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Delhi: लाल किले पर कब्जा करना चाहती हैं बहादुर शाह जफर-द्वितीय के परपोते की विधवा, कोर्ट ने खारिज की याचिका

Fri, 13 Dec 2024 03:56 PM IST
श्याम जी. पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: श्याम जी. Updated Fri, 13 Dec 2024 03:56 PM IST
सार

मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर-द्वितीय के परपोते की विधवा सुल्ताना बेगम ने कानूनी उत्तराधिकारी होने के नाते लाल किले पर कब्जा करने की मांग की थी। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

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Delhi High court rejected petition of widowed wife of great grandson of Bahadur Shah Zafar-II Red Fort
लाल किला

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर-द्वितीय के परपोते की विधवा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कानूनी उत्तराधिकारी होने के नाते लाल किले पर कब्जा करने की मांग की थी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विभू बाखरू और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने एचसी एकल न्यायाधीश के दिसंबर 2021 के फैसले के खिलाफ सुल्ताना बेगम की अपील को खारिज कर दिया। कोर्ट का कहना है कि यह चुनौती ढाई साल से अधिक की देरी के बाद दायर की गई थी।

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बेगम ने कहा कि वह अपनी खराब स्वास्थ्य स्थिति और अपनी बेटी के निधन के कारण अपील दायर नहीं कर सकीं। उन्होंने कहा, "हम उक्त स्पष्टीकरण को अपर्याप्त पाते हैं, यह देखते हुए कि देरी ढाई साल से अधिक की है। याचिका को भी कई दशकों तक अत्यधिक विलंबित होने के कारण (एकल न्यायाधीश द्वारा) खारिज कर दिया गया था। देरी की माफी के लिए आवेदन नतीजतन, अपील भी खारिज कर दी जाती है, यह परिसीमा से वर्जित है।"
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20 दिसंबर, 2021 को एकल न्यायाधीश ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा अवैध रूप से लिए गए लाल किले पर कब्जा करने की मांग करने वाली बेगम की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि 150 से अधिक वर्षों के बाद अदालत का दरवाजा खटखटाने में अत्यधिक देरी का कोई औचित्य नहीं था। वकील विवेक मोरे के माध्यम से दायर याचिका में दावा किया गया है कि 1857 में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद अंग्रेजों ने परिवार को उनकी संपत्ति से वंचित कर दिया था, जिसके बाद सम्राट को देश से निर्वासित कर दिया गया था और लाल किले का कब्जा जबरदस्ती छीन लिया गया था। 
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इसमें दावा किया गया कि बेगम लाल किले की मालिक थीं, क्योंकि उन्हें यह विरासत उनके पूर्वज बहादुर शाह जफर-द्वितीय से मिली थी, जिनकी 11 नवंबर 1862 को 82 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई थी और भारत सरकार संपत्ति पर अवैध कब्जा कर रही थी। याचिका में केंद्र को लाल किला याचिकाकर्ता को सौंपने या सरकार द्वारा कथित अवैध कब्जे के लिए 1857 से आज तक के मुआवजे के अलावा पर्याप्त मुआवजा देने का निर्देश देने की मांग की गई है।

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