पुलिसकर्मियों से ज्यादा कामकाज कराने के मुद्दे पर दिल्ली सरकार तलब
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस कर्मचारियों के कामकाज के लिए घंटे तय करने व वेतनमान को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली सरकार व पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति गीता मित्तल व न्यायमूर्ति ईएस मेहता की खंडपीठ ने दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का निर्देश देते हुए सुनवाई 10 अगस्त तय की है।
दरअसल, दायर याचिका में केंद्र सरकार को पक्ष बनाया गया था लेकिन केंद्र सरकार ने तर्क रखा कि यह मुद्दा पुलिस व दिल्ली सरकार का है। ऐसे में अदालत ने दिल्ली सरकार व पुलिस आयुक्त को पक्ष बनाते हुए यह नोटिस जारी किया है।
दरअसल, हाईकोर्ट में यह याचिका पुलिस के दो कांस्टेबल ने वर्ष 2015 में दायर की थी। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली में 90 प्रतिशत पुलिसकर्मी निर्धारित 8 घंटे की बजाय 12 से 14 घंटे तक काम करते हैं जो कि अमानवीय है और संविधान के अनुच्छेद 21 के जीने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। इसके अलावा उन्हें आकस्मिक रूप से काम पर बुलवाया जाता है। जिसके तहत 24 से 36 घंटे काम करवाया जाता है।
अदालत ने पूछा क्या दो एक्ट गैरकानूनी है?
याचिका में पुलिस एक्ट 1861 की धारा 22 और 1978 के दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 24 को रद्द करने कि मांग की गई है। याचिकाकर्ता के मुताबिक इन्ही धाराओं के तहत पुलिस वालों को 24 घंटे तक ड्यूटी करने के लिए बाध्य किया जा सकता है।
साथ ही पुलिसकर्मियों को कई बार 36 घंटे भी काम कराया जा सकता है।अब अदालत को तय करना है कि क्या दिल्ली पुलिस के लिए बनाए गए दो एक्ट गैरकानूनी हैं, क्या दिल्ली पुलिस के जवानों को घंटों यहां तक कि 24 घंटे तक काम करने के लिए बने नियम को हटा दिया जाएगा।
दूसरी तरफ याचिका पर सुनवाई के ध्यानार्थ दिल्ली पुलिस आयुक्त ने इस बाबत एक कमिटी का गठन कर दिया है। इस कमेटी में स्पेशल सीपी अमूल पटनायक की अध्यक्षता वाली कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी में स्पेशल सीपी पी.कामराज, ताजहसन, आरएस कृष्णया और डीसीपी आर.ए.संजीव और शिबेश सिंह को शामिल किया गया है। कमेटी याचिका में उठाए गए मुद्दो पर विचार कर अपनी रिपोर्ट देगी।