मोदी की तरह ही केजरीवाल ने बदला चुनावी गणित
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश की राजधानी दिल्ली में बेशक विधानसभा का चुनाव हो रहा हो लेकिन सियासी दलों का नेताओं पर हमले का अंदाज लोकसभा चुनाव सरीखा ही है।
चुनाव प्रचार के अपने चरम पर पहुंचने के साथ ही सियासी दलों के हमले एक चेहरे पर केंद्रित हो गए हैं लेकिन लोकसभा और दिल्ली विधानसभा चुनाव में चेहरे अलग-अलग हो गए हैं।
लोकसभा चुनाव जहां मोदी बनाम अन्य था तो दिल्ली का दंगल केजरीवाल बनाम अन्य का बन गया है। प्रधानमंत्री ने जिस तरह बिना नाम लिए शाहदरा की रैली में आम आदमी पार्टी नेता केजरीवाल को निशाना बनाया, उससे साफ हो गया कि चुनाव के केंद्र में केजरीवाल ही हैं।
सबके निशाने पर हैं केजरीवाल
वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान सभी गैर भाजपाई दलों के निशाने पर मोदी थे तो अब भाजपा समेत कांग्रेस के निशाने पर केजरीवाल हैं। शुरू में नरमी बरतने वाली भाजपा ने एकाएक केजरीवाल पर हमले तेज कर दिए हैं।
दिल्ली के रामलीला मैदान में भाजपा के चुनाव अभियान का शंख फूंकते हुए पीएम मोदी ने केजरीवाल पर हमला बोलकर जो सिलसिला शुरू किया था, वह अब तक जारी है।
चुनाव के ऐलान के बाद अपनी पहली रैली में भी मोदी ने इस हमले को और धारदार बनाया है। कांग्रेस पार्टी ने भी भाजपा के बजाय केजरीवाल को ही निशाने पर ज्यादा रखा है।
केजरीवाल के बढ़ते जनाधार ने बढ़ाई मुसीबत
केजरीवाल पर हमले के जरिए भाजपा मध्यम वर्ग के अपने वोट को समेटने की कोशिश में है तो कांग्रेस केजरीवाल के असर को बेअसर कर अपना खोया जनाधार हासिल करने में जुटी है।
केजरीवाल पर हमले तेज करने को लेकर भाजपा के चुनाव अभियान से जुड़े एक आला नेता का कहना है कि केजरीवाल के बढ़ते आधार को रोकने के लिए पार्टी ने उन पर सियासी हमले तेज किए हैं।