Delhi: कोरोना काल में दीपक ले गया घर की उमंग, सूना-सूना रहेगा रक्षाबंधन
बात 2020 की है। दूसरे परिवारों की तरह कोविड का साया करावल नगर के दयालपुर एक्सटेंशन में रहने वाली रमा के परिवार पर भी पड़ा। घर के तीन सदस्य- पिता, मां और भाई इसकी चपेट में आ गए। मां तो किसी तरह बच गई, लेकिन हफ्ते भर के भीतर कोरोना पिता-पुत्र को निगल गया था।
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क्या राखी, क्या भैयादूज, उमंग किसी त्योहार में नहीं बची। खुशी देने की जगह यह सब जख्म ताजे कर जाते हैं। पुराना घाव दोबारा से रिसने लगता है। राखी पर तो चीख पड़ने का मन करता है। बात करते-करते रमा का गला भर आया। आंखें नम थीं। अजीब सी खामोशी छा गई। आंखों से आंसू टपक रहे थे। थोड़ी देर में खुद को संभाला और रूंधे गले से बोल पड़ी कि भाई होता था तो घर की रौनक बदल जाती थी। पूरा घर सजा होता था। हम सब सज-धज कर मिठाई और तोहफे लाते। मां के पास जाते तो अब भी हैं, लेकिन पहले जैसा कुछ भी नहीं रहा। दो साल होने को आए, घर में अभी भी मातम सा पसरा रहता है।
बात 2020 की है। दूसरे परिवारों की तरह कोविड का साया करावल नगर के दयालपुर एक्सटेंशन में रहने वाली रमा के परिवार पर भी पड़ा। घर के तीन सदस्य- पिता, मां और भाई इसकी चपेट में आ गए। मां तो किसी तरह बच गई, लेकिन हफ्ते भर के भीतर कोरोना पिता-पुत्र को निगल गया था। आज भी उसको याद कर तीनों बहनों रमा, उमा और भारती की आंखों से आंसू बहने लगे।
तीन बहनों के एकलौते भाई की हो गई थी मौत
तीन बहनों के 45 वर्षीय इकलौते भाई दीपक के चले जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया। हर साल तीनों बहनें खुशी-खुशी अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती थीं, लेकिन दीपक इस दुनिया को अलविदा कहकर चला गया। दीपक के जाने के बाद तीनों ही बहनें उसके बेटों को राखी बांधकर अपना दुख कम करने की कोशिश कर रही हैं।
दीपक की बहन रमा कश्यप बताती हैं कि भाई को दुनिया से गए दो साल हो रहे हैं। वैसे तो कोई दिन ऐसा नहीं जाता, जब भाई को याद न करते हों लेकिन रक्षाबंधन और भाईदूज पर आंखें नम हो जाती हैं। भतीजों को राखी बांधकर उनमें भाई को तलाशते हैं। आज भाई होता तो रक्षाबंधन की रौनक ही कुछ और होती।
कोरोना में दो भाइयों को खोने वाली भगवान देवी अब रहती हैं गमगीन
उम्र के आखिरी पड़ाव में पहुंच चुकीं भगवान देवी के दो भाइयों को कोविड ने उनसे छीन लिया। रक्षाबंधन नजदीक आया तो 80 वर्षीय भगवान देवी अपने भाइयों को याद कर गमगीन हो गईं। पिछले साल कोरोना जब पीक पर था तो उनके दो बड़े भाई सदाराम और चंदरभान कोविड की चपेट में आकर मौत के मुंह में समा गए। जिंदगीभर भगवान देवी भाइयों की कलाई पर राखी बांधती आई थीं, लेकिन वक्त ने उनको ऐसे जख्म दिए जो शायद अब कभी नहीं भरेंगे।
बार-बार बात करते-करते भगवान देवी की आंखें आंसुओं से भर रही थीं। वह बस कहे जा रही थीं कि उनके भाई जिंदा होते तो कितना अच्छा होता। दिल्ली देहात के मदनपुर गांव की लड़की 80 वर्षीय भगवान देवी के दो भाइयों की गत वर्ष कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान 12 दिन के अंदर मौत हो गई थी।