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नोटबंदी की बड़ी मारः दुकानदारों ने उधारी देना किया बंद, चूल्हे तक हुए बंद

Mon, 14 Nov 2016 01:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Mon, 14 Nov 2016 01:23 AM IST
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demonetization side effect: shopkeepers stops borrowing, even gas are shut in homes
note - फोटो : अमर उजाला

हजार और पांच सौ रुपये के नोट बंद होने से आई तंगी से लोगों के घर के चूल्हे जलने तक बंद हो गए हैं। छोटे नोट न होने के कारण राशन भी मिलना बंद हो गया है और दुकानदारों ने उधार देना भी बंद कर दिया है।

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इससे लोगों के घरों में खाने के लाले भी पड़ गए है और परिवार के लोग चने और चिलवा खिलाकर बच्चों का पेट भर रहे हैं। इसी तरह की हालत छात्र-छात्राओं की हो गई है। जो कॉलेज के हॉस्टल में नहीं रहकर बाहर सेक्टरों में रह रहे हैं उनको भी खाने के लाले पड़ गए हैं।
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अमर उजाला ने शहर के बैंकों पर लाइन में खडे़ लोगों से बातचीत की तो उनका दर्द उभर कर आंखों से पानी के रूप में झलक गया तो किसी ने गुस्सा निकालकर दर्द को बया किया।

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नोटबंदी से बढ़ी क‌िल्लत

demonetization side effect: shopkeepers stops borrowing, even gas are shut in homes
पांच सौ रुपये का नोट

वह पश्चिम बंगाल अपने परिवार के साथ नोएडा में काम करने आया था। किसी तरह से परिवार का लालन-पालन कर रहा था। मगर एक हजार और पांच सौ रुपये के नोट बंद होने से उनके पास खर्च के लिए रुपये भी नहीं है। तीन दिन से लगातार लाइन में खड़ा होकर चला जाता हूं। मगर अभी तक उसे सौ रुपये के नोट नहीं मिले हैं। जिससे वह घर में चूल्हा भी जला सके।-मनोज सिंह

पिछले चार दिन से घर का राशन और दूध आदि उधार लेकर काम चला रहे थे। मगर अब दुकानदार ने उधार में राशन देने से मना कर दिया है। छुटटी होने के कारण सुबह 4 बजे से बैंक के सामने आकर खड़ा हो गया था। मगर जब नंबर आने की बात हुई तो पता चला कि बैंक में रुपये समाप्त हो गए।-शुभ नारायण मंडल

तीन दिन हो गए और अलग-अलग बैंक पर जाकर लाइन में खड़ा होकर चला जाता हं लेकिन अभी तक सौ रुपये के नोट नहीं मिले हैं। 500 और 1000 रुपये के नोट लिए नहींजा रहे है और जब उसकी बारी आती है तो बैंक अफसर नोट खत्म होना बता देते हैं।-हरदयाल सिंह राघव

मेरे पति और बेटे लगातार तीन दिन से 4000 हजार रुपये पाने के लिए लाइन में लगकर शाम तक वापस चले जाते थे। लेकिन रुपये नहीं मिले। उनकी बेटी को लेने के लिए दामाद पटना से आया हुआ है और रुपये मिलने के बाद ही दामाद-बेटी को रवाना किया जा सकता है। मगर चार दिन से दामाद को घर में बैठा रखा है। इसलिए आज वह स्वयं रुपये लेने के लिए आई है।-रीता देवी(खोड़ा)

आठ नवंबर की शाम पांच बजे कंपनी से तनख्वाह मिली थी तो 500-500 के नोट दिए गए थे। नौ नवंबर को घर का राशन लाना था लेकिन रात में नोट बंद हो गए। इसके बाद तीन दिन तक उधार राशन लेकर गुजारा किया मगर अब उधार मिलना भी बंद हो गया है ऑर चूल्हा भी नहीं जला है। बच्चे भूखे हैं और चिल्वा खिलाकर पेट भरा जा रहा है।-सायरा (खोड़ा)

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