दिल्ली हिंसाः पहली बार डीएनए से हुई मृतक की पहचान
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दिल्ली में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी मरने वाले की पहचान डीएनए से की गई है। हिंसा के दौरान 24 फरवरी को अनवर की हत्या कर दी गई थी। उसका शरीर बुरी तरह झुलस चुका था, उपद्रवियों ने पहले उन्हें गोलियां मारी, इसके बाद आग के हवाले कर दिया। जीटीबी अस्पताल में अनवर को भर्ती कराया गया था, लेकिन शव की पहचान नहीं हो पा रही थी। ऐसे में डीएनए टेस्ट किया गया।
जीटीबी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि अनवर का शव बुरी तरह झुलस गया था, ऐसे शव की पहचान सिर्फ डीएनए से ही की जा सकती थी। डीएनए जांच के लिए अनवर और उसके बेटे गुलशन का ब्लड का सैंपल लिया गया।
दोनों के सैंपल मैच होने के बाद पुष्टि हो गई की शव गुलशन के पिता अनवर का ही शव है। सलीम ने उसके चाचा शिव विहार अनवर सब्जी का ठेला लगाते थे। 24 फरवरी के दिन उपद्रवियों की भीड़ ने उन पर हमला कर दिया था।
उनके सीने पर तीन गोली मारी गई और बाद में आग में फेंक दिया। हमने उन्हें जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया था। अनवर के बेटे गुलशन ने उनकी पहचान अस्पताल प्रशासन को बताई थी, लेकिन डॉक्टरों ने डीएनए जांच के बाद ही शव के पहचान की बात कही थी।
कैसे होती है डीएनए जांच
डॉक्टरों के अनुसार डीएनए जांच के लिए पिता और बच्चे का ब्लड सैंपल लिया जाता है। सैंपल को ईडीपीए केमिकल में प्रिजर्व किया जाता है। इसके बाद सैंपल को लैब में भेज दिया जाता है। व्हाइट ब्लड सेल्स से डीएनए का पता चलता है। सैंपल से डीएनए निकाला जाता है और एंजाइम के जरिए डीएनए को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है।
फिर इन टुकड़ों को अलग-अलग किया जाता है। इसके बाद रेडियोएक्टिव डीएनए मार्कर, जिसकी बनावट पहले से ही पता होती है, उस सीक्वेंस से मिलाया जाता है। अगर मिल जाता है तो रेडियोएक्टिव एक्स रे फिल्म पर रेडियोएक्टिव पैटर्न बनाया जाता है। इसके बाद इस पैटर्न को पैरेंट के पैटर्न से मिलाया जाता है। यह मैच कर जाता है तो बच्चे की पहचान हो जाती है।