दिल्ली का चुनाव खत्म, अब अस्पतालों में वोट मांगना शुरू
- आठ मार्च को दिल्ली मेडिकल काउंसिल का चुनाव
- पहली बार युवा डॉक्टर चुनावी मैदान में
- युवा डॉक्टर चाहते हैं सिस्टम में बदलाव
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भले ही दिल्ली का विधानसभा चुनाव खत्म होने के साथ साथ अरविंद केजरीवाल की लगातार तीसरी बार ताजपोशी होने वाली हो लेकिन सियासी गलियारों से होते हुए चुनाव की ललकार अब अस्पतालों तक पहुंच गई है। देश में ऐसा पहली बार है जब युवा डॉक्टर मेडिकल काउंसिल के चुनावी मैदान में हैं। आगामी आठ मार्च को दिल्ली मेडिकल काउंसिल का चुनाव होने वाला है जिसके लिए एम्स से लेकर दिल्ली के तमाम छोटे-बड़े सरकारी अस्पताल एकजुट हो चुके हैं। इन अस्पतालों में तैनात रेजीडेंट डॉक्टर युवाओं के लिए हर दिन वोट मांग रहे हैं।
युवा डॉक्टरों ने अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं लेकिन इनके विरोध में अब तक नाम सामने नहीं आए हैं। बताया जा रहा है कि युवा डॉक्टरों को चुनाव से दूर रखने के लिए तमाम वरिष्ठ डॉक्टर समझाने में जुटे हैं। रेजीडेंट डॉक्टरों के सभी संगठन भी इस बार युवाओं को जिताने के लिए एक हो चुके हैं। फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन, यूआरडीए, दिल्ली एम्स आरडीए इत्यादि संगठन अपने प्रत्याशियों के लिए एक हो चुके हैं। साथ ही इन्होंने एक नया संगठन यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट तैयार कर लिया है। डॉ. अंकित ओम, डॉ. आशीष बंसल और डॉ. जितेंद्र सिंह ने संगठन की नींव रखी है।
अभी तक दिल्ली मेडिकल काउंसिल (डीएमसी) के चुनाव में रेजीडेंट या युवा डॉक्टर दूरी बनाए रखते थे। चिकित्सीय क्षेत्र में इस चुनाव को आमतौर पर सियासत से ही जोड़कर देखा जाता था। शायद इसीलिए ज्यादात्तर डॉक्टर इससे दूरी बनाने में विश्वास रखते थे, लेकिन इस बार दिल्ली के हर सरकारी और गैर सरकारी डॉक्टरों से वोट जरूर करने की अपील की जा रही है।
दिल्ली में एलोपैथी डॉक्टरों को प्रैक्टिस करने की मंजूरी देने वाली डीएमसी पर चिकित्सीय व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी होती है। अस्पतालों में अगर मरीज को किसी भी प्रकार का इंसाफ नहीं मिलता है तो डीएमसी इस पर संज्ञान लेती है। इतना ही नहीं राजधानी में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ काउंसिल जवाबदेह है। अब युवा डॉक्टरों का कहना है कि वे सिस्टम में बदलाव चाहते हैं। इसके लिए उन्हें चुनावी मैदान पर आना पड़ा है।
युवा डॉक्टरों की ओर से ये उतरे मैदान में
युवा डॉक्टरों की ओर से काउंसिल के चुनाव में दिल्ली एम्स के डॉ. राजीव रंजन, डीडीयू से डॉ. असगर अली, आईसीएमआर से डॉ. मनीष चंद्र प्रभाकर, आरएमएल से डॉ. राहुल चौधरी व डॉ. निर्मल्या महापात्रा, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज से डॉ. साहिल सिंगला, जामिया हमदर्द से डॉ. संजीव कुमार चौधरी और सफदरजंग अस्पताल से डॉ. दीपांकर चौधरी मैदान में उतरे हैं।
कौन कर सकता है वोट
दिल्ली में प्रैक्टिस करने वाले एलोपैथी डॉक्टर डीएमसी से पंजीकृत होते हैं। ये सभी डॉक्टर डीएमसी चुनाव के लिए वोट करते हैं। चुनाव में 8 पदों के लिए सदस्य खड़े होते हैं। एक डॉक्टर सभी आठों को वोट देता है। दिल्ली में करीब 64 हजार से ज्यादा डीएमसी मतदाता हैं।
यहां भी ईमानदारी है सबसे बड़ा मुद्दा
डॉ. अंकित ओम के अनुसार डीएमसी के चुनाव में अब युवा डॉक्टरों के उतरने की कई वजह हैं। देश में लंबे समय से चंद डॉक्टर ही पूरे सिस्टम को हाईजैक करने में जुटे हैं। एक परिपाटी भी चली आ रही है। जबकि असल मुद्दों पर ये लोग काम नहीं करते और नेताओं के आगे-पीछे रहकर अपने सिद्घांतों से समझौता कर लेते हैं। इसीलिए अब युवाओं ने सिस्टम बदलने के लिए चुनाव लडऩे की तैयारी की है। उन्होंने दावा किया है कि इस बार जीत उन्हीं की होगी।