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ईडी ने ‘बाइक बॉट’ पोंजी मामले में 103 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की

Mon, 20 Jul 2020 11:04 PM IST
Mohit Mudgal पीटीआई, दिल्ली
पीटीआई, दिल्ली Published by: Mohit Mudgal Updated Mon, 20 Jul 2020 11:04 PM IST
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ED attaches over Rs 103 crore assets in Noida bike bot ponzi case
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) - फोटो : ANI

नोएडा ‘बाइक बॉट’ पोंजी योजना मामले में धनशोधन से जुड़ी जांच के संबंध में सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 103 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क कर ली। अधिकारियों ने बताया कि ईडी के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने धनशोधन रोकथाम कानून के तहत 101.45 करोड़ रुपये मूल्य की 26 अचल संपत्तियां और 22 बैंक खातों में जमा 2.28 करोड़ रुपये की राशि अस्थायी रूप से कुर्क कर ली।

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ग्रेटर नोएडा से संचालित बाइक बॉट टैक्सी सेवा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा सहित कई राज्यों में 2.25 लाख निवेशकों से लगभग तीन हजार-चार हजार करोड़ रुपये की ठगी करने की आरोपी है। ईडी के संयुक्त निदेशक (लखनऊ जोन) राजेश्वर सिंह ने कहा कि कुछ अधिकारियों और लाभ प्राप्त करने वालों के खिलाफ आगे की जांच जारी है और इस मामले में जल्द ही और अधिक कुर्की होगी।
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प्रवर्तन निदेशालय ने नोएडा पुलिस द्वारा दर्ज कई प्राथमिकियों का अध्ययन करने के बाद कथित पोंजी योजना चलाने वाली कंपनी गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड (जीआईपीएल) और इसके प्रमोटर संजय भाटी तथा अन्य को पिछले साल जून में धनशोधन रोकथाम कानून के तहत नामजद किया था।
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ईडी के अनुसार कंपनी और इसके प्रमोटरों ने ‘बाइक बॉट’ टैक्सी सेवा के नाम से ‘अत्यधिक लुभावनी निवेश योजनाएं’ चलाईं जिसमें कोई निवेशक 1, 3, 5 या 7 बाइकों का निवेश कर सकता था जिनकी देखभाल और परिचालन कंपनी द्वारा किया जाता और निवेशकों को मासिक किराए, ईएमआई तथा बोनस (कई बाइकों के निवेश के मामले में) का भुगतान किया जाता तथा अतिरिक्त निवेशकों को जोड़ने पर और भी प्रोत्साहन राशि दी जाती।

कंपनी ने विभिन्न शहरों में फ्रैंचाइजी दी, लेकिन इन शहरों में बाइक टैक्सी सेवा मुश्किल से ही चल पाई। योजना अगस्त 2017 में लाई गई और निवेशकों या ग्राहकों से धन आने तथा उन्हें दोबारा भुगतान का सिलसिला 2019 के शुरू तक जारी रहा।

ईडी ने कहा कि नवंबर 2018 में कंपनी ने ई-बाइकों के लिए इसी तरह की योजनाएं शुरू कीं और कहा कि पेट्रोल बाइकों को लेकर पंजीकरण और परिचालन संबंधी समस्याएं आ रही हैं। इसने आरोप लगाया कि प्रमोटरों ने उचित दस्तावेजों के बिना अन्य कंपनियां खरीदीं, हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में एक रिजॉर्ट खरीदा, विभिन्न कंपनियों के नाम से कई चल-अचल संपत्तियां खरीदीं और विभिन्न अन्य कंपनियों और लोगों को कर्ज तथा निवेश के रूप में धन हस्तांतरित किया।


एजेंसी ने मामले में गिरफ्तार संजय भाटी के साथ अन्य के बयान भी दर्ज किए थे। इसने फरवरी में संबंधित मामले में छापेमारी की थी और नोएडा में एक सहकारी बैंक में पड़ताल की थी जहां कई संदिग्ध लेन-देन और जनता के धन के शोधन के आरोपियों की सहायता करने तथा बढ़ावा देने में बैंक अधिकारियों की भूमिका का खुलासा हुआ।

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