Delhi Metro: दिल्ली में 26 जनवरी को सभी लाइनों पर सुबह चार बजे से शुरू होंगी मेट्रो सर्विस, जानें वजह
डीएमआरसी ने बताया कि सभी लाइनों पर मेट्रो शुक्रवार 26 जनवरी को सुबह चार बजे से संचालित होगी ताकि जो लोग गणतंत्र दिवस की परेड देखने कर्तव्य पथ आ रहे हैं उन्हें सहुलियत हो सके।
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गणतंत्र दिवस पर सुबह चार बजे से सभी लाइनों पर मेट्रो की सुविधा मिलेगी। छह बजे तक ट्रेन हर 30 मिनट के अंतराल पर मिलेगी। इसके बाद संचालन नियमित समयसारिणी से होगा। जिन लोगों के पास गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने का निमंत्रण पत्र होगा, वह मेट्रो से निशुल्क सफर कर सकेंगे। कार्ड दिखाने पर मेट्रो काउंटर पर कूपन मिलेगा। इससे यात्रियों की मेट्रो में प्रवेश व निकासी संभव होगी और वह उद्योग भवन व केंद्रीय सचिवालय तक सफर कर सकेंगे। इस बार भी 26 जनवरी को परेड स्थल के करीबी मेट्रो स्टेशन पर प्रवेश और बाहर निकलने की अनुमति नहीं होगी। केंद्रीय सचिवालय, उद्योग भवन स्टेशनों पर सुबह चार बजे से दोपहर दो बजे तक केवल परेड के लिए आमंत्रित लोगों को ही बोर्डिंग और डी बोर्डिंग की इजाजत होगी।
परेड देखने वालों के लिए सुविधा
मेट्रो के अधिकारियों ने बताया कि परेड देखने वाले जिन यात्रियों के निमंत्रण कार्ड पर एन्क्लोजर एक से नौ और वी1-वी2 लिखा हुआ है, उन्हें उद्योग भवन स्टेशन पर ट्रेन छोड़नी पड़ेगी, जबकि एन्क्लोजर 10-24 और वीएन में जाने वाले दर्शक को केंद्रीय सचिवालय पर मेट्रो छोड़नी होगी। किसी भी हालत में दर्शक कर्तव्य पथ पार नहीं कर सकेंगे। इस रास्ते के दोनों तरफ स्थित मेट्रो स्टेशन से निकलकर नियत दीर्घा में जाना संभव होगा।
दिल्ली में 25 की रात से 26 जनवरी को परेड खत्म होने तक भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। इस कारण सभी 24 बॉर्डरों पर मंगलवार सुबह तक काफी संख्या में वाहन एकत्रित हो गए।
पहली बार परेड का उद्घोष महिला कलाकार पारंपरिक संगीत, शंख, नगाड़ा से करेंगी
इस बार गणतंत्र दिवस परेड का आगाज भारतीय सेनाओं का मार्चिंग दस्ता नहीं करेगा। पहली बार 75वें गणतंत्र दिवस परेड का उद्घोष 100 महिला कलाकार '' आह्वान '' (युद्ध का आह्वान) थीम पर पारंपरिक वाद्ययंत्र, संगीत, शंख, नागड़ा, ढोल, ताशा, तुतारी बजाते हुए करेंगी। इसका अर्थ है कि प्राचीन काल में युद्ध शुरू होने और युद्ध के दौरान जैसे शंखनाद होता था, उसी तर्ज पर कर्तव्य पथ पर शंखनाद होगा। भारत के इतिहास में पहली बार परेड की शुरुआत रक्षा मंत्रालय की जगह संस्कृति मंत्रालय करेगा। परेड में हजारों साल पुरानी संस्कृति, कला, लोकतंत्र के साथ-साथ वर्ष 2047 में नये भारत की झलक भी दिखेगी।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की संयुक्त सचिव उमा नंदुरी और संगीत नाटक अकादमी की सचिव डॉ. संध्या पुरेचा ने बताया कि 75वां गणतंत्र दिवस समारोह सबसे अलग होगा। सालों से 26 जनवरी परेड की शुरुआत हमेशा सैन्य बैंड के साथ की जाती रही है। लेकिन इस बार कर्तव्य पथ पर महिला कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ परेड का आगाज लोक और पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्र बजाते हुए करेंगी। यह महिलाएं दैवीय नारी शक्ति का प्रतीक होगी। चतुश्राम पर आधारित प्रस्तुति में 20 महिला कलाकार महाराष्ट्र का पारंपरिक ढोल और ताशा, तेलगांना की 16 कलाकार डप्पू, पश्चिम बंगाल की 16 कलाकार ढाक व ढोल पर थाप तो आठ कलाकार शंख व 10 और चेंडा बजाएंगे । वहीं, कर्नाटक के 30 कलाकार ढोलू कुनिथा, चार-चार कलाकार नादस्वरम, तुतारी और झांझ के साथ ताल मिलाएंगी। इसकी संकल्पना संगीत नाटय अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा, कोरियोग्राफी देवेन्द्र शेलार,संगीत रंजीत बारोट,वॉयस ओवर हरीश भिमानी और गीतकार सुभाष सहगल हैं।
कर्तव्य पथ पर '' अनंत सूत्र - द एंडलेस थ्रेड '' में 1900 प्राचीन पारंपरिक साड़ियों को जानने का मौका मिलेगा। दर्शक दीर्घा में सीटों के पीछे क्यूआर कोड के साथ साड़ियों की प्रदर्शनी लगाई गई है। इसमें देशभर की पारंपरिक पहचान को दर्शाती साड़ियों को देखने और जानने का मौका मिलेगा। विदेशी मेहमानों की दीर्घा में दो साड़ी होंगी। इसमें एक 150 साल पुरानी कश्मीर -पंजाब बार्डर पर पारंपरिक गोटापट्टी पर आधारित साड़ी डिस्प्ले होगी। जबकि दूसरी बच्चों द्वारा तैयार पेंटिंग वाली साड़ी होगी।