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दशहरा ग्राउंड अग्निकांड पर RTI से बड़ा खुलासा
ओम प्रकाश/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Wed, 26 Nov 2014 01:36 AM IST
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फरीदाबाद में एक माह बाद भी जिला प्रशासन ने भले ही दशहरा ग्राउंड पटाखा मार्केट अग्निकांड की जांच पूरी न की हो, लेकिन आरटीआई ने इसकी पोल खोलकर रख दी है।
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खुलासा यह हुआ है कि इसमें जिला प्रशासन और नगर निगम दोनों ने भारी लापरवाही बरती। आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन के महासचिव रविंद्र चावला ने 29 अक्तूबर को नगर निगम से 15 सवालों के जवाब मांगे थे। ज्यादातर सवाल नगर निगम को चुभ रहे हैं, इसलिए उसने उनसे दूसरे विभागों में आग लगाने की कोशिश की है। सवाल दूसरों पर टाल दिए हैं।
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घटना वाले दिन दशहरा ग्राउंड पटाखा मार्केट में दमकल विभाग की कोई गाड़ी खड़ी नहीं की गई थी। यही नहीं नगर निगम के किसी अधिकारी ने टेंट लगने के बाद पटाखा मार्केट का निरीक्षण नहीं किया था। इसके लिए सिर्फ दमकल केंद्र अधिकारी को निलंबित करके प्रशासन ने कोरम पूरा कर दिया था। यह बात आरटीआई के रिकार्ड में आई है।
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पलवल की एक, गुड़गांव की चार और दो निजी कंपनियों सहित कुल 15 फायर ब्रिगेड गाड़ियां आग बुझाने के लिए आई थीं। इससे साफ होता है कि इतने बड़़े औद्योगिक शहर में अग्निसुरक्षा के सरकारी इंतजाम नाकाफी हैं। जबकि यहां पर गली-गली में वर्कशॉप हैं। जिनमें किसी न किसी केमिकल का इस्तेमाल होता है। ज्वलनशील गैसों का इस्तेमाल करने वाली सैकड़ों कंपनियां हैं। गद्दे, फोम एवं जूते-चप्पल बनाने वाली यूनिटें हैं, जिनमें हमेशा आग लगने का खतरा बना रहता है।
रकम किसी की, काम किसी का
-सवाल पूछा गया था कि पटाखा लाइसेंस लेने व बाजार की व्यवस्था करने के लिए किस-किस ठेकेदार ने आवेदन किया था। इसका जवाब मिला है कि किसी ने इसके लिए आवेदन नहीं किया था। पटाखा लाइसेंस फीस नगर निगम द्वारा वसूल नहीं की जाती। निगम द्वारा केवल अस्थायी तहबाजारी वसूल की जाती है। लाइसेंस फीस की रकम जिला प्रशासन लेता है। आग अग्निशमन विभाग बुझाता है लेकिन उसको कोई राशि नहीं प्रदान की जाती। एसडीएम कार्यालय की अनुमति के बाद टेंट लगाए गए थे।
-रिपोर्ट के मुताबिक दमकल विभाग के पास इस समय कुल 12 गाड़ियां हैं, जिनमें से सिर्फ 9 चालू हालात में हैं। यानी करीब दो लाख लोगों पर एक ही गाड़ी है। जबकि अग्निशमन उपनिमयों के मुताबिक 50 हजार की आबादी पर एक दमकल गाड़ी का प्रावधान है।
-किसी भी दमकल केंद्र में ऐसी रेस्क्यू गाड़ी नहीं है, जो आकार में छोटी होने के कारण संकरी गलियों में जाकर आग बुझाने का काम कर सके। जबकि शहर की 60 फीसदी से अधिक लोग संकरी गलियों वाली कॉलोनियों में ही बसते हैं।