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CBI के लिए थी कयामत की रात, एक दिन में ही बिगड़ जाती बात

Wed, 16 Mar 2016 06:57 AM IST
संजय शिशौदिया/अमर उजाला, गाजियाबाद
संजय शिशौदिया/अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Wed, 16 Mar 2016 06:57 AM IST
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doom of night for cbi, after a day situation was worsens
यादव स‌िंह

काली कमाई के कुबेर यादव सिंह प्रकरण में सीबीआई के लिए मंगलवार का दिन जैसे किसी कयामत से कम नहीं था। मंगलवार को सीबीआई अगर इस मामले में चार्जशीट कोर्ट में पेश नहीं कर पाती तो 89 दिनों से जेल में बंद रामेंद्र सिंह को मंगलवार को जमानत मिल सकती थी।

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कानून के अनुसार किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी को 90 दिनों के अंदर ही चार्जशीट कोर्ट में पेश करनी होती है। ऐसा न होने पर आरोपी को कानून की बारीकियों का ही लाभ मिलता है और नियमानुसार उसे कोर्ट से जमानत मिल जाती है।
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यादव सिंह प्रकरण में भी शायद कुछ ऐसा ही होता अगर सीबीआई मंगलवार को विशेष न्यायाधीश जी. श्रीदेवी की कोर्ट में चार्जशीट पेश न करती।

90 दिन में नहीं पेश होती चार्जशीट तो मिल जाती जमानत

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यादव स‌िंह

दरअसल यादव सिंह के सबसे करीबी रहे नोएडा अथॉरिटी के ही असिस्टेंट प्रोजेक्ट इंजीनियर रामेंद्र सिंह को 18 दिसंबर 2015 को गिरफ्तार कर लिया था। कई दिनों की रिमांड के बाद कोर्ट ने रामेंद्र सिंह को न्यायिक हिरासत में डासना जेल भेज दिया था।

तब से वह जेल में ही बंद हैं। इस हिसाब से माने तो दिसंबर माह में 14 दिन, जनवरी में 31, फरवरी में 29 और मार्च में आज यानी 15 दिन तक रामेंद्र सिंह को कुल मिलाकर 89 दिन पूरे हो चुके हैं।

हाईकोर्ट के अधिवक्ता अरविंद चौधरी बताते हैं कि गिरफ्तारी से 90 दिनों के अंदर अगर चार्जशीट पेश नहीं की जाती तो आरोपी को 167 सीआरपीसी के तहत कोर्ट से जमानत पर रिहा किए जाने का प्राविधान है।

रामेंद्र सिंह के वकीलों ने जमानत के कागज कर लिए थे तैयार

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यादव स‌िंह के बंगले पर छापा

एनआरएचएम घोटाले में सीबीआई ऐसे ही मुंह की खा चुकी है। सीनियर आईएएस प्रदीप शुक्ला और यूपीएसआईसी के निदेशक रहे अभय वाजपेयी के खिलाफ जब 90 दिनों के अंदर चार्जशीट कोर्ट में पेश नहीं की गई तो कोर्ट ने इन दोनों आरोपियों को जमानत दे दी थी।

सूत्रों की मानें तो रामेंद्र सिंह के अधिवक्ताओं को भी इसकी पूरी जानकारी थी। इसी कारण वह बिलकुल चुप्पी साधे बैठे हुए थे और जमानत के कागज तैयार कर रहे थे।

उधर सीबीआई भी इस प्रकरण में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में जुटी हुई थी। सीबीआई के डिप्टी एसपी राजेश कुमार इस प्रकरण की जांच में जुटे थे। यही कारण रहा कि 90 दिन पूरा होने से ठीक एक दिन पहले ही सीबीआई ने चार्जशीट पेश कर रामेंद्र सिंह के जमानत पर रिहा होने के मंसूबों पर पानी फेर दिया।

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तीन बार रिमांड पर लेकर की गई थी यादव सिंह से पूछताछ

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जेल

नोएडा अथॉरिटी के चीफ इंजीनियर यादव सिंह से पूछताछ के लिए सीबीआई ने कोर्ट से उन्हें तीन बार रिमांड पर लिया था। पहली बार 4 फरवरी को 6 दिन का रिमांड कोर्ट ने मंजूर किया था।

इसके बाद 10 फरवरी को कोर्ट में पेश किए जाने के साथ ही सीबीआई ने फिर से उसके कस्टड़ी रिमांड की डिमांड की थी। इस बार कोर्ट ने 5 दिन का रिमांड मंजूर किया था। इसके बाद सीबीआई ने यादव सिंह को 15 फरवरी को कोर्ट में पेश किया और फिर से रिमांड दिए जाने को अर्जी लगाई।

विशेष न्यायाधीश जी. श्रीदेवी ने दो दिनों का रिमांड मंजूर करते हुए 17 फरवरी को यादव सिंह को कोर्ट में पेश किए जाने के आदेश दिए थे। इस तरह सीबीआई ने यादव सिंह को तीन बार कुल 13 दिनों के लिए रिमांड पर लिया और सघन पूछताछ की थी।

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