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हाईकोर्ट ने कहा, कोरोना के डर से स्वास्थ्य कर्मियों को उनके घरों से नहीं निकाला जा सकता
Sun, 24 May 2020 06:57 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 24 May 2020 06:57 AM IST
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delhi high court
दिल्ली हाईकोर्ट ने कोरोना मरीजों के उपचार में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों के पड़ोसियों की ओर से संक्रमण फैलने के खतरे को देखते हुए दायर याचिका पर दिल्ली सरकार को लोगों को ख्याल रखने के निर्देश दिए हैं।
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याचिका एक बुजुर्ग की ओर से दायर की गई है, जिस पर कोर्ट ने दिल्ली सरकार को इलाके में सेनेटाइजेशन पर पूरी तरह ध्यान देने के लिए कहा है। न्यायमूर्ति आशा मेनन की एकल पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह अधिकार किसी को नहीं है कि कोरोना संक्रमण के अप्रत्याशित भय के कारण स्वास्थ्य कर्मियों को उनके घर से ही निकाल दिया जाए।
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पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार अपने कर्तव्यों से दूर नहीं भाग सकती और यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह स्वास्थ्य कर्मियों के पड़ोस में रह रहे लोगों को शांतिपूर्ण और भयमुक्त वातावरण मुहैया कराए। अदालत ने कहा कि दिल्ली सरकार सभी इलाकों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दे।
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पीठ ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को लॉकडाउन के दौरान उसके घरों में रहने के निर्देश हैं, ऐसी स्थिति में अगर किसी को सुरक्षित महसूस नहीं होता तो उनकी परेशानी का समाधान दिल्ली सरकार करे। इसके लिए इलाके में सेनिटाइजेश किया जाए और लोगों को भरोसा दिलाया जाए कि वे सुरक्षित हैं। यह जनहित याचिका करिअप्पा मार्ग निवासी वरिष्ठ नागरिक की ओर से दायर की गई है।
उम्रकैद की सजा काट रहे दोषी को जीवनसाथी तलाशने के लिए पैरोल
दिल्ली हाईकोर्ट ने हत्या के एक दोषी को जीवनसाथी खोजने के लिए चार सप्ताह की पैरोल दी है। हत्या के मामले में दोषी 2005 से उम्रकैद की सजा काट रहा है। न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से अभियुक्त की याचिका पर संज्ञान लिया और 25 हजार रुपये निजी मुचलके पर चार सप्ताह के लिए पैरोल प्रदान की।
इस बीच कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता (दोषी) का समाज में पारिवारिक संबंध हैं और उसने उन संबंधों को बनाए रखने के लिए पैरोल की मांग की है। अदालत ने कहा कि ऐसा नहीं लगता है कि याचिकाकर्ता की रिहाई से उसके परिवार के सदस्यों को नुकसान होगा।
अदालत ने जेल अधिकारियों को निर्देश दिया कि दोषी को रिहा किए जाने के समय और वापस जेल में आत्मसमर्पण के समय तक लोक स्वास्थ्य संबंधी सभी सावधानी बरती जाए। इसके साथ ही न्यायमूर्ति ने याचिकाकर्ता को पंजाबी बाग और सिविल लाइंस थानों के प्रभारियों को अपने मोबाइल फोन नंबर के बारे में सूचित करने का निर्देश दिया है।