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मेट्रो लेडीज कोच में क्या बातें करती हैं युवतियां

Tue, 10 Mar 2015 08:06 AM IST
Updated Tue, 10 Mar 2015 08:06 AM IST
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Delhi metro ladies coach talks

दिल्ली मेट्रो के लेडीज कोच के भीतर का समां किसी ब्यूटी पार्लर से कम नहीं होता। रोज के सफर में महिलाएं और लड़कियां कभी मेकअप करती दिखती हैं, कभी अपने बाल संवारते हुए तो कभी नाखून पर नेलपॉलिश लगाते हुए। इस कोच में महिलाएं इतना सहज और आजाद महसूस करती हैं कि वे बिना किसी की परवाह किए बिना अपनी जिंदगी से जुड़ी बातें आपस में शेयर करती हैं।

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वे इस बात की परवाह भी नहीं करती कि उनकी बातें कोच मे सफ़र करने वाली दूसरी महिलाएं सुन तो नहीं रहीं। पिछले चार महीनों में लेडीज कोच में कुछ ऐसी बातें सुनी गईं-
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नवंबर का महीना है विश्विद्यालय की दो छात्राओं ने आपस में कुछ यूं बात छेड़ी – ‘मेरी प्रोफेसर की बिल्ली मर गई। वो इतनी दुखी थी कि क्लास की कैंसल कर दी!’ तो दूसरी ओर छात्राओं की एक टोली मेट्रो में अपने पाठ्यक्रम की चर्चा करते हुए चढ़ता है।
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उनमें से एक छात्रा को शायद ये बातें बोर कर रही हैं। वो बीच में उनकी बात काट कर अपने क्लास के लड़कों के बारे में बात छेड़ देती है. उसकी बातें सुनकर नाराज सहेली ने गुस्से में कहा – '‘देख बहन, या तो कॉलेज में पढ़ाई हो सकती है या लड़काबाजी दोनों साथ-साथ नहीं हो सकते’'।

कुछ छात्राएं अपनी क्लास में पढ़ने वाली एक लड़की की चुगली कर रही हैं. एक ने कहा – ‘'बड़ी झूठी लड़की है यार। एक बार उसने हमसे कहा कि उसकी तबीयत ठीक नहीं है। और जैसे ही लंच का टाइम हुआ तो मैंने उसे चावल का एक पूरा डब्बा गटकते हुए देखा।’'

नये साल के दिन हो रही थीं ऐसी बातें

Delhi metro ladies coach talks

कुछ छात्राओं को एक बार अपनी क्लास के लड़कों के बारे में बात करते हुए सुना गया। वे अपनी क्लास के ‘फ्लर्ट टाइप’ लड़कों और ‘शरीफ लड़कों’ के बारे में बहस कर रही थीं। और जैसे ही उनका स्टेशन आया तो सबके बीच सहमति बनी कि आज की क्लास सब एक साथ बंक करेंगीं।

एक जवान कामकाजी महिला अपनी सहेली को आंखें फाड़ते हुए बताती है, ‘'मेरे पापा अपनी सारी कमाई घर के अलग-अलग कोनों में हम सबसे छिपा कर रखते हैं। हाल ही में मुझे उनके बेड के गद्दे के नीचे नोटों की गड्डी मिली। मैंने चुपचाप उस पैसे से किराने वाली दुकान से लेकर मोबाइल रिचार्ज की दुकान के सारे कर्ज उतार दिए! जब उन्होंने हमसे उस पैसे के बारे में पूछा, तो हमने कुछ न मालूम होने का नाटक कर दिया!’'

नए साल की सुबह पूरा कोच नए साल की मुबारकबाद से गूंज रहा था। फोन पर सभी महिलाएं अपने परिवारजनों और दोस्तों को बधाई दे रही थीं। लेकिन एक बधाई भरा डायलॉग सुन कर आप खुद को हंसने से रोक नहीं सकेंगे। ‘नया साल मुबारक हो। भगवान करे तुम्हारे घर के संकट तुम्हारे पड़ोसियों के घर गिर जाएं!’

'कॉलेज जा कर वे हाथ से निकल जाती हैं'

Delhi metro ladies coach talks

नये साल वाले दिन कुछ जवान महिलाएं उन लड़कों के बारे में बात कर रही थी, जिन्हें वो नापसंद करती हैं। एक ने कहा – ‘उसे लगा कि नया साल एक अच्छा मौका है मुझसे बात करने का। क्या उसे समझ नहीं आता कि मैं उसे रत्ती भर भी पसंद नहीं करती?!’

एक बार सुबह-सुबह दो बुजुर्ग महिलाओं को उस लड़की के बारे में बात करते हुए सुना गया, जिसके मां-बाप ने कथित तौर पर उसकी इसलिए हत्या कर दी थी क्योंकि उसने दूसरी जाति के लड़के से शादी की। इस हत्या की खबर उस दिन दिल्ली अखबारों में छाई हुई थी। एक महिला ने दूसरी से कहा – '‘यही होता है जब लड़कियों को बहुत ज्यादा पढ़ाया जाता है। कॉलेज जा कर वे बहुत मॉडर्न हो जाती हैं और अपने मां-बाप के हाथ से निकल जाती हैं। ’'

एक बार उन दो जवान महिलाओं की बात सुनाई दी, जो एक ही मोबाइल से ईयरफोन शेयर कर गाने सुन रही थीं। साथ-साथ अपनी होने वाली भाभी के बारे में भी बात कर रही थी। एक ने दूसरी से कहा – ‘लड़की इतनी बुरी नहीं है। वो जींस भी पहनती है और सलवार-कमीज भी। वो इतनी भी मॉडर्न नहीं है।’

'उस मैनेजर ने मेरी नाक में दम कर रखा है'

Delhi metro ladies coach talks

दो कामकाजी महिलाएं अपने ऑफिस के बारे में गप्पे लड़ाते हुए सफर कर रही थीं। एक ने दूसरी को बताया, '‘उस मैनेजर ने मेरी नाक में दम कर रखा है! मैंने ओवरटाइम रुक कर उसके लैपटॉप पर पूरी प्रेजेंटेशन बनाई और अगले दिन उसने मुझे कहा कि वो गुम हो गई है। भाड़ में जाए वो, मैं वो प्रेजेन्टेशन दोबारा तो नहीं बनाने वाली। हुंह!’'

एक बार मैंने वो नज़ारा देखा जो मैं हमेशा याद रहेगा। अपना स्टेशन आने से पहले एक महिला ने फटाफट से अपनी ड्रेस के ऊपर बुर्का डाल लिया। इन रोचक नज़ारों के अलावा लेडीज कोच में सफर करने का एक फायदा ये भी है कि ये इसके अंदर की महक बहुत खूब होती है।

जो भी बातें सुनी गईं – वो तनाव, वो मजाक, चुटकुले, ताने-बाने और कुछ दर्द भरी दास्तान – ये सभी एक कीमती झरोखा है। वो झरोखा जिसमें से इस शहर में हो रहा सांस्कृतिक बदलाव साफ दिखाई देता है।

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