कोरोना को बड़ी लापरवाही: आम कूड़े के साथ ले जा रहे हैं होम आइसोलेशन वाले मरीजों का कचरा
- कोरोना मरीजों के कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण बंद, संक्रमण फैलने की बड़ी वजह बन सकता है संक्रमित कचरा
- पहले फेज में कोरोना मरीजों के घर से उठाया जाता था कूड़ा, विशेष कर्मी विशेष ड्रेस में करते थे निस्तारण, इस चरण में पूरी तरह बंद है ये प्रक्रिया
- राजधानी में 3708 कंटेनमेंट जोन और 19455 एक्टिव केस, 10 हजार से ज्यादा का होम आइसोलेशन में चल रहा इलाज
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विस्तार
कोरोना का यह फेज बहुत संक्रामक है। इसके तेजी से फैलने के गंभीर खतरे के बावजूद होम आइसोलेशन में इलाज करा रहे मरीजों के घर से निकलने वाले कचरे के निस्तारण में उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। इसे सामान्य कचरे के साथ कचरा गाड़ी में डाला जा रहा है, जिसे बाद में बड़े डंपिंग ग्राउंड में खुले में फेंका जा रहा है। एजेंसियों की यह लापरवाही लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है क्योंकि इस तरह कचरा फेंकने से कोरोना संक्रमण के और तेजी से फैलने का खतरा बढ़ गया है। कोरोना संक्रमित कचरे का सबसे ज्यादा खतरा होम आइसोलेशन में इलाज करा रहे मरीजों से ही है, क्योंकि अस्पतालों में कचरा निस्तारण विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से किया जाता है, जहां एक प्रक्रिया का पालन करने से संक्रमण फैलने का खतरा काफी कम रहता है। राजधानी में इस समय 10 हजार से ज्यादा लोग होम आइसोलेशन में कोरोना का इलाज करा रहे हैं।
क्या थी प्रक्रिया
पूर्वी दिल्ली नगर निगम के स्टैंडिंग कमेटी के पूर्व चेयरमैन संदीप कपूर ने अमर उजाला को बताया कि कोरोना के पहले फेज में कचरा निस्तारण के लिए एक प्रक्रिया का पालन किया जाता था। दिल्ली सरकार से उन्हें एक लिस्ट मिल जाती थी, जिसमें सभी ऐसे मरीजों की वार्डवार सूची होती थी, जो अपने घर पर ही रहकर होम आइसोलेशन में कोरोना का इलाज करा रहे होते थे।
यह लिस्ट मिल जाने के बाद प्रत्येक वार्ड में विशेष कर्मियों की नियुक्ति कर दी जाती थी, जो इन मरीजों के घर से रोजाना जाकर ये संक्रमित कचरा उठाया करते थे। ये कर्मी विशेष ड्रेस में जाते थे, जिससे स्वयं इन्हें भी संक्रमण से बचाया जा सकता था। इस कचरे को विशेष गाड़ियों से ले जाकर वैज्ञानिक तरीके से इनका निस्तारण कर दिया जाता था।
लेकिन पहले फेज के बाद जब राजधानी में कोरोना पीड़ितों की संख्या कम हो गई, तब दिल्ली सरकार से उन्हें यह लिस्ट भेजनी बंद कर दी गई। इसके बाद से ही यह प्रक्रिया बंद हो चुकी है। अभी तक यह प्रक्रिया दोबारा शुरू नहीं हुई है।
अन्य इलाकों में भी यही स्थिति
पूर्वी दिल्ली नगर निगम की तरह उत्तरी दिल्ली नगर निगम और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम में भी होम आइसोलेशन में इलाज करा रहे मरीजों के कचरे को उठाने के लिए कोई प्रबंधन नहीं किया जा रहा है। एनडीएमसी एरिया में भी ऐसे मरीजों के लिए कोई अलग व्यवस्था नहीं की जा रही है।
दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के एक अधिकारी के मुताबिक़ अभी जिन मरीजों का होम आइसोलेशन में इलाज चल रहा है, कोरोना हेल्प सेंटरों से उनका प्रतिदिन हाल-चाल पूछा जा रहा है। स्थिति बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन कचरा प्रबंधन के लिए कोई विशेष प्रक्रिया नहीं अपनाई जा रही है।
क्या है स्थिति
राजधानी में (7 अप्रैल शाम तक) कोरोना के 19455 एक्टिव केस हैं। इनमें 10,048 मरीजों का होम आइसोलेशन में इलाज चल रहा है, तो शेष अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। कोरोना मरीज राजधानी के हर इलाके में हैं, लिहाजा कोरोना संक्रमित कचरे के लिए उचित प्रबंधन न होने से इनसे संक्रमण बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
ज्यादा संक्रमण वाले इलाकों को कंटेनमेंट जोन बनाकर इनसे होने वाले किसी संक्रमण को रोकने की कोशिश की जा रही है, इस समय राजधानी में 3708 कंटेनमेंट जोन बनाये जा चुके हैं, लेकिन यहां भी कचरा निष्पादन के लिए उचित व्यवस्था नहीं की गई है। इन इलाकों से निकलने वाले कचरे को भी सामान्य कचरों की तरह फेंका जा रहा है।
कैसे होना चाहिए कोविड कचरे का निस्तारण
आरएमएल अस्पताल के डॉक्टर आरके महाजन ने अमर उजाला को बताया कि कोविड-19 कचरे का निस्तारण स्वास्थ्य मंत्रालय के द्वारा जारी दिशानिर्देश के अनुसार किया जाता है। ये दिशानिर्देश 2020 में जारी किये गये थे, जिन्हें डीडीएमसी (दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट कमेटी) के जरिये लागू कराया जाता है। नियमों में यह बिलकुल स्पष्ट है कि कोविड कचरे को अन्य कचरे से पूरी तरह अलग रखा जायेगा। इन्हें उठाने वाले कर्मी भी विशेष किट्स में ही इन कचरों को उठाएंगे, जिससे इन्हें उठाते समय वे स्वयं संक्रमण के शिकार न हों।
कोविड कचरे को उठाने से लेकर इन्हें निस्तारण केंद्र तक ले जाने के लिए पूरी तरह अलग वाहन और अलग कर्मी नियुक्त किये गये हैं। अस्पताल से कचरे को उठाने के लिए बायोटेक वेस्ट सोल्यूशन नाम की प्राइवेट कंपनी को जिम्मेदारी दी गई है। कचरे को वैज्ञानिक विधि से निस्तारित किया जाता है।
कोविड मरीजों से मास्क, ग्लव्स, पीपीई किट्स सहित दिन-प्रतिदिन के इस्तेमाल में आने वाली वस्तुओं का कचरा निकलता है। मरीजों के साथ-साथ इनके लिए काम करने वाले डॉक्टरों, नर्सों सहित अन्य स्टाफ का भी प्रतिदिन भारी मात्रा में कचरा निकलता है।