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सुप्रीम कोर्ट में लाइसेंस को चुनौती देंगे कॉलोनीवासी
ब्यूरो/ अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Mon, 24 Nov 2014 11:48 PM IST
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फरीदाबाद के दुर्गा बिल्डर क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अगले कुछ दिनों में होने जा रही कार्रवाई से परेशान लोग आशियाना बचाने के लिए जीजान से से जुटे हैं। इसके लिए वह सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर चुके हैं। लोग बिल्डर को दिए गए लाइसेंस को ही चुनौती देने के लिए अपना पक्ष कोर्ट के सामने रखने वाले हैं।
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सोमवार को शिव एंक्लेव, पंचशील कॉलोनी और दीपावली एंक्लेव के निवासी जिला नगर योजनाकार रेनुका सिंह से मिले। इससे पहले 20 नवंबर को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के डायरेक्टर अनुराग रस्तोगी हुडा कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने सभी कॉलोनीवासियों से अलग-अलग मुलाकात की थी और सोमवार तक अपने दस्तावेज विभाग को उपलब्ध कराने को कहा था।
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पेश किए आवश्यक दस्तावेज
डीटीपी कार्यालय पहुंचे शिव एंक्लेव निवासियों ने अपनी जमीन व घर संबंधी सभी आवश्यक दस्तावेज जिला नगर योजनाकार रेनुका सिंह के सामने पेश किए। लोगों के साथ सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रत्यूष प्रतीक भी थे। उन्होंने शिव एंक्लेव की जमीन संबंधी सेल डीड, जमाबंदी, लाइसेंस की कॉपी आदि करीब 10 दस्तावेज विभाग के सामने पेश किए।
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सुप्रीम कोर्ट में लाइसेंस को चुनौती देंगे
शिव एंक्लेव के निवासियों का आरोप है कि दुर्गा बिल्डर क्षेत्र में पंचशील कॉलोनी व अन्य जगहों पर कुछ लोग वर्ष 1987 से जमीन खरीद कर रहे हैं। इसके बावजूद बिल्डर ने वर्ष 1992 में गलत तरीके से कॉलोनाइजर का लाइसेंस हासिल कर लिया, जबकि वह पहले ही जमीन बेच चुका था। आरोप है कि इसमें पूरी तरह से नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत थी। लाइसेंस हासिल करके बिल्डर ने बेची हुई जमीन अपनी दिखा फिर से प्लॉट बेचना शुरू कर दिया। शिव एंक्लेव के निवासी इसी लाइसेंस को कोर्ट में चुनौती देंगे। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने लाइसेंस को ध्यान में रखते हुए बाकी जमीन पर अवैध कब्जे हटाने के आदेश दिए हैं, लेकिन जब बिल्डर द्वारा हासिल किया गया लाइसेंस ही फर्जी है तो उन लोगों का क्या कसूर है, जो पहले से यहां रहते आ रहे हैं।
तीन बिंदुओं को रखेंगे सामने
कॉलोनीवासी कोर्ट के सामने तीन बिंदुओं को रखेंगे। इनमें लाइसेंस, पट्टे की जमीन और तकसीम (बंटवारा) शामिल है। शिव एंक्लेव के वकील का कहना है कि बिल्डर द्वारा जिस जमीन पर लाइसेंस लिया गया, पहले तो वह फर्जी है। दूसरे पट्टे की जमीन पर लाइसेंस नहीं लिया जा सकता, यह केवल अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ था। तीसरा बिंदु तकसीम (बंटवारा) का है, क्योंकि बिल्डर ने उल्टे सीधे तरीके से कहीं भी जगह बेच दी और किसी अन्य प्लॉटों पर लाइसेंस ले लिया। इससे जमीन का सही तरीके से बंटवारा ही नहीं हो सका।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लाइसेंस सहित मुख्य तीन बिंदु रखे जाएंगे। जब बिल्डर द्वारा लिया गया लाइसेंस ही फर्जी है तो उसके आधार पर जनता के मकान कैसे तोड़े जा सकते हैं। इसमें भ्रष्ट अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रत्यूष प्रतीक, वकील, शिव एंक्लेव।