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विरासत के बगैर देश का विकास संभव नहीं : मीनाक्षी लेखी
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- 'एडॉप्ट ए हेरिटेज 2.0' कार्यक्रम में लोगों से रखवाली की अपील
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। संस्कृति राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी का मानना है कि देश के विकास में कहीं न कहीं उसकी विरासत का बहुत बड़ा योगदान होता है। जब उसे सहेजकर रखने में चूक होती है, तो विकास भी रुक जाता है। देश की विरासत के बिना तो उसका विकास संभव ही नहीं है। मीनाक्षी मंगलवार को राष्ट्रीय संग्रहालय में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रही थीं। मौका भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के एडॉप्ट ए हेरिटेज 2.0 के तहत स्मारकों को अपनाने के लिए संशोधित वेबसाइट के अनावरण का था।
लेखी ने कहा कि भारत का इतिहास बहुत पुराना है और इतने बड़े इतिहास को अकेले एएसआई में समा पाना असंभव है। वर्तमान में 3,600 से अधिक स्मारक एएसआई की देख-रेख में हैं। चूंकि इतिहास पुराना है, कई स्मारक व स्थान ऐसे भी है, जिनके बारे में अधिकांश लोग जानते ही नहीं हैं या उनकी ठीक से देख-रेख नहीं होती। इसलिए उन्होंने लोगों से अपील की कि उन्हें आगे बढ़कर आना होगा और देश के इतिहास व स्मारकों की जितनी हो सके उतनी देखभाल करने में अपना योगदान देना होगा। इससे कई हद तक हमारी धरोहर को सहेजकर रखने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम में संशोधित वेबसाइट के अनावरण कार्यक्रम में एएसआई के महानिदेशक यदुबीर सिंह रावत ने कहा कि यह नया प्लेटफॉर्म तरह-तरह की सुविधाएं देने में लोगों की मदद करेगा। इसमें उपयोगकर्ता ऐतिहासिक स्थलों से लेकर शैक्षिक संसाधनों तक भारत की समृद्ध सांस्कृतिक टेपेस्ट्री के विभिन्न पहलुओं को आसानी से देख सकेंगे। छात्रों को भी यह वेबसाइट एक मूल्यवान संसाधन के रूप में मिलेगी। वहीं, संस्कृति मंत्रालय के अतिरिक्त निजी सचिव हरि कृष्णा रेड्डी ने जानकारी दी कि तीन हजार से अधिक स्मारकों में से चौदह स्मारकों को 'हेरिटेज 2.0' कार्यक्रम के तहत गोद ले लिया गया है।
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एजेंसियों के साथ किए एमओयू पर हस्ताक्षर
इस दौरान निजी एजेंसियों के साथ देश के विभिन्न कोनों में मौजूद 14 स्मारकों के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। संस्कृति राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने कहा कि एएसआई इन सांस्कृतिक खजानों पर आगंतुकों के अनुभव की सुरक्षा और वृद्धि सुनिश्चित करने में बाहरी भागीदारों के साथ खड़ा है। एमओयू पर हस्ताक्षर करने से चयनित स्मारक साथी पहुंच, सुरक्षा में सुविधाएं देने व बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होंगे। इनमें कुतुब मीनार, पुराना किला, एलिफेंटा गुफाएं, आगरा किला जैसी 12 जगहों को गोद लिया गया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। संस्कृति राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी का मानना है कि देश के विकास में कहीं न कहीं उसकी विरासत का बहुत बड़ा योगदान होता है। जब उसे सहेजकर रखने में चूक होती है, तो विकास भी रुक जाता है। देश की विरासत के बिना तो उसका विकास संभव ही नहीं है। मीनाक्षी मंगलवार को राष्ट्रीय संग्रहालय में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रही थीं। मौका भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के एडॉप्ट ए हेरिटेज 2.0 के तहत स्मारकों को अपनाने के लिए संशोधित वेबसाइट के अनावरण का था।
लेखी ने कहा कि भारत का इतिहास बहुत पुराना है और इतने बड़े इतिहास को अकेले एएसआई में समा पाना असंभव है। वर्तमान में 3,600 से अधिक स्मारक एएसआई की देख-रेख में हैं। चूंकि इतिहास पुराना है, कई स्मारक व स्थान ऐसे भी है, जिनके बारे में अधिकांश लोग जानते ही नहीं हैं या उनकी ठीक से देख-रेख नहीं होती। इसलिए उन्होंने लोगों से अपील की कि उन्हें आगे बढ़कर आना होगा और देश के इतिहास व स्मारकों की जितनी हो सके उतनी देखभाल करने में अपना योगदान देना होगा। इससे कई हद तक हमारी धरोहर को सहेजकर रखने में मदद मिलेगी।
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कार्यक्रम में संशोधित वेबसाइट के अनावरण कार्यक्रम में एएसआई के महानिदेशक यदुबीर सिंह रावत ने कहा कि यह नया प्लेटफॉर्म तरह-तरह की सुविधाएं देने में लोगों की मदद करेगा। इसमें उपयोगकर्ता ऐतिहासिक स्थलों से लेकर शैक्षिक संसाधनों तक भारत की समृद्ध सांस्कृतिक टेपेस्ट्री के विभिन्न पहलुओं को आसानी से देख सकेंगे। छात्रों को भी यह वेबसाइट एक मूल्यवान संसाधन के रूप में मिलेगी। वहीं, संस्कृति मंत्रालय के अतिरिक्त निजी सचिव हरि कृष्णा रेड्डी ने जानकारी दी कि तीन हजार से अधिक स्मारकों में से चौदह स्मारकों को 'हेरिटेज 2.0' कार्यक्रम के तहत गोद ले लिया गया है।
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एजेंसियों के साथ किए एमओयू पर हस्ताक्षर
इस दौरान निजी एजेंसियों के साथ देश के विभिन्न कोनों में मौजूद 14 स्मारकों के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। संस्कृति राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने कहा कि एएसआई इन सांस्कृतिक खजानों पर आगंतुकों के अनुभव की सुरक्षा और वृद्धि सुनिश्चित करने में बाहरी भागीदारों के साथ खड़ा है। एमओयू पर हस्ताक्षर करने से चयनित स्मारक साथी पहुंच, सुरक्षा में सुविधाएं देने व बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होंगे। इनमें कुतुब मीनार, पुराना किला, एलिफेंटा गुफाएं, आगरा किला जैसी 12 जगहों को गोद लिया गया है।