दिल्ली दंगे पर राजनीति शुरू, BJP पर गंभीर आरोप
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दिल्ली के त्रिलोकपुरी में दिवाली के पटाखे जलाने को लेकर हुए सांप्रदायिक दंगे के चलते हालात काफी बिगड़े हुए हैं। इलाके में अब भी धारा 144 लगी हुई है, ऐसे में ही दिल्ली की राजनीति में सक्रिय कमोबेस सभी राजनीतिक पार्टियां इसका फायदा उठाने में लग गई हैं।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार और उपराज्यपाल नजीब जंग पर सवाल खड़े किए है। कांग्रेस ने सवाल किया है कि खुफिया ब्यूरो की ओर से एक महीने पहले ही सूचना देने के बावजूद गृह मंत्रालय ने आखिर कार्रवाई क्यों नहीं की। पार्टी ने कहा कि दिल्ली में दंगे हो रहे हैं और उपराज्यपाल विदेश में छुट्टी मना रहे हैं। पार्टी ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह और नजीब जंग का इस्तीफा मांगा है।
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि दिल्ली में दशकों से कभी ऐसी हिंसक घटनाए नहीं हुईं। मगर मोदी सरकार के सत्ता में आने के महीनों के भीतर ही उत्तर प्रदेश, बिहार और अब दिल्ली में दंगे शुरू हो गए हैं। पार्टी ने भाजपा, बजरंग दल, विश्व हिंदु परिषद पर दंगे भड़काने का आरोप लगाया है।
पार्टी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि दिल्ली में चुनाव होने से ठीक पहले लोगों को आपस में लड़ाकर पार्टी सत्ता में आना चाहती है। सिंघवी ने कहा कि भाजपा के पूर्व विधायक सुनील कुमार वैद्य की भूमिका की जांच होनी चाहिए। पार्टी ने आप नेताओं पर भी जानबूझकर चुप रहने का आरोप लगाया है। सिंघवी ने कहा कि दिल्ली में शांति व्यवस्था कायम रखने की जिम्मेदारी उपराज्यपाल के जरिए केंद्र सरकार की है। उसे इसके लिए दिल्ली की जनता को जवाब देना होगा।
गौरतलब है कि उपराज्यपाल नजीब जंग पहले कांग्रेस के हितैषी माने जाते थे। लेकिन वह इकलौते ऐसे राज्यपाल हैं, जो कांग्रेस सरकार में नियुक्त हुए और अब भी बने हुए हैं। उनके अलावा सभी कांग्रेस शासन में नियुक्त हुए राज्यपालों को भाजपा ने हटा दिया है। अब कांग्रेस नजीब जंग पर लगातार हमले बोल रही है।
'भाजपा की शह पर हुए दंगे'
‘दिल्ली के त्रिलोकपुरी में सांप्रदायिक तनाव बना हुआ है। ऐसे हालात लोकसभा चुनाव से पूहले यूपी में भी हुए थे। हमने त्रिलोकपुरी जाकर शांति के लिए बातचीत करने की पेशकश की थी, लेकिन पुलिस आयुक्त ने अनुरोध करके मना कर दिया। इसलिए हमने पुलिस से मांग की है कि त्रिलोकपुरी समेत पूरी दिल्ली में सांप्रदायिक माहौल खराब करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए।’ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह ने यह बातें सोमवार को पुलिस आयुक्त से मुलाकात के बाद पत्रकार वार्ता में कहीं।
सोमवार को विधायक दल के नेता हारून यूसुफ, मुख्य प्रवक्ता मुकेश शर्मा, विधायक चौधरी मतीन अहमद, जयकिशन, प्रहलाद सिंह साहनी, आसिफ मोहम्मद खान समेत सात विधायकों ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर कहा कि दिल्ली में साजिश के तहत माहौल बिगाड़ा जा रहा है। हारून यूसुफ ने कहा कि लोगों को बांटने की साजिश करने वाले दिल्ली में सक्रिय हो गए हैं।
वहीं विधायक जयकिशन ने कहा कि बाल्मीकि समाज के लोग भाजपा समर्थित लोगों के हाथों में न खेलें। चौधरी मतीन अहमद बोले, बेगुनाहों को न पकड़ा जाए। सभी कांग्रेस नेताओं ने कहा कि दिल्ली को किसी भी कीमत पर मुज्जफरनगर नहीं बनने देंगे।
प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी भाजपा के सहयोग में काम कर रही है। त्रिलोकपुरी के साथ पटपड़गंज और कोंडली विधानसभा हैं। तीनो में ‘आप’ के विधायक हैं। दंगा फैलने के समय इन्होंने नहीं संभाला। तीन दिन बाद वहां पहुंचे। सिंह ने पुलिस आयुक्त ने कहा है कि अगर 24 घंटे में हालात सामान्य नहीं हुए तो पार्टी कार्यकर्ता गृहमंत्री आवास का घेराव करेंगे।
सांप्रदायिक हिंसा के लिए भाजपा के विधायक जिम्मेदार!
आम आदमी पार्टी (आप) ने आरोप लगाया है कि त्रिलोकपुरी में सुनियोजित तरीके से सांप्रदायिक हिंसा कर्राई गई है। इसका मकसद समाज को धर्म के आधार पर बांटना है। पार्टी ने इशारो-इशारो में मामले में भाजपा के पूर्व विधायक की भूमिका को संदिग्ध माना है। पार्टी ने आम लोग अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील है।
पार्टी के त्रिलोकपुरी और कोंडली के विधायक राजू धींगान और मनोज कुमार ने प्रभावित इलाकों का बीती रात दौरा किया। आप ने मांग की है कि दिल्ली पुलिस को भाजपा के पूर्व विधायक सुनील कुमार वैद्य की भूमिका की जांच करनी चाहिए। आप का आरोप है कि दिवाली की रात में उन्होंने एक बैठक की थी। इसके बाद इलाके में हिंसा फैली। पार्टी का कहना है कि यह जांच का विषय है कि वैद्य ने किस मकसद से बैठक बुलाई थी और बैठक के बाद वह कहां गए।
पार्टी का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस को पहले ही अलर्ट किया था कि दिवाली के मौके पर दिल्ली के कुछ इलाकों में सांप्रदायिक हिंसा हो सकती है। बावजूद इसके दिल्ली पुलिस ने कोई एडवायजरी जारी नहीं की। ऐसे में आम दिल्लीवासियों को जानकारी मिलनी चाहिए कि पुलिस ने इससे बचने के लिए क्या कदम उठाए थे।
सोशल मीडिया से दंगा भड़काने की कोशिश
दिल्ली के त्रिलोकपुरी में लगातार आ रहे हॉक्स कॉल की वजह से शांति बहाल करने में पुलिस को दिक्कत आ रही है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि इलाके में तनाव बढ़ने के साथ ही पुलिस के पास हॉक्स कॉल आने की संख्या बढ़ती चली गई। पुलिस को अब तक ऐसी करीब 500 कॉल मिलीं, लेकिन वहां जाने पर कुछ भी नहीं मिला।
अधिकारियों का कहना है कि कॉल करने वाले लोग एक ओर पुलिस को गुमराह कर रहे थे और दूसरी तरफ बवाल करने में लगे थे। पुलिस ने ऐसे 14 लोगों को चिह्नित कर उन्हें गिरफ्तार किया है। अधिकारियों का मानना है कि सोशल मीडिया के जरिये भी यहां के हालात को बिगाड़ने की कोशिश की गई है। पुलिस हालात की जांच कर रही है। जांच के दौरान र्कई अन्य लोगों पर भी पुलिस शिकंजा कस सकती है।
उधर, दिवाली की रात दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में हुई सांप्रदायिक हिंसा को लेकर केंद्र सरकार ने दिल्ली पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इससे पहले पुलिस द्वारा भेजी गई रिपोर्ट को गृह मंत्रालय ने नाकाफी करार दिया था। मामले में अब तक पुलिस ने 70 लोगों को गिरफ्तार किया है।
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने शनिवार को गृह मंत्रालय को हिंसा की तथ्यात्मक रिपोर्ट भेजी थी। जिसे नकारते हुए मंत्रालय ने हिंसा का कारण और इसे रोकने के लिए पुलिस द्वारा किए गए प्रयासों की जानकारी समेत विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही मंत्रालय ने क्षेत्र में हिंसा को रोकने के लिए पुलिस को सभी संभव प्रयास करने के निर्देश दिए हैं।
हिंसा के कारण पूर्वी दिल्ली में हालात चिंताजनक बने हैं। यहां पर त्वरित कार्रवाई दल और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल निगरानी रखे हुए है। पुलिस के अनुसार, शुक्रवार और शनिवार तक चली इस हिंसा में 35 लोग घायल हुए हैं, जिसमें 13 पुलिस वाले भी शामिल हैं।