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फ्लैट नहीं देने पर एनसीआर के तीन बिल्डर गिरफ्तार, 200 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sun, 02 Dec 2018 04:55 AM IST
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3सी बिल्डर की साईट की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने शनिवार को नोएडा के 3सी बिल्डर के तीन निदेशकों को प्रोजेक्ट पूरा नहीं करने पर गिरफ्तार किया है। तीनों पर फ्लैट देने का आश्वासन देकर खरीदारों से 200 करोड़ रुपये की ठगी करने का आरोप है।
आरोपियों की पहचान दिल्ली के पंचशील पार्क निवासी निर्मल सिंह, सैनिक फार्म निवासी सुरप्रीत सिंह सूरी और फ्रेंड्स कॉलोनी निवासी विधुर भारद्वाज के रूप में हुई है। पुलिस ने शनिवार को तीनों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
पुलिस के अनुसार, कंपनी ने खरीदारों को 39 महीने में फ्लैट देने का वादा कर उनसे 90 फीसदी राशि वसूल ली थी, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ।
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फ्लैट खरीदारों ने इसकी शिकायत दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में की। पुलिस ने कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की और तीनों को गिरफ्तार कर लिया। तीनों बिल्डरों पर ठगी के अन्य मामले भी दर्ज हैं।
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आरोपियों की पहचान दिल्ली के पंचशील पार्क निवासी निर्मल सिंह, सैनिक फार्म निवासी सुरप्रीत सिंह सूरी और फ्रेंड्स कॉलोनी निवासी विधुर भारद्वाज के रूप में हुई है। पुलिस ने शनिवार को तीनों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
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पुलिस के अनुसार, कंपनी ने खरीदारों को 39 महीने में फ्लैट देने का वादा कर उनसे 90 फीसदी राशि वसूल ली थी, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ।
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फ्लैट खरीदारों ने इसकी शिकायत दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में की। पुलिस ने कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की और तीनों को गिरफ्तार कर लिया। तीनों बिल्डरों पर ठगी के अन्य मामले भी दर्ज हैं।
300 फ्लैट बनाने का दावा किया था
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त सुवाशीष चौधरी ने बताया कि बिल्डरों ने वर्ष 2010 में नोएडा सेक्टर 107 में लोटस ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट की योजना बनाई। कंपनी ने 10 एकड़ जमीन पर छह टावर में तीन सौ फ्लैट बनाने का दावा किया था।
निवेशकों से वादा किया गया था कि 39 महीने में उन्हें फ्लैट दे दिया जाएगा। कंपनी की बातों में आकर लोगों ने 90 फीसदी से ज्यादा राशि जमा करा दी।
आर्थिक तंगी का हवाला देकर 5-5 लाख और वसूले
कुछ साल बाद कंपनी ने निवेशकों से आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए पांच-पांच लाख रुपये और वसूल लिए थे। बावजूद इसके प्रोजेक्ट के काम में कोई तेजी नहीं आई।
जांच में यह बात सामने आई है कि कंपनी ने प्रोजेक्ट के अंतर्गत पहले से तय तीन सौ फ्लैट की संख्या बढ़ाकर 336 कर दी, लेकिन इसके लिए संबंधित अथॉरिटी से कोई स्वीकृति नहीं ली। फ्लैट मिलने में देरी होने पर 50 खरीदारों ने पुलिस में शिकायत कर दी।
निवेशकों से वादा किया गया था कि 39 महीने में उन्हें फ्लैट दे दिया जाएगा। कंपनी की बातों में आकर लोगों ने 90 फीसदी से ज्यादा राशि जमा करा दी।
आर्थिक तंगी का हवाला देकर 5-5 लाख और वसूले
कुछ साल बाद कंपनी ने निवेशकों से आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए पांच-पांच लाख रुपये और वसूल लिए थे। बावजूद इसके प्रोजेक्ट के काम में कोई तेजी नहीं आई।
जांच में यह बात सामने आई है कि कंपनी ने प्रोजेक्ट के अंतर्गत पहले से तय तीन सौ फ्लैट की संख्या बढ़ाकर 336 कर दी, लेकिन इसके लिए संबंधित अथॉरिटी से कोई स्वीकृति नहीं ली। फ्लैट मिलने में देरी होने पर 50 खरीदारों ने पुलिस में शिकायत कर दी।
फ्लैटों के 191 करोड़ दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर किए
कंपनी ने खरीदारों के पैसे से फ्लैट तैयार कराने के बजाय 191 करोड़ रुपये अपनी दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिए। इस वजह से उनका प्रोजेक्ट अधर में लटक गया।
इसके बाद खरीदारों ने मार्च 2018 में कंपनी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत दर्ज होने के बाद कंपनी के तीनों निदेशक फरार हो गए, बाद में पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया।
इसके बाद खरीदारों ने मार्च 2018 में कंपनी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत दर्ज होने के बाद कंपनी के तीनों निदेशक फरार हो गए, बाद में पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया।