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पृथ्वी को रेगिस्तान बनने से बचाएगा ‘दिल्ली घोषणापत्र’, यहां जुटे 196 देशों के विशेषज्ञ

Tue, 03 Sep 2019 05:07 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 03 Sep 2019 05:07 AM IST
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Delhi Declaration will save Earth from becoming a desert
ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट - फोटो : अमर उजाला

अगले 25 वर्ष में विश्व को मरुस्थलीकरण से बचाने के लिए ‘दिल्ली घोषणापत्र’ जारी किया जाएगा। यह जानकारी देश के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संयुक्त राष्ट्रसंघ की मरुस्थलीकरण रोकने के लिए बनी संधि (यूएनसीसीडी) के 25वें वर्ष में करवाए जा रहे सम्मेलन में दी।

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ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में शुरू हुए इस आयोजन में 196 देशों से मंत्रीगण, पर्यावरण विशेषज्ञ व संरक्षणकर्ता और संगठन शामिल हुए हैं। वे सभी मिलकर अगले 12 दिन मरुस्थलीकरण रोकने के लिए यह दिल्ली घोषणापत्र तैयार करेंगे।
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हर दो वर्ष में होने वाले इस वैश्विक आयोजन के उदघाटन से पहले प्रेस से बातचीत में प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि भारत सहित विश्व के 122 देशों ने सतत विकास लक्ष्यों के तहत भूमि की गुणवत्ता सुधारने को अपना राष्ट्रीय लक्ष्य बनाया है। जमीन के बंजर और मरुस्थल हो जाने की समस्याएं क्षेत्रीय जरूर हैं, लेकिन दुनिया भर में इसे सुधारने के लिए हो रहे प्रयासों को इस सम्मेलन में साझा किया जाएगा, जिससे नए समाधान मिल सकें।
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उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, जैवविविधता खत्म होना और मरुस्थलीकरण मानव की वजह से उपजी समस्याएं हैं, इसलिए हमें ही इनका समाधान करना है। सम्मेलन में देश जिन नीतियों और समाधानों पर राजी होंगे, उन्हें दिल्ली घोषणापत्र के रूप में पूरी दुनिया को भेजा जाएगा। यह भविष्य की दिशा तय
करेगा।

30 निर्णय लेंगे, दुनिया पर लागू होंगे

यूएनसीसीडी के महासचिव इब्राहिम थियॉव ने बताया कि दिल्ली घोषणापत्र में 30 मुद्दों पर निर्णय लिए जाएंगे। यह मुद्दे मरुस्थलीकरण के विस्तार, सूखे, धूल के तूफान और इनकी वजह से हो रहे पलायन से जुड़े हैं। इन निर्णयों को संधि पर हस्ताक्षर कर चुके 197 देशों पर लागू किया जाएगा। साथ ही जलवायु परिवर्तन, भूमि संरक्षण, सूखा प्रबंधन, मरुस्थल में खेती के विकास व शहरीकरण जैसे मुद्दे भी एजेंडा में रखे गए हैं। साथ ही उन्होंने सम्मेलन को यूएससीसीडी का अब तक का सबसे बड़ा आयोजन बताया और इसके लिए भारत का आभार जताया।

10 साल में आने वाला सूखा अब हर दूसरे साल आता है
उन्होंने कहा कि बीते दो वर्ष में विश्व ने धूल के तूफान व चक्रवात से लेकर सूखा, जंगल की आग, अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन के बीसियों बड़े मामले देखे, इनका असर करोड़ों लोगों के जीवन पर हुआ। इब्राहिम ने अफ्रीका महाद्वीपी का उदाहरण देकर बताया कि इसकी आबादी लगभग भारत के बराबर है। यहां पहले 10-15 वर्ष में एक बाद सूखा पड़ता था, लेकिन अब यह हर दूसरे-तीसरे साल में पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन और बढ़ते मरुस्थल से पैदा हुए इस चक्र को तोड़ने के लिए पूरे विश्व को साथ आने की जरूरत है।

पीएम मोदी 9 को करेंगे विधिवत शुभारंभ

जावड़ेकर ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नौ सितंबर को सम्मेलन में शामिल होंगे। यहां वे उच्चस्तरीय बैठक का उदघाटन करेंगे, साथ ही भारत की ओर से संदेश भी देंगे।

अब मानव ही बचाएंगे, तकनीक का सहारा लेंगे
कार्यक्रम के विस्तृत सत्र में प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि बीते 200 वर्ष में मानव से पृथ्वी को नुकसान ही किया है। अब उसे सुधारने में भी मानव को ही काम करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि तकनीक के सहारे हम यह कर पाएंगे। उन्हीं के विभाग के राज्यमंत्री बाबुल सुप्रियो ने भारत द्वारा बीते कुछ वर्षा में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में हासिल की गई उपलबिधयों के बारे में बताया। भारत आज वनों को फिर से स्थापित करने वाले पांच सबसे बड़े देशों में शामिल हो चुका है, तो वनों की वृद्धि के लिहाज से हम 10 बड़े देशों में शुमार हुए हैं।

मरुस्थलीकरण रोकना इसलिए जरूरी

- 70 प्रतिशत जमीन खेती, ऊर्जा, भोजन या लकड़ी के लिए उपयोग हो रही है, यह अप्रत्यक्ष रूप से मरुस्थल को बढ़ा रहा है
- 25 प्रतिशत ऐसी भूमि जो कभी जंगल से मानव उपयोग में लाई गई थी, आज बंजर या मरुस्थल बन चुकी है
- 10 लाख प्रजातियों पर इसकी वजह से संकट है
- 302 करोड़ नागरिकों के जीवन पर किसी न किसी प्रकार से इनका असर हो रहा है
- 70 करोड़ नागरिकों के मरुस्थलीकरण की वजह से अपने मूल स्थान से वर्ष 2050 तक पलायन करने आशंका है, इसका असर शरणार्थी संकट और बाकी
जगहों पर जनसंख्या के बढ़ते बोझ के रूप में सामने आएगा
- 70 देश आज सूखे से बचने के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने को मजबूर हुए हैं, 2015 तक यह संख्या केवल तीन थी

आयोजन से जुड़े फैक्ट्स 
- 1994 में मरुस्थलीकरण रोकने के लिए यूएसएसएसडी बनाई गई
- भारत में हो रहा मौजूदा सम्मेलन संधि के तहत 14वां आयोजन है
- इसमें सात हजार विशेषज्ञ, जनप्रतिनिधि, संगठन और संरक्षणकर्ता शामिल हुए हैं

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