अंकित गुर्जर मौत मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंपी जांच, परिजनों का है आरोप- तिहाड़ में हुई हत्या
इस मामले की अगली सुनवाई 28 अक्तूबर होगी इससे पहले अदालत ने सीबीआई से मामले में स्टेटस रिपोर्ट फाइल करने के लिए भी कहा है।
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दिल्ली के तिहाड़ जेल में गैंगस्टर अंकित गुर्जर के कथित हत्याकांड मामले की जांच हाईकोर्ट ने केंद्रीय अंवेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी है। जस्टिस मुक्ता गुप्ता ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिए हैं कि वो केस से संबंधित सभी फाइल सीबीआई को सौंप दे। इसके साथ ही अदालत ने सीबीआई से अगली सुनवाई यानी 28 अक्तूबर से पहले मामले में स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी है।
जस्टिस मुक्ता ने कहा कि उन्होंने उचित उपचार प्रदान करने और पुलिस जांच को सुविधाजनक बनाने में ढिलाई के संबंध में जेल महानिदेशक को निर्देश पारित किए हैं।
विभागीय जांच में जेल कर्मियों की लापरवाही आ चुकी है सामने
तिहाड़ जेल में अंकित गुर्जर की हत्या के बाद हुए विभागीय जांच में कुछ जेल कर्मियों की लापरवाही सामने आई है। हत्या के बाद डीआईजी जेल मामले की जांच कर रहे थे। डीआईजी जेल ने मामले की जांच की विस्तृत रिपोर्ट सोमवार को जेल महानिदेशक को सौंपी।
जेल महानिदेशक संदीप गोयल ने कहा कि जिन कर्मियों की लापरवाही सामने आई है, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। गुर्जर चार अगस्त को अपने सेल में अचेत अवस्था में मिला था जबकि उसके दो साथी घायल अवस्था में पाए गए थे।
अधिवक्ता महमूद प्राचा और शारिक निसार के माध्यम से परिवार की ओर से एक याचिका में आरोप लगाया कि गुर्जर को जेल अधिकारियों की ओर से परेशान किया जा रहा था। क्योंकि जेल कर्मियों के नियमित रूप से पैसे की बढ़ती मांग को पूरा करने में वह असमर्थ था। इसलिए साजिश के तहत उसकी हत्या कर दी गई। दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी इसे हिरासत में हुई हिंसा माना था।
शुरूआती जांच में पाया गया कि गुर्जर ने उपाधीक्षक को थप्पड़ मार दिया था। जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने उसकी पिटाई कर दी थी। जेल अधिकारियों ने बताया कि अंकित के सेल ने मोबाइल फोन मिला था। जिसकी वजह से उसे दूसरे सेल में शिफ्ट किया जा रहा था। इस दौरान वह उग्र हो गया। जेल कर्मियों ने उसे अलग सेल में भेज दिया। जहां अगले दिन उसका शव मिला। इस मामले में जेल उपाधीक्षक समेत चार जेल कर्मियों को निलंबित कर दिया गया और आठ को जेल संख्या तीन से दूसरे जेल में भेज दिया गया।
जेल की दीवारें कितनी भी ऊंची हों, नींव कानून के शासन पर आधारित: हाईकोर्ट
जेल की दीवारें कितनी भी ऊंची हों, उसकी नींव भारत के संविधान में निहित कैदियों के अधिकारों को सुनिश्चित करने वाले कानून के शासन पर रखी जाती है। यह तिहाड़ जेल में हिरासत में हुई हिंसा में जान गंवाने वाले अंकित गुर्जर के संविधानिक अधिकारों का हनन है। हाईकोर्ट ने उक्त टिप्पणी करते हुए जेल में कैदियों से उगाही व कैदियों से मारपीट के मामले की जांच के लिए सीबीआई जांच के निर्णय को उचित ठहराते हुए की।
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने जेल में तैनात डॉक्टरों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह अकल्पनीय है कि जब आधी रात को जेल के डॉक्टर ड्यूटी पर आए, तो उन्होंने अंकित पर कई चोटें नहीं देखीं। अदालत ने कहा जब अंकित घायल हो गया और जीवित था, यदि उसे उचित उपचार प्रदान किया जाता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।
अदालत ने कहा न केवल इस बात की जांच जरूरी है कि अंकित को बेरहमी से पीटने का अपराध किसने किया, जिसके परिणामस्वरूप उसकी मृत्यु हो गई। बल्कि सही समय पर उचित उपचार उपलब्ध नहीं कराने में जेल डॉक्टरों की भूमिका की भी उचित जांच की जरूरत है।