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बरखा शुक्ला को दिल्ली सरकार का नोटिस

Sat, 16 May 2015 06:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 16 May 2015 06:02 PM IST
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Delhi govt notice to Barkha Shukla, 3 days for reply.

कांग्रेस की पूर्व विधायक और महिला आयोग की अध्यक्ष बरखा खुक्ला सिंह को दिल्ली सरकार ने कुमार विश्वास मामले पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

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आयोग की पूर्व सदस्य जूही खान और सुरेश कृष्णमूर्ति की शिकायत के आधार पर सरकार ने बरखा शुक्ला सिंह को ये नोटिस दिया गया है। वहीं, आयोग का कहना है कि पीड़ित महिला की शिकायत के आधार पर जांच के बाद समन भेजा था।
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नोटिस में लिखा है कि जूही और सुरेश की शिकायत के आधार पर पता लगा है कि महिलाओं की सुरक्षा, उनके उत्थान व अधिकारों के तहत आयोग का गठन हुआ था, उसका पालन नहीं किया जा रहा है।
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कुमार विश्वास के मामले में जो घटनाक्रम सार्वजनिक हुआ है, उससे साफ होता है कि आयोग अपने कामकाज को बेहतर ढंग से नहीं कर रहा है। इस मामले में नियमों का उल्लंघन करते हुए शिकायतकर्ता समेत दूसरे पक्ष का नाम सार्वजनिक कर दिया गया।

जवाब देने के लिए तीन दिन का समय

Delhi govt notice to Barkha Shukla, 3 days for reply.

नोटिस में तीन दिन के दौरान आरोपों पर महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रधान सचिव के पास जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है। निर्धारित तीन दिन में जवाब दाखिल नहीं करने पर कानून के हिसाब से आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने का हवाला दिया गया है।

बरखा शुक्ला सिंह का कार्यकाल 17 जुलाई, 2015 तक है। उल्लेखनीय है कि बरखा शुक्ला सिंह ने गत दिनों कुमार विश्वास के खिलाफ सफदरजंग थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। जिसमें सोशल मीडिया पर धमकी देने और अश्लील कमेंट करने का आरोप लगाया है। इसकी प्रति गृह मंत्रालय, उपराज्यपाल और दिल्ली पुलिस को भी भेजी है।

इतना ही नहीं जल्द कार्रवाई की मांग भी की है। कुमार विश्वास के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और खुद केलिए पुलिस सुरक्षा की मांग भी बरखा शुक्ला सिंह ने पुलिस से की है।

कारण बताओ नोटिस में क्या है?

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दिल्ली महिला आयोग अधिनियम, 1994 की धारा 4 (3) में दिए गए कारण बताओ नोटिस में महिला अधिकारों की हानि, महिला सुरक्षा के उपाय लागू नहीं करने, महिला कल्याण समेत अन्य मुद्दे पर नीति और फैसले लागू न करना समेत कुछ अन्य अधिकार क्षेत्र गिनवाकर कहा है कि कुमार विश्वास का नोटिस इसमें नहीं आता।

फिर शिकायतकर्ता महिला यूपी की थी और घटना भी यूपी की थी तो नोटिस क्यों भेजा गया। इन सबके बीच कुमार विश्वास के मामले में तत्कालिकता दिखाने के अलावा प्रेस कांफ्रेंस बुलाई जो आयोग के नियमों में नहीं आता। आयोग की सदस्य को आम आदमी पार्टी का सदस्य बताया जबकि इसका कोई सबूत नहीं था।

मामले को सुलझाने केलिए मध्यथता नहीं ली गई। कुमार विश्वास केलिए नुकसानदेह तरीका आम आदमी पार्टी का होने के कारण पक्षपातपूर्ण रवैये में किया। फिर शिकायतकर्ता के साथ संयुक्त प्रेस कॉंफ्रेंस क्यों? यह सब देखते हुए प्रथम दृष्टया आयोग चेयरपर्सन की पोजिशन का दुरुपयोग पाया गया है। इसलिए क्यों न चेयरपर्सन केपद से हटाया जाए?

बरखा के बचाव में उतरी भाजपा और कांग्रेस

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दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय दिल्ली महिला आयोग की चेयरपर्सन बरखा सिंह के समर्थन में मैदान में उतर आए हैं। उन्होंने बरखा को कारण बताओ नोटिस देने पर दिल्ली सरकार की कड़ी भर्त्सना की है।

उन्होंने कहा कि बरखा सिंह को दिया नोटिस भी उतना ही अव्यवहारिक और गैर कानूनी है जितना जनता की आवाज को कुचलने के लिए जारी किया परिपत्र था। न्यायालय में इस नोटिस का भी वहीं हाल होगा जो मीडिया विरोधी परिपत्र का हुआ।

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सबसे करीबी कुमार विश्वास को दिल्ली महिला आयोग सेे नोटिस मिलना नागवार गुजरा है। नोटिस में सरकार ने ऐसा दर्शाने की कोशिश की है।

दिल्ली सरकार ने बदले की भावना से नोटिस जारी किया है। इस कारण बताओ नोटिस के बाद अब यह स्पष्ट है कि अरविंद केजरीवाल और कुमार विश्वास सहित उनके सहयोगियों को संवैधानिक निकायों, महिलाओं या महिला अधिकारों के प्रति कोई सम्मान नहीं है।

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