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दिल्ली: हॉजकिंलिंफोमा से ग्रस्त गर्भवती की दुर्लभ सर्जरी, महिला का सुरक्षित प्रसव कराया
Wed, 12 Jan 2022 04:19 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Wed, 12 Jan 2022 04:19 PM IST
सार
देश की राजधानी में स्थित फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट की टीम ने एक बहुत ही जटिल सर्जरी एक महिला का सुरक्षित प्रसव कराया है।
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गर्भवती महिला
- फोटो : shutterstock
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विस्तार
फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट की टीम ने दुर्लभ सर्जरी कर कीमोथेरेपी ले रही महिला का सुरक्षित प्रसव कराया। अस्पताल का दावा है कि देश में इस तरह का यह पहला मामला है। सोफिया नाम की मरीज को फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट में जब लाया गया था तब वह 20 हफ्ते की गर्भवती थी। उसे तेज बुखार था।
एमआरआई जांच करने पर महिला के सीने के अलावा पेट में भी लिंफ नोड्स पाया गया। जांच रिपोर्ट में मरीज के शरीर में हॉजकिंलिंफोमा की पुष्टि हुई। इसके बाद तुरंत महिला की कीमोथेरेपी शुरू की गई। डॉ. दीप्ति अस्थाना ने कहा कि कीमोथेरेपी शुरू होने पर महिला को राहत हुई। 34 हफ्ते पूरे होने होने के बाद प्रसव कराने का फैसला किया गया। मरीज ने स्वस्थ शिशु का जन्म दिया।
कीमोथेरेपी टीम का नेतृत्व कर रहे डॉक्टर मीत प्रीतमचंद कुमार ने कहा कि यह पूरी दुनिया में उन गिनेचुने मामलों में से है जिनके हॉजकिंलिंफोमा के उपचार के दौरान गर्भस्थ शिशु पर कीमोथेरेपी का कोई प्रभाव नहीं पड़ा था।
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एमआरआई जांच करने पर महिला के सीने के अलावा पेट में भी लिंफ नोड्स पाया गया। जांच रिपोर्ट में मरीज के शरीर में हॉजकिंलिंफोमा की पुष्टि हुई। इसके बाद तुरंत महिला की कीमोथेरेपी शुरू की गई। डॉ. दीप्ति अस्थाना ने कहा कि कीमोथेरेपी शुरू होने पर महिला को राहत हुई। 34 हफ्ते पूरे होने होने के बाद प्रसव कराने का फैसला किया गया। मरीज ने स्वस्थ शिशु का जन्म दिया।
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कीमोथेरेपी टीम का नेतृत्व कर रहे डॉक्टर मीत प्रीतमचंद कुमार ने कहा कि यह पूरी दुनिया में उन गिनेचुने मामलों में से है जिनके हॉजकिंलिंफोमा के उपचार के दौरान गर्भस्थ शिशु पर कीमोथेरेपी का कोई प्रभाव नहीं पड़ा था।
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