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एजेंडा 2020ः डेनमॉर्क के हेल्थ मॉडल से अस्पतालों में बढ़ेंगे 91 फीसदी बिस्तर
Thu, 26 Dec 2019 06:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 26 Dec 2019 06:08 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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स्वास्थ्य विभाग दिल्ली में डेनमार्क जैसा हेल्थ मॉडल लागू कर चुका है। फिलहाल दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में 7226 बिस्तरों की क्षमता है, जो अगले वर्ष तक 91 फीसदी बढ़कर 13819 होने की उम्मीद है। विभाग का फोकस पूरे वर्ष नए अस्पतालों के निर्माण के अलावा मोहल्ला क्लीनिकों की संख्या बढ़ाने पर रहा।
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विभाग ने अस्पतालों में 75 फीसदी कम लागत से बिस्तर तैयार करने की योजना भी बनाई है। उसका दावा है कि केंद्र सरकार के एक बिस्तर पर 1 करोड़ रुपये लागत के सापेक्ष दिल्ली में इसे 25 लाख रुपये से तैयार किया जा रहा है। संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल में 362 बिस्तरों की क्षमता वाला ट्रॉमा सेंटर बनाने में सरकार 190 करोड़ रुपये बचाएगी।
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नए साल में विभाग को 91 फीसदी बिस्तरों की वृद्धि और मोहल्ला क्लीनिकों की संख्या एक हजार के पार ले जाने की उम्मीद है। हालांकि दिल्ली में चार नए अस्पतालों को शुरू कराने में सरकार को सफलता नहीं मिली। मई 2019 में सरकार 3093 बिस्तरों के साथ इन अस्पतालों को शुरू करने वाली थी।
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2019 में क्या खोया...
1. द्वारका, अंबेडकर नगर और बुराड़ी में चार नए अस्पतालों के शुरू होने का काम लटका।
2. दिल्ली के अस्पतालों में वेंटिलेटर की कमी जस की तस।
3. नए चिकित्सीय उपकरण और स्टाफ की कमी भी नहीं हो सकी पूरी।
4. सभी अस्पतालों तक नहीं पहुंच सकी निशुल्क डायलिसिस की सुविधा।
5. पूरे साल विरोध प्रदर्शनों के बीच दौड़ती रहीं कैट्स एंबुलेंस। नहीं बढ़ी संख्या।
2020 से क्या उम्मीदें
1. संजय मेमोरियल अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर, सरिता विहार, विकासपुरी, मादीपुर और सिरसपुर सहित 8 नए अस्पतालों को मिलाकर 6593 बिस्तर बढ़ने की उम्मीद।
2. दिल्ली के सभी अस्पतालों में बिस्तरों के रिक्त होने की जानकारी देने वाले पोर्टल के शुरू होने की उम्मीद। इससे मरीज अस्पताल जाने से जान सकेंगे कि बिस्तर खाली है या नहीं।
3. हाईकोर्ट का आदेश मिलने के बाद दिल्ली सरकार वेंटिलेटर की कमी दूर करने के लिए काम कर रही है। नए साल में इसे लेकर पूरा सिस्टम लांच किया जा सकता है।
4. दिल्ली वालों को आयुष्मान भारत की ही तरह मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ मिल सकता है। आधार कार्ड या वोटर कार्ड होना होगा जरूरी। मोहल्ला क्लीनिकों की संख्या बढ़कर पहुंच सकती है 1 हजार। अब तक 334 मोहल्ला क्लीनिक हो चुके हैं तैयार।
5. सरकारी अस्पताल में वेंटिलेटर न होने पर मरीज को नजदीकी निजी अस्पताल में रेफर करने वाली योजना शुरू हो सकती है। योजना से दिल्ली के 72 निजी अस्पताल जुड़े हुए हैं।
बोले डॉक्टर...
. दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर जैसी अति आवश्यक सुविधाओं पर जोर देने की जरूरत है। सरकार को इस दिशा में जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए। - डॉ. सुनील अरोड़ा, सचिव, फोर्डा
. नए अस्पतालों का निर्माण सराहनीय कदम है, लेकिन इनमें स्टाफ की कमी को लेकर भी काम करने की जरूरत है। दिल्ली में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को लेकर भी सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए। - डॉ. सुमेध, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, फोर्डा
. स्वास्थ्य सेवाओं को और भी ज्यादा मजबूती देना जरूरी है। अस्पतालों में फोकस के अलावा रोग नियंत्रण को लेकर जनजागरूकता अभियान की बेहद आवश्यकता है। डेंगू को लेकर बीते दिनों में इसके अच्छे परिणाम भी मिले हैं। - डॉ. प्रेम अग्रवाल, अध्यक्ष, सेंट्रल दिल्ली आईएमए
. स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अब तक काफी अच्छे काम दिखे हैं। हालांकि झोलाछाप की प्रैक्टिस में भी इजाफा हुआ है। इसे लेकर सरकार को जनता के बीच समय-समय पर जागरूकता अभियान की जरूरत है। - डॉ. अनिल बंसल, अध्यक्ष, एंटी क्वैकरी सेल, डीएमए