नोटबंदी से दवा कारोबारी प्रभावित: 500 और 1000 रुपये के नोट नहीं ले रहे रिटेलर
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आने वाले दिन मरीजों पर भारी पड़ सकते हैं। साइबर सिटी में जीवनरक्षक दवाओं का स्टॉक 25 फीसदी कम हो गया है। ऐसे में दवाओं को लेकर अफरा-तफरी मच सकती है। बता दें कि नोटबंदी के चलते रिटेलर से होल सेलर तक पैसा नहीं पहुंच पा रहा है।
इसे लेकर होल सेलर ने वित्त मंत्री और दिल्ली सरकार को इसका समाधान निकालने के लिए पत्र भेजा है। साइबर सिटी में करीब 80 होल सेलर हैं, जोकि शहर के 1100 रिटेलरों तक दवाइयों की आपूर्ति करते हैं। होल सेलर पंजाब और दिल्ली की फार्मा कंपनियों से दवाइयां मंगाते हैं।
लेकिन रिटेलरों द्वारा मरीजों से लिए जा रहे पुराने 500 और 1000 रुपये के नोट बैंकों में भीड़ होने के चलते जमा नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में नोटबंदी से दवा कारोबारियों की चेन प्रभावित हो रही है। जिसका साफ असर होल सेलर के स्टॉक पर पड़ रहा है।
नहीं उपलब्ध हो पा रही जीवनरक्षक दवाएं
वहीं, होल सेलर के पास भी जो पैसा पहुंच रहा है, उसे फार्मा कंपनियां नहीं ले रही हैं। होल सेलर के यहां स्टॉक में दवाइयों की कमी होती जा रही है, जिससे रिटेलरों को कुछ जीवनरक्षक दवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
पदाधिकारियों की मानें तो कुछ दवाएं कम हो रही हैं। रिटेलरों से पैसा न मिलने के कारण यह स्थिति पैदा हो गई है कि वह आगे से दवाएं नहीं खरीद पा रहे हैं। जिसके बावत केंद्र व दिल्ली सरकार से इसके समाधान करने की अपील की गई है।
जीवनरक्षक दवाओं के स्टॉक में 25 फीसदी तक कमी आ गई है। आगामी चार-पांच दिन में अगर पैसा होल सेलर तक नहीं पहुंच पाता है तो शहर में दवाओं की कमी हो सकती है, जिससे मरीजों की परेशानी बढ़नी लाजमी है। -चरणजीत अरोड़ा, कंवीनर, गुरुग्राम केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन