दिल्ली के एलजी का बड़ा एलान: राजधानी की प्लानिंग अब एनसीआर को साथ लेकर; एजेंसियों में समन्वय पर जोर
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि दिल्ली की समस्याओं का समाधान एनसीआर के व्यापक संदर्भ में शहरी नियोजन से ही संभव है। किफायती आवास के साथ रोजगार, स्कूल और अस्पताल की कनेक्टिविटी भी जरूरी है।
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दिल्ली की आवास, परिवहन, जल निकासी और पर्यावरण संबंधी समस्याओं का समाधान अब केवल राजधानी की प्रशासनिक सीमाओं में रहकर नहीं हो सकता। दिल्ली को व्यापक रूप में एनसीआर का हिस्सा मानकर शहरी नियोजन करना होगा। ये बातें दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने कही है।
एलजी ने कहा है कि इसके लिए दिल्ली और पड़ोसी क्षेत्रों की एजेंसियों के बीच समन्वय के साथ जमीन के इस्तेमाल और परिवहन ढांचे की योजना तैयार करनी होगी। शुक्रवार को वह विश्व पर्यावास दिवस, विश्व नगर दिवस और विश्व नगर नियोजन दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित युवा नगर नियोजकों के सेमिनार में बोल रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहरों की योजना बनाते समय तकनीक के साथ आम लोगों की जरूरतों और सुविधाओं को केंद्र में रखना जरूरी है।
एनसीआर के साथ तालमेल से बनेगी दिल्ली की योजना
उपराज्यपाल ने कहा कि दिल्ली की ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए बढ़ती महानगरीय आबादी की जरूरतों को पूरा करना बड़ी चुनौती है। आवास, परिवहन, पानी और पर्यावरण से जुड़े मुद्दे किसी एक प्रशासनिक सीमा तक सीमित नहीं हैं। ऐसे में दिल्ली को एनसीआर के व्यापक संदर्भ में देखकर योजना बनानी होगी। जमीन के उपयोग और परिवहन सुविधाओं को एक-दूसरे से जोड़ना भी जरूरी है, ताकि शहर का विकास बेतरतीब तरीके से न हो।
घर के साथ रोजगार, स्कूल और अस्पताल की कनेक्टिविटी भी जरूरी
एलजी ने किफायती आवास को शहरी नियोजन का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि केवल मकानों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। घर कहां बने हैं और वहां से रोजगार, सार्वजनिक परिवहन, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच कितनी आसान है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आवासीय योजनाओं में इन सुविधाओं को साथ लेकर चलना होगा, ताकि लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े।
जल निकासी के साथ जल संरक्षण पर भी ध्यान
शहरी जल प्रबंधन के लिए जल निकासी, वर्षा जल संचयन, जलाशयों के संरक्षण और जमीन के जिम्मेदार इस्तेमाल को एक साथ जोड़ने की जरूरत है। एलजी ने कहा कि प्राकृतिक जल निकासी तंत्र को सुरक्षित रखना होगा। नए विकास कार्यों में जलवायु परिवर्तन से पैदा होने वाली चुनौतियों का सामना करने की क्षमता भी विकसित करनी होगी। इससे बारिश के पानी के प्रबंधन और जल संरक्षण दोनों को मजबूती मिलेगी।
महिलाओं और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित हों सड़कें
शहरों में परिवहन का उद्देश्य केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचना नहीं, बल्कि यात्रा को सुरक्षित, सुविधाजनक और आसान बनाना होना चाहिए। एलजी ने कहा कि सड़कों और सार्वजनिक परिवहन की सुविधाओं की योजना बनाते समय महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों की जरूरतों को प्राथमिकता देनी होगी। शहर का ढांचा ऐसा हो, जिसमें हर वर्ग आसानी से आवागमन कर सके।
तकनीक से फैसले बेहतर हों, लेकिन जनता से संवाद जरूरी
युवा नगर नियोजकों को संबोधित करते हुए एलजी ने जीआईएस, रिमोट सेंसिंग, डिजिटल मैपिंग और शहरी आंकड़ों के इस्तेमाल को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों से तथ्यों के आधार पर बेहतर फैसले लिए जा सकते हैं, लेकिन तकनीक के साथ पेशेवर समझ और स्थानीय परिस्थितियों का ज्ञान भी जरूरी है। नियोजकों को शहरों में रहने और काम करने वाले लोगों से सीधे संवाद करना चाहिए।
लोगों का हित सबसे महत्वपूर्ण
उन्होंने कहा कि जमीन, आवास और बुनियादी ढांचे से जुड़े फैसले आने वाली पीढ़ियों के जीवन को प्रभावित करते हैं। इसलिए इनमें तथ्यों, निष्पक्षता, पारदर्शिता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। कार्यक्रम में नेशनल इकोनॉमिक फोरम के कार्यकारी निदेशक जगदीप राणा, स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के अध्यक्ष प्रो. हबीब खान और इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स इंडिया के अध्यक्ष प्रदीप कपूर समेत कई विशेषज्ञ और नगर नियोजक मौजूद रहे।