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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Delhi news: 100th day of farmers protest against new agriculture laws 

किसान आंदोलन का 100वां दिन आज: अब तक नहीं पिघली सरकार, गतिरोध बरकरार, आज केएमपी जाम

Sat, 06 Mar 2021 04:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा सर्वेश कुमार, नई दिल्ली
सर्वेश कुमार, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 06 Mar 2021 04:16 AM IST
सार

  • कड़ाके की ठंड में परवान चढ़ा आंदोलन, गर्मी में आई नरमी
  • दो दिन बाद बन जाएगा देश का सबसे लंबा आंदोलन

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Delhi news: 100th day of farmers protest against new agriculture laws 
संघर्ष के 100 दिन... - फोटो : amar ujala

विस्तार

राजधानी की सीमाओं पर अपने हक की आवाज बुलंद कर रहे किसानों के आंदोलन का शनिवार को 100वां दिन है। कड़ाके की ठंड से दिल्ली का मौसम धीरे-धीरे गरम हो रहा है, लेकिन केंद्र सरकार और किसानों के रिश्तों में जमी बर्फ अभी तक नहीं पिघली है। दोनों अभी भी वहीं खड़े हैं, जहां 100 दिन पहले थे। इस बीच आज सुबह 11 बजे से लेकर शाम को 4 बजे तक किसान केएमपी पर जाम लगाएंगे। यह कार्यक्रम पूर्वघोषित है। 

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दिलचस्प यह कि दो दिन बाद किसान संघर्ष देश के आंदोलन के इतिहास का सबसे लंबा आंदोलन बन जाएगा। इससे पहले नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ शाहीन बाग में 101 दिन तक आंदोलन चला था। 
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तीन नए कृषि कानूनों को रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी समेत अन्य मांगों के समर्थन में 26 नवंबर से किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन की शुरुआत की थी। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों के सीमाओं पर पहुंचने के बाद आंदोलन ने शुरुआती दौर में रफ्तार पकड़ ली। मांगें पूरी होने तक घर न लौटने के फैसले पर अडिग किसानों को सीमाओं से बुराड़ी ग्राउंड पर प्रदर्शन के लिए जगह की सिफारिश की गई, लेकिन इसे खारिज कर दिया गया था।
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आंदोलनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सिंघु बॉर्डर पर आंसू गैस के गोले छोड़ गए, परंतु विरोध के स्वर और तेज होने लगे। आखिरकार एक दिसंबर को सरकार ने किसानों को पहले दौर की बातचीत के लिए बुलाया, जो बेनतीजा रही और कमोबेश आखिरी दौर तक सरकार की तमाम पेशकश को किसानों ने खारिज कर दिया। 11 दौर की वार्ता के सफल न होने पर किसानों ने 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली निकालने की चेतावनी दे डाली। इसमें बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉली पर पहुंचकर विरोध जताया गया।


दो महीने बाद आया यू-टर्न
किसान संगठनों ने दिल्ली में 26 जनवरी की ट्रैक्टर रैली के लिए पुलिस से इजाजत मांगी। दिल्ली पुलिस और किसान संगठनों के बीच हुई वार्ता में आउटर रिंग रोड पर रैली निकालने की बात कही गई थी, लेकिन पुलिस ने रैली के लिए बाहरी दिल्ली के रूट तय किए। इसके बाद भी आंदोलनकारियों में से कुछ लोग उग्र हो गए। आईटीओ, लालकिला, नांगलोई समेत दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में हुई हिंसा और उपद्रव के बाद आंदोलन में यू-टर्न आया। उपद्रवियों के खिलाफ मामले दर्ज होने के बाद गिरफ्तारियां भी हुईं। इस दौरान किसान नेताओं के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई, जबकि समर्थकों पर एनआईए ने भी शिकंजा कसा।

घटना न दोहराएं, आंदोलन स्थल के रास्ते भी बंद
आंदोलन का रुख बदलते ही तीनों बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ा दी गई। बैरिकेडिंग मजबूत कर दी गई। सिंघु, टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर के आंदोलन स्थल को बंद करने के लिए बैरिकैंडिंग और कंटीली तारें लगाई गईं। जर्सी बैरियर के बीच कंक्रीट डलवाकर उसे पक्का कर दिया गया। रास्ते बंद होने की वजह से लोगों के लिए एक से दूसरे शहरों के लिए आने-जाने में अभी भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सुरक्षा के लिए एहतियात बढ़ाए जाने पर भी सिंघु बॉर्डर पर पथराव की घटना हुईं। किसान संगठनों ने इसके लिए सरकार पर आरोप भी लगाए। दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा को देखते हुए सुरक्षा के इंतजाम और भी पुख्ता कर दिए गए हैं, ताकि फिर दोबारा ऐसी घटनाओं की आशंका न रहे।

कब क्या हुआ...

  • 26 नवंबर को पंजाब और हरियाणा के किसान सिंघु और टीकरी बॉर्डर पर पहुंचे।
  • 27 नवंबर को उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में किसान गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे।
  • 27 नवंबर को किसानों को तितर-बितर करने के लिए सिंघु बॉर्डर पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए।
  • एक दिसंबर को किसानों के साथ सरकार की दूसरी वार्ता हुई। इससे पहले पंजाब में विरोध के दौरान ही 14 अक्तूबर, 2020 को किसानों और सरकार की पहली बार वार्ता हुई।
  • तीसरी बैठक तीन दिसंबर को हुई, लेकिन बेनतीजा रही।
  • पांच दिसंबर को किसानों के साथ सरकार की चौथे दौर की बैठक भी बेनतीजा।
  • आठ दिसंबर को पांचवीं वार्ता हुई, इसी दिन किसानों ने भारत बंद का आह्वान किया था।
  • 30 दिसंबर को छठे दौर, चार जनवरी को सातवें दौर की जबकि आठ जनवरी को आठवें दौर की वार्ता हुई। 
  • 11 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों पर रोक लगाने के आदेश दिए थे।
  • 15 जनवरी को नौवीं बार सरकार के साथ वार्ता हुई। 
  • 20 जनवरी को 10वें दौर की वार्ता हुई। इसमें केंद्र सरकार ने कृषि कानूनों को डेढ़ से दो साल के लिए निलंबित करने और कानूनों पर विचार करने के लिए समिति के गठन का सुझाव दिया। हालांकि, किसानों ने इसे खारिज कर दिया। 
  • 22 जनवरी, 2021 को किसानों और सरकार के बीच 11वें दौर की वार्ता हुई।


घटनाक्रम 

  • आंदोलन के सौ दिनों के दौरान 268 किसानों की मौत हुई। 
  • 26 जनवरी को हुए उपद्रव के बाद दिल्ली पुलिस ने 59 मामले दर्ज, 158 किसान किए गए गिरफ्तार।
  • 14 मामलों की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है। 130 जेल में हैं, जबकि 28 को जमानत मिल चुकी है। 
  • उपद्रव में शामिल लोगों सहित किसान नेताओं को दिल्ली पुलिस ने दो दो बार नोटिस जारी किया है, लेकिन वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
  • गाजीपुर से बड़ी संख्या में लोग आईटीओ और लालकिला पहुंचे थे, जबकि सिंघु से लालकिला और टीकरी बॉर्डर से लोग नांगलोई, नजफगढ़ और कनॉट प्लेस पहुंचे थे।

टिकौत ने कहा- लंबा चलेगा आंदोलन, तैयारियां पूरी रखना

किसान आंदोलन के ज्यादातर बड़े नेता शुक्रवार को टीकरी बॉर्डर पर डटे हुए थे। वहां पहुंचे भाकियू (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने किसानों से कहा कि अभी आंदोलन और लंबा चलेगा, इसलिए तैयारियां पूरी रखना। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि वे मजबूत स्थिति में हैं, जिसे किसान आंदोलन की मजबूती देखनी है वह गाजीपुर बॉर्डर आकर देख सकता है।

टीकरी बॉर्डर पर किसान सोशल आर्मी द्वारा स्थापित किए गए स्कूल में टिकैत पहुंचे थे। वहां उन्होंने इसके संस्थापक अनिल मलिक और अनूप सिंह चानौत की सराहना की। टीकरी बॉर्डर पर सुबह पहुंचे गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि नए कृषि कानूनों की समाप्ति तक हम पीछे नहीं हटेंगे। वहीं, आंदोलन को 100 दिन पूरा होने पर स्वराज इंडिया के संयोजक योगेंद्र यादव ने कहा कि आंदोलन एक बार फिर से मजबूत स्थिति में पहुंच गया है। देश की राजनीति पर भी इसका असर दिखने लगा है। किसान गर्मियों की तैयारी भी शुरू कर चुके हैं।

आज केमएपी करेंगे बंद
किसान आंदोलन के 100 दिन होने पर किसान मांगों के समर्थन में शनिवार को कुंडली-मानेसर-पलवल ( केएमपी) एक्सप्रेसवे को जाम करेंगे। सुबह 11 बजे से लेकर शाम को 4 बजे तक किसान केएमपी पर मौजूद रहेंगे।

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