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Delhi NCR News: सज्जन कुमार को बरी करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देगी दिल्ली गुरुद्वारा समिति
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1984 को तीन सिखों की हत्या के इस में पांच गवाहों ने अदालत में बयान दर्ज कराए थे
गवाहों ने आरोप लगाया था कि भीड़ का नेतृत्व तत्कालीन कांग्रेस नेता सज्जन कुमार कर रहे थे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों के एक मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व सांसद सज्जन कुमार को बरी करने के फैसले के खिलाफ दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (डीएसजीएमसी) दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करेगी। जानकारी समिति के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह काहलों ने दी। अदालत के फैसले के बाद मीडिया से बातचीत में कालका और काहलों ने बताया कि एक व दो नवंबर 1984 को तीन सिखों की हत्या के इस में पांच गवाहों ने अदालत में बयान दर्ज कराए थे। गवाहों ने आरोप लगाया था कि हत्या करने वाली भीड़ का नेतृत्व तत्कालीन कांग्रेस नेता सज्जन कुमार कर रहे थे। इसके बावजूद अदालत ने उन्हें बरी कर दिया और इस फैसले से सिख समुदाय को गहरा आघात पहुंचा है।
उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले की प्रमाणित प्रति प्राप्त कर उसका गहन अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद दिल्ली गुरुद्वारा समिति की कानूनी टीम इस निर्णय को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती देगी। उन्होंने भरोसा जताया कि हाई कोर्ट में गवाहों की गवाही दोबारा पेश कर इस मामले में भी दोषियों को सजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा। कालका और काहलों ने बताया कि इस मामले के मुख्य शिकायतकर्ता और प्रत्यक्षदर्शी हरविंदर सिंह कोहली का निधन हो चुका है, जिसके कारण वह अपनी गवाही दर्ज नहीं करा सके। उन्होंने कहा कि कोहली के सामने ही उनके साथी अवतार सिंह और सोहन सिंह की हत्या भीड़ ने की थी, जिससे उनकी गवाही इस केस के लिए बेहद अहम थी।
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गवाहों ने आरोप लगाया था कि भीड़ का नेतृत्व तत्कालीन कांग्रेस नेता सज्जन कुमार कर रहे थे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों के एक मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व सांसद सज्जन कुमार को बरी करने के फैसले के खिलाफ दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (डीएसजीएमसी) दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करेगी। जानकारी समिति के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह काहलों ने दी। अदालत के फैसले के बाद मीडिया से बातचीत में कालका और काहलों ने बताया कि एक व दो नवंबर 1984 को तीन सिखों की हत्या के इस में पांच गवाहों ने अदालत में बयान दर्ज कराए थे। गवाहों ने आरोप लगाया था कि हत्या करने वाली भीड़ का नेतृत्व तत्कालीन कांग्रेस नेता सज्जन कुमार कर रहे थे। इसके बावजूद अदालत ने उन्हें बरी कर दिया और इस फैसले से सिख समुदाय को गहरा आघात पहुंचा है।
उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले की प्रमाणित प्रति प्राप्त कर उसका गहन अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद दिल्ली गुरुद्वारा समिति की कानूनी टीम इस निर्णय को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती देगी। उन्होंने भरोसा जताया कि हाई कोर्ट में गवाहों की गवाही दोबारा पेश कर इस मामले में भी दोषियों को सजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा। कालका और काहलों ने बताया कि इस मामले के मुख्य शिकायतकर्ता और प्रत्यक्षदर्शी हरविंदर सिंह कोहली का निधन हो चुका है, जिसके कारण वह अपनी गवाही दर्ज नहीं करा सके। उन्होंने कहा कि कोहली के सामने ही उनके साथी अवतार सिंह और सोहन सिंह की हत्या भीड़ ने की थी, जिससे उनकी गवाही इस केस के लिए बेहद अहम थी।
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