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Delhi NCR News: 29 हफ्ते की गर्भवती नाबालिग को दिल्ली हाईकोर्ट से गर्भपात की अनुमति
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मेडिकल बोर्ड ने बताया फिट, इलाज का पूरा खर्च उठाएगी दिल्ली सरकार
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ किया है कि गर्भावस्था के 24 हफ्ते पूरे होने के बाद भी हर मामले में गर्भपात का रास्ता बंद नहीं हो जाता। अदालत ने 29 हफ्ते की गर्भवती दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग को गर्भपान की अनुमति दे दी। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में पीड़िता की शारीरिक और मानसिक स्थिति, उसकी इच्छा और मेडिकल रिपोर्ट को ध्यान में रखकर फैसला करना जरूरी है। न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने यह फैसला सुनाया। करीब 17 वर्षीय नाबालिग ने गर्भावस्था समाप्त करने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी। उसकी दादी भी गर्भावस्था जारी रखने के पक्ष में नहीं थीं। याचिका के अनुसार, नाबालिग दुष्कर्म के कारण गर्भवती हुई थी और इस मामले में ख्याला थाने में एफआईआर दर्ज है। अदालत ने दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर गौर किया। बोर्ड ने नाबालिग को गर्भसमापन की प्रक्रिया के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से फिट बताया था। रिपोर्ट और नाबालिग की परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने गर्भसमापन की अनुमति दे दी। कोर्ट ने कहा कि 24 हफ्ते की समय-सीमा पार होने के बावजूद विशेष परिस्थितियों में गर्भसमापन की अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, हर मामले में फैसला तथ्यों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर होगा।
इलाज का पूरा खर्च उठाएगी सरकार : हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि अनुभवी डॉक्टरों की टीम कानून के अनुसार प्रक्रिया पूरी करे। इलाज, अस्पताल में रहने और बाद की देखभाल का पूरा खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी। अदालत ने डीएनए जांच के लिए भ्रूण के ऊतक सुरक्षित रखने और नाबालिग की पहचान गोपनीय रखने का भी निर्देश दिया। यदि प्रक्रिया के दौरान बच्चा जीवित पैदा होता है, तो उसे जरूरी चिकित्सा सहायता दी जाएगी और बाल कल्याण समिति को सूचना दी जाएगी। अदालत ने नाबालिग की पहचान उजागर करने पर भी रोक लगाई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ किया है कि गर्भावस्था के 24 हफ्ते पूरे होने के बाद भी हर मामले में गर्भपात का रास्ता बंद नहीं हो जाता। अदालत ने 29 हफ्ते की गर्भवती दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग को गर्भपान की अनुमति दे दी। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में पीड़िता की शारीरिक और मानसिक स्थिति, उसकी इच्छा और मेडिकल रिपोर्ट को ध्यान में रखकर फैसला करना जरूरी है। न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने यह फैसला सुनाया। करीब 17 वर्षीय नाबालिग ने गर्भावस्था समाप्त करने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी। उसकी दादी भी गर्भावस्था जारी रखने के पक्ष में नहीं थीं। याचिका के अनुसार, नाबालिग दुष्कर्म के कारण गर्भवती हुई थी और इस मामले में ख्याला थाने में एफआईआर दर्ज है। अदालत ने दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर गौर किया। बोर्ड ने नाबालिग को गर्भसमापन की प्रक्रिया के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से फिट बताया था। रिपोर्ट और नाबालिग की परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने गर्भसमापन की अनुमति दे दी। कोर्ट ने कहा कि 24 हफ्ते की समय-सीमा पार होने के बावजूद विशेष परिस्थितियों में गर्भसमापन की अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, हर मामले में फैसला तथ्यों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर होगा।
इलाज का पूरा खर्च उठाएगी सरकार : हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि अनुभवी डॉक्टरों की टीम कानून के अनुसार प्रक्रिया पूरी करे। इलाज, अस्पताल में रहने और बाद की देखभाल का पूरा खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी। अदालत ने डीएनए जांच के लिए भ्रूण के ऊतक सुरक्षित रखने और नाबालिग की पहचान गोपनीय रखने का भी निर्देश दिया। यदि प्रक्रिया के दौरान बच्चा जीवित पैदा होता है, तो उसे जरूरी चिकित्सा सहायता दी जाएगी और बाल कल्याण समिति को सूचना दी जाएगी। अदालत ने नाबालिग की पहचान उजागर करने पर भी रोक लगाई।
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