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सम-विषम के दौरान बद से बदतर हुई राजधानी की हवा: सीपीसीबी

Sat, 14 May 2016 02:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 14 May 2016 02:38 AM IST
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During the even-odd air of the capital from bad to worse
सम-विषम फिर से - फोटो : जी पॉल/अमर उजाला, नई दिल्ली

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ)ने भले ही दिल्ली की रैंकिंग घटाकर वायु प्रदूषण की स्थति में सुधार के संकेत दिए हैं। वहीं इसके उलट स्थानीय प्राधिकरणों के ताजा आंकड़े कुछ और ही बयां कर रहे हैं।

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देश की सर्वोच्च संस्था केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 1 अप्रैल से लेकर 30 अप्रैल के दौरान राष्ट्रीय राजधानी के कुल 9 सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता मापक स्टेशनों (सीएएक्यूएमएस) और मैन्युअल स्टेशनों से हांसिल हुए आंकड़े यह पुष्टि करते हैं कि सम-विषम के दौरान न सिर्फ पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) में बढोतरी हुई है बल्कि गैसीय प्रदूषण में भी इजाफा हुआ है।
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हाल ही में सीपीसीबी और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) को यह आदेश दिया था कि वे सम-विषम को लागू करने से पहले की स्थिति और सम-विषम के दौरान की स्थिति की वैज्ञानिक रिपोर्ट पेश करें। सीपीसीबी ने अपनी रिपोर्ट में पर्टिकुलेट मैटर 2.5 और पर्टिकुलेट मैटर 10, सल्फर डाई ऑक्साइड, बेंजीन, ओजोन, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड को शामिल किया है।
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वहीं सीपीसीबी ने यह आंकड़े शादीपुर, द्वारका, दिलशाद गार्डन, डीएसई और आईटीओ में संचालित सतत ऑनलाइन मॉनिटरिंग स्टेशन और आठ मैन्युअल स्टेशन पीतमपुरा, सिरीफोर्ट, जनकपुरी, निजामुद्दीन, शहजादा बाघ, शहादरा, बीएसजेड मार्ग और आइटीओ से जुटाए हैं। 

29 अप्रैल को सबसे ज्यादा जहरीली थी हवा 
सीपीसीबी के मुताबिक एक अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच पीएम 2.5 की सबसे खराब स्थिति 23 से 30 अप्रैल को रिकॉर्ड की गई। रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी में 29 अप्रैल को पर्टिकुलेट मैटर 2.5 अपने सामान्य स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर को तोड़कर 179 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया। वहीं सबसे बेहतर स्थिति 11 से 13 अप्रैल तक रही। इस दौरान पीएम 2.5 अपने सामान्य स्तर से थोड़ा ज्यादा 76 से 95 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक दर्ज किया गया।

सिर्फ वाहनों पर लगाम से नहीं घट सकता वायु प्रदूषण  

During the even-odd air of the capital from bad to worse

सिर्फ वाहनों पर लगाम से नहीं घट सकता वायु प्रदूषण  

सीपीसीबी ने इन आंकड़ों के निष्कर्ष में कहा है कि सिर्फ वाहनों पर लगाम लगाकर यह नहीं कहा जा सकता कि वायु प्रदूषण घट जाएगा। बल्कि वायु प्रदूषण के कई अन्य स्रोत भी हैं। मसलन, बाहर से आने वाली हवा व मौसम, तापमान और आद्रता का किरदार वायु प्रदूषण के लिए भी प्रमुख भूमिका निभाता है। 

 रिपोर्ट के मुताबिक सम-विषम के दौरान बिगड़ी हवा का हाल 

 स्थान                      पीएम 2.5   एनओटू    एसओटू     
 
डीएमएस शादीपुर              123         66             23             

एनएसआईटी द्वारका        137           23             11                   

आईएचबीएस दिलशाद गार्डन 121      52             13            

पीतम पुरा                       -           48            17             

आईटीओ                      143         -               -               

डीसीई                          145        -               -

निजामुद्दीन                    112        55             8

सिरीफोर्ट                     99             54          10

शहजादा बाग                111          65            14

जनकपुरी                    182          52            11

शहादरा                      63            49            18

परिवेश भवन                87           46            31

आईटीओ बीएसजेड मार्ग    -            74            17


- ऊपर दिए गए सभी आंकड़े 15 अप्रैल से 30 अप्रैल तक रिकॉर्ड औसत दर को प्रदर्शित करते हैं। 
- पर्टिकुलेट मैटर 2.5 के लिए 24 घंटे रिकॉर्ड के आधार पर सामान्य स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है। 
- एनओटू यानी नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड के लिए 24 घंटे रिकॉर्ड के आधार पर सामान्य स्तर 80 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है। 
- एसओटू यानी सल्फर डाई ऑक्साइड के लिए 24 घंटे रिकॉर्ड के आधार पर सामान्य स्तर 80 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है। 
- जहां डैस (-) दिया गया है वहां का रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
 
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