी एम्स से फोन आने का इंतजार है। 3 सितंबर के अंक में अमर उजाला ने कृष्णा की पीड़ा को पाठकों तक पहुंचाया। इसके बाद एम्स प्रबंधन से कृष्णा की बीमारी को लेकर जल्द से जल्द विकल्प तलाशने के निर्देश दिए गए।