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दिल्ली दंगा: एक व्यक्ति की हत्या के आरोपी को जमानत से इनकार, अदालत ने उसे डंडा ले जाने वाली भीड़ हिस्सा बताया
Fri, 01 Oct 2021 05:42 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Fri, 01 Oct 2021 05:42 PM IST
सार
सिराजुद्दीन के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि सीसीटीवी फुटेज में उसके पास डंडा दिखाई दे रहा है न कि पिस्टल। उन्होंने कहा राहुल सोलंकी की मौत फायरिंग के कारण हुई थी और डंडे से चोट लगने सहित उसे कोई अन्य चोट नहीं आई थी।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उच्च न्यायालय ने पिछले साल उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान गोली लगने के बाद मारे गए राहुल सोलंकी की हत्या के मामले में सिराजुद्दीन को जमानत देने से इनकार कर दिया है।
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न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने ने कहा कि आरोपी सिराजुद्दीन को रिकॉर्ड में उपलब्ध वीडियो फुटेज के अनुसार डंडा ले जाने वाली भीड़ के हिस्से के रूप में देखा गया है। अदालत ने कहा इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि इस समय आरोप अभी तय किए जाने हैं और गवाहों की गवाही होनी है ऐसे में आरोपी को जमानत देने का कोई आधार नहीं है।
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सोलंकी के भाई और चचेरे भाई के बयान पर यह मामला दर्ज किया गया था। राहुल सोलंकी अपने चचेरे भाई के साथ किराने का सामान खरीदने शिव विहार गए थे और उन्होंने एक गली में भीड़ देखी थी। इसी दौरान भीड़ में से एक लड़का हाथ में पिस्टल लेकर फायरिंग करते हुए आगे आया और अचानक राहुल सोलंकी के गले में गोली मार दी।
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'भीड़ नारे लगाते हुए पथराव और पेट्रोल से हमला कर रही थी'
राहुल को जीटीबी में लाया गया जहां उसे मृत घोषित किया गया था। मृतक के चचेरे भाई ने यह भी आरोप लगाया था कि उन्होंने लोगों को हाथ में पिस्तौल, लाठी और डंडा लिए हुए देखा और नारे लगाते हुए पथराव और पेट्रोल से हमला कर रहे थे।
सिराजुद्दीन के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि सीसीटीवी फुटेज में उसके पास डंडा दिखाई दे रहा है न कि पिस्टल। उन्होंने कहा राहुल सोलंकी की मौत फायरिंग के कारण हुई थी और डंडे से चोट लगने सहित उसे कोई अन्य चोट नहीं आई थी।
ऐसे में उसे राहुल की मौत के लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। वहीं सरकारी वकील ने जमानत पर आपत्ति करते हुए कहा कि सीसीटीवी फुटेज से स्पष्ट है कि आरोपी उस भीड़ में शामिल था जिसने राहुल की हत्या की। ऐसे में वह निर्दोष होने का दावा नहीं कर सकता।