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खबर का असरः बसों की खस्ता हालत पर टूटी डीटीसी प्रबंधन की नींद

Sun, 04 Aug 2019 06:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 04 Aug 2019 06:15 AM IST
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dtc management awakened after news published on condition of buses 
सांकेतिक तस्वीर

राजधानी में डीटीसी बसों की खस्ता हालत पर ‘अमर उजाला’ में शनिवार को ‘प्राथमिक चिकित्सा और अग्नि सुरक्षा बस दिखावा’ शीर्षक से प्रकाशित रियलिटी चेक के बाद डीटीसी अधिकारियों की नींद टूटी है। 

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बसों की हालत को गंभीरता से लेते हुए डीटीसी प्रबंधन ने दिल्ली के सभी बस डिपो के डीआरएम और आरएम को नोटिस जारी किए हैं। इस नोटिस में बसों की खस्ता हालत के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है। प्रबंधन ने बसों के मेंटिनेंस को लेकर सख्ती बरतने का दावा भी किया है।
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डीटीसी के बेड़े में वर्तमान में करीब 3880 बसें हैं। इनमें लो फ्लोर एसी और लो फ्लोर नॉन एसी दोनों तरह की बसें हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स के मद्देनजर 2007 से 2010 तक 2250 लो फ्लोर नॉन एसी और 1700 लो फ्लोर एसी बसें खरीदी गई थीं। इन 3950 में से 3880 बसें अभी दौड़ रही हैं। अधिकतर बसों की हालत बेहद खस्ता है। रही-सही कसर विभागीय लापरवाही के चलते पूरी हो गई है। 
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टाटा और लीलैंड के पास है मेंटिनेंस
इस बसों के मेंटिनेंस का जिम्मा निर्माता कंपनियों टाटा और लीलैंड के पास है। फिर भी बरसात के मौसम में इन बसों की छतों से पानी अंदर पहुंच रहा है और यात्री परेशान हो रहे हैं। कई बसों की सीटें तक उखड़ चुकी हैं। सीटों की गद्दियां फट चुकी हैं। बसों में एसी काम नहीं कर रहे और लाइटें टूट चुकी हैं। अग्निशमन सिलिंडर भी बेहद खराब हालत में हैं।

डीआरएम और आरएम पर हो सकती है कार्रवाई
डीटीसी के डिप्टी सीजीएम तरुण वर्मा ने अमर उजाला में प्रकाशित खबर पर संज्ञान लेते हुए कहा कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जा रहा है। प्रबंधन ने डीटीसी के सभी 41 बस डिपो के डीआरएम और चारों जोन के आरएम को नोटिस जारी करके बसों की हालत के बारे में सोमवार तक रिपोर्ट मांगी है। 


उन्होंने कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए डीटीसी की रिव्यू मीटिंग और मॉनिटरिंग मीटिंग में बसों के मेंटिनेंस के मुद्दे को अनिवार्य रूप से शामिल कर दिया गया है। अब बसों के मेंटिनेंस को लेकर डिपो अधिकारियों से समय-समय पर रिपोर्ट ली जाएंगी। इसके बाद भी शिकायतें मिलती हैं तो डीआरएम और आरएम के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

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