शाहीन बाग से नहीं हटेंगे प्रदर्शनकारी, बैरिकेडिंग हटाने की याचिका खारिज, भड़के कपिल मिश्रा
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दिल्ली के शाहीन बाग में बीते करीब एक महीने से नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोग अपना धरना आगे भी जारी रखेंगे। दरअसल दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को शाहीन बाग से बैरिकेडिंग हटाने की इजाजत मांगने वाली एक याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए खारिज कर दी है।
भाजपा नेता कपिल मिश्रा दिल्ली पुलिस को लीगल नोटिस देने वाले हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि अगर दिल्ली पुलिस ने शाहीन बाग से बैरिकेडिंग नहीं हटाई तो वह अदालत का रुख करेंगे। कपिल ने लिखा है कि शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों ने कब्जा कर रखा है। एक महीने से दिल्ली, यूपी बॉर्डर, कालिंदी कुंज, साउथ दिल्ली की सड़कें बंद हैं। यहां तक कि अस्पताल, दफ्तर, स्कूल जाने वाले लोग परेशान हैं। फिर भी प्रदर्शनकारी हटने को तैयार नहीं है।
Delhi HC junks plea seeking barricades removal, relocation of protesters in Shaheen Bagh
Read @ANI Story l https://t.co/HrIcjOicy6 pic.twitter.com/sx2HnAnjHpविज्ञापन विज्ञापन— ANI Digital (@ani_digital) January 10, 2020
Dear @LtGovDelhi & @CPDelhi
— Kapil Mishra (@KapilMishra_IND) January 10, 2020
शाहीन बाग में मुस्लिम प्रदर्शनकारियों ने कब्जा कर रखा हैं
एक महीने से दिल्ली यूपी बॉर्डर, कालिंदी कुंज, साउथ दिल्ली की सड़कें बन्द है
अस्पताल, दफ्तर, स्कूल जाने वाले लोग परेशान है
दो दिन में ये सारी सड़कें नहीं खुली तो हमें कोर्ट जाना पड़ेगा
याचिकाकर्ता ने क्या की थी अपील
दिल्ली हाईकोर्ट में डाली गई इस याचिका में कहा गया था कि बीते 15 दिसंबर से शाहीन बाग इलाके में बैरिकेडिंग की गई है, जिसके कारण ट्रैफिक की परेशानी आ रही है। इसलिए मांग की गई थी कि प्रदर्शनकारियों को किसी अन्य स्थल पर शिफ्ट कर शाहीन बाग से बैरिकेडिंग हटा दी जाए।
बता दें कि शाहीन बाग में महिलाएं, बच्चे व हर उम्र के लोग बीते एक महीने से नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। यही वजह है कि रास्ते में बैरिकेड लगाए गए हैं ताकि इनके प्रदर्शन पर नियंत्रण रखा जा सके।
हाथ से लिखे पत्र के रूप में दिए गए आवेदन का उल्लेख मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ के समक्ष किया गया जिसने इस पर विचार करने से इनकार कर दिया।
तुषार सहदेव और रमन कालरा की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया कि दिल्ली से उत्तर प्रदेश, दिल्ली से उत्तराखंड, दिल्ली से नोएडा अस्पतालों, आश्रम और बदरपुर तक के मार्ग इस प्रदर्शन के कारण उपयोग में नहीं हैं क्योंकि शाहीन बाग के आस-पास की सड़कें अवरुद्ध हैं और वाहनों का मार्ग परिवर्तित कर डीएनडी फ्लाईओवर की तरफ कर दिया गया है।
पत्र में कहा गया कि लाखों लोग सड़कें अवरुद्ध होने के कारण परेशान हैं और यह आपात स्थिति में फंसे लोगों के लिए भी एक समस्या है। आवेदन में कहा गया कि 14 दिसंबर, 2019 से शुरू हुआ प्रदर्शन कई लाख वाहनों को प्रभावित कर रहा है जिन्हें इस मार्ग से नहीं गुजरने दिया जा रहा है।
इसमें दावा किया गया कि प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर अवरोधक और सड़कों के किनारे भारी पत्थर लगा दिए हैं और पैदल यात्रियों को भी यहां से गुजरने नहीं दिया जा रहा है।याचिका में कहा गया कि प्रदर्शनकारियों ने सड़क डिवाइडरों और सड़कों पर मौजूद अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को क्षतिग्रस्त किया जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा है।
इसमें यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया कि इन प्रदर्शनों को अधिकृत प्रदर्शन इलाकों में करने के लिए कहा जाए और वह भी बिना संपत्ति को नुकसान पहुंचाए। अदालत से अपील की गई थी कि वह लोगों के लिए मार्गों के इस्तेमाल को सुगम बनाने के लिए अवरोधकों को हटाने का निर्देश दे।
सीएए और एनआरसी के विरोध में महिलाओं एवं बच्चों समेत हजारों लोग शाहीन बाग और पास के जामिया मिल्लिया इस्लामिया में प्रदर्शन कर रहे हैं।