Delhi Metro: रिठाला-नरेला रूट पर मेट्रोलाइट को ना, नॉर्मल मेट्रो चलाने की है योजना
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने यू-टर्न लेते हुए रिठाला-नरेला रूट पर मेट्रोलाइट की जगह अब सामान्य मेट्रो चलाने की योजना बनाई है। डीएमआरसी ने इसका प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेज दिया है।
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रिठाला-बवाना-नरेला रूट पर अब मेट्रोलाइट नहीं चलेगी। इसकी जगह सामान्य मेट्रो चलाने की योजना है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने इसका प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेज दिया है।
बदलाव की वजह प्रस्तावित कॉरिडोर के इर्द-गिर्द तेजी से हो रहा विकास है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) इस इलाके में आवासीय योजनाएं ला रहा है। वहीं, बवाना और नरेला के औद्योगिक क्षेत्रों सहित कई और सुविधाएं हैं। मेट्रो की सुविधा होने से हजारों लोगों के लिए रोजाना अपने दफ्तर, फैक्ट्री, अस्पताल सहित दूसरे जरूरी काम को पूरा करना भी आसान होगा। बड़ी आबादी की जरूरतें पूरी करने के लिए इस क्षेत्र में ट्रांजिट ओरिएंटेड डवलेपमेंट (टीओडी) की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। यात्रियों की सहूलियत के लिए शुरुआत में तीन कोच की मेट्रो का परिचालन होगा। बाद में जरूरत के मुताबिक कोच की संख्या में बढ़ोतरी की जाएगी।
डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक विकास कुमार ने बताया कि अब रिठाला-बवाना-नरेला कॉरिडोर पर मेट्रोलाइट के बजाय दूसरी लाइनों की तरह ही मेट्रो चलेंगी। वक्त के साथ इस क्षेत्र में काफी बदलाव हो रहा है। डीडीए की ओर से आवासीय परियोजनाओं के तहत हजारों फ्लैट तैयार किए जा रहे हैं। पहले यात्रियों की कम संख्या को देखते हुए मेट्रोलाइट चलाने की योजना थी। यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी की उम्मीद को देखते हुए स्टेशनों की संख्या में भी बढ़ोतरी की जाएगी। मास्टर प्लान-2041 के लिहाज से इस क्षेत्र में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलेपमेंट (टीओडी) की संभावना है। इससे यात्रियों को घर से मेट्रो, मेट्रो से दफ्तर या फैक्ट्री, मॉल्स सहित तमाम जरूरी सुविधाएं भी इसी मेट्रो रूट पर उपलब्ध होंगी। रिठाला-बवाना-नरेला के बीच करीब 22.91 किलोमीटर में मेट्रो का परिचालन करने किया जाएगा। डीएमआरसी के इस प्रस्ताव पर केंद्र क मंजूरी मिलने पर कॉरिडोर पर निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
फेज-4 के तीन प्रोजेक्ट पर मंजूरी का इंतजार
दिल्ली मेट्रो फेज-4 के तीन कॉरिडोर (एयरोसिटी-तुगलकाबाद, जनकपुरी पश्चिम-आरके आश्रम और मौजपुर-मजलिस पार्क) पर फिलहाल निर्माण चल रहा है। जबकि तीन शेष कॉरिडोर पर अभी तक केंद्र से मंजूरी नहीं मिली है। इनमें इंद्रप्रस्थ -इंद्रलोक (12.37 कि.मी), लाजपत नगर-साकेत जी ब्लॉक( 8.38 कि.मी.) और रिठाला-बवाना-नरेला(22.91) के बीच करीब 40 किलोमीटर के दायरे में तीन कॉरिडोर तैयार होंगे। यात्रियों की कम संख्या और सामान्य मेट्रो से 40 फीसदी कम खर्च को देखते हुए रिठाला-नरेला लाइन पर मेट्रोलाइट की योजना थी। लेकिन अब इसको बदला जा रहा है।
टीओडी से बढ़ेंगी सहूलियत
ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपेमेंट (टीओडी) के तहत वाणिज्यिक, रिहायशी सुविधाएं आसपास होती हैं। इससे लोगों को कम से कम परिवहन साधनों का इस्तेमाल कर भी गंतव्य तक पहुंच की सुविधा मुहैया की जाती है। मेट्रो सेवाएं शुरू होने से लोगों को अपने घरों के नजदीक मेट्रो, मेट्रो स्टेशन से काफी कम दूरी पर फैक्ट्री, दफ्तर, मॉल्स, बाजार, अस्प्ताल जैसी सुविधाएं मिलेंगी। इस क्षेत्र में चल रही निर्माण गतिविधियां और आगामी परियोजनाओं को देखते हुए मेट्रो सेवा की शुरुआत से रोजाना लाखों यात्रियों की सहूलियतें बढ़ जाएंगी। गंतव्य तक कम वक्त में बगैर परेशानी पहुंच सकेंगे। सरकार भी एजेंसियों के साथ मिलकर टीओडी परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही है।
कम आबादी वाले क्षेत्रों के लिए है मुफीद
कम आबादी वाले क्षेत्रों के लिए मेट्रोलाइट एक हल्की मेट्रो है। इसमें कोच की संख्या कम होती है और सड़क के साथ साथ बने हुए ट्रैक पर चलती हैं। कम दूरी और कोच कम होने के कारण इसमें यात्रियों की क्षमता भी कम होती है। अलग ट्रैक पर चलने के कारण यात्रियों को न तो ट्रैफिक जाम की समस्या का सामना करना पड़ता और न ही गंतव्य तक पहुंचने में देरी होती है। मेट्रोलाइट की रफ्तार भी 50-60 कि.मी प्रति घंटे के करीब होती है और इसे फीडर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।