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बच्चा पैदा होने के बाद नाल निकालना भूल गई डॉक्टर, विरोध किया तो जबरन दे दी छुट्टी

Thu, 06 Sep 2018 07:16 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Thu, 06 Sep 2018 07:16 PM IST
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doctors did not cure her cervix after woman delivery
डेमो - फोटो : डेमो

बीके सिविल अस्पताल के प्रसूति विभाग में फिर एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। एक महिला की डिलीवरी के बाद डॉक्टरों ने उसके गर्भाश्य से नाल ही नहीं निकाली। इससे पीड़ित महिला की हालत बिगड़ गई। बाद में डॉक्टर ने नाल को निकाला, मगर जबरन ही महिला को डिस्चार्ज कर दिया। डॉक्टर की लापरवाही और जबरन डिस्चार्ज किए जाने से गुस्साएं परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया।

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वाईएमसीए परिसर में रहने वाले विकास ने बताया कि उसकी पत्नी पूजा गर्भवती थी। मंगलवार रात पूजा की तबियत अचानक खराब हो गई। इसके बाद उसे बीके सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि चार माह की गर्भवती पूजा को ब्लीडिंग शुरू हो गई है।
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इसके बाद डॉक्टरों ने उसका गर्भपात कर दिया। इसमें लापरवाही यह बरती गई कि गर्भाश्य से नाल नहीं निकाली गई। इससे पूजा रात को कई बार बेहोश होकर गिर गई। पूजा की सास बिमला देवी ने बताया बुधवार दोपहर जब दूसरी डॉक्टर आई तो उन्होंने पूजा की जांच की और तभी नाल निकाली। बिमला ने बताया कि बृहस्पतिवार को पूजा को अस्पताल से जबरन डिस्चार्ज करने की भी कोशिश की।
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इस मामले पर बीके सिविल अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधिकारी बीर सिंह सहरावत ने रेजिडेंट मेडिकल अफसर द्वारा मामले की जांच के आदेश दिए। रेजिडेंट मेडिकल अफसर डा. विकास का कहना है कि अस्पताल में किसी भी तरह की कोई लापरवाही नहीं हुई। 


उन्होंने बताया कि गर्भपात के बाद प्लेसेंटा (नाल) को जबरन बाहर नहीं निकाला जाता। गर्भपात के बाद प्राकृतिक तरीके से ही प्लेसेंटा बाहर निकलने के लिए छोड़ दिया जाता है। पूजा के परिजनों को ये बात समझ नहीं आई और हंगामा करने लगे। पूजा को जबरन डिस्चार्ज करने की बात भी गलत है। पूजा की नाजुक हालत देखते हुए उसे एक दिन अतिरिक्त अस्पताल में रखने के लिए कहा गया है।

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