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Delhi: समय से पूर्व जन्मे नवजात की आंखों की रोशनी को बचाएगी देसी मशीन, साइंस एक्सपो में प्रदर्शित की डिवाइस

Sun, 14 May 2023 12:01 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Sun, 14 May 2023 12:01 PM IST
सार

डिवाइस के बारे में कंपनी के अधिकारी केएमके राजेंद्रम ने बताया कि तीन साल पहले डिवाइस तैयार की गई थी। दक्षिण भारत के कई अस्पतालों में समय से पूर्व जन्मे नवजात की आंखों की जांच करने के लिए इसका इस्तेमाल हो रहा है।

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Desi machine will save prematurely born newborn's eyesight
समय से पूर्व जन्मे नवजात की आंखों की रोशनी को बचाएगी देसी मशीन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अब समय से पूर्व जन्मे नवजात की आंखों की रोशनी को बचाया जा सकेगा। देशभर में हर साल करीब 30-35 हजार बच्चों का जन्म समय से पूर्व होता है। इन बच्चों के फेफड़े पर्याप्त ऑक्सीजन को अवशोषित नहीं कर पाते, ऐसे में सामान्य स्तर पर सांस देने के लिए मशीन की आवश्यकता पड़ जाती है और उन्हें नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में भर्ती करना पड़ा है। ऐसे में यदि इन नवजात को जरूरत से ज्यादा ऑक्सीजन दी जाती है तो दोनों आंखें खराब हो सकती हैं।

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इसे रोकने के लिए समय पर आंखों की जांच की जरूरत है। इस समस्या को दूर करने के लिए बेंगलूरू की एक कंपनी ने नवजात की आंखों की जांच के लिए डिवाइस को तैयार की है, जिसे प्रगति मैदान में चल रहे साइंस एक्सपो में प्रदर्शित किया गया है। 
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डिवाइस के बारे में कंपनी के अधिकारी केएमके राजेंद्रम ने बताया कि तीन साल पहले डिवाइस तैयार की गई थी। दक्षिण भारत के कई अस्पतालों में समय से पूर्व जन्मे नवजात की आंखों की जांच करने के लिए इसका इस्तेमाल हो रहा है। तीन साल में करीब एक लाख बच्चों की जांच की गई और परिणाम बेहतर आए। इस रेटिनल इमेजिंग डिवाइस की मदद से आंखों का चित्र लिया जाता है। इसकी मदद से डॉक्टर देखकर स्पष्ट कर देता है कि बच्चे की आंख में कोई दिक्कत है या नहीं। भविष्य में आंखों की रोशनी जा सकती है या नहीं। अभी तक ऐसी डिवाइस अमेरिकन कंपनी तैयार कर रही थी जो काफी महंगी है।

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अंग परिवहन को बढ़ावा देगा ड्रोन 
चिकित्सा क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे ड्रोन के इस्तेमाल के साथ आने वाले दिनों में मानव अंगों के परिवहन के लिए बड़े स्तर पर ड्रोन का इस्तेमाल होगा। इसके लिए जहां ड्रोन की क्षमता को बढ़ाया जा रहा है। साथ ही, तकनीक को लेकर भी शोध हो रहे हैं। साइंस एक्सपो में आए वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के वरिष्ठ अधिकारी सतीश ठाकरे ने बताया कि एक्सपो में बड़े स्तर के ड्रोन को प्रस्तुत किया गया है। यह एडवांस ड्रोन है, यदि किसी कारण से ड्रोन का संपर्क कम्युनिकेशन सिस्टम से टूट जाता है तो ये वापस उसी जगह पर आएगा।

इसके अलावा यह 20 किलो तक का वजन ले जा सकेगा। मानव अंगों के परिवहन के लिए ड्रोन को और बेहतर बनाया जा रहा है। ड्रोन की क्षमता, उसकी स्पीड, तय करने की दूरी सहित अन्य को बढ़ाया जाने की दिशा में काम किया जा रहा है। एक्सपो में रखे गए ड्रोन की क्षमता 5 किमी तक है और यह पांच किलो तक का वजन ले जा सकता है। यह एक बार चार्ज होने के बाद 40 मिनट तक उड़ान भर सकता है।

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