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हाईकोर्ट: 5जी प्रौद्योगिकी के खिलाफ याचिका पर संक्षिप्त नोट दाखिल करें जूही चावला
Wed, 02 Jun 2021 03:32 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Wed, 02 Jun 2021 03:32 PM IST
सार
जूही ने देश में 5जी वायरलेस नेटवर्क स्थापित करने के खिलाफ सोमवार को उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उन्होंने अपनी याचिका में नागरिकों, जानवरों, वनस्पतियों और जीवों पर इस प्रौद्योगिकी के विकिरण के प्रभाव संबंधी मुद्दों को उठाया।
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juhi chawla
- फोटो : social media
विस्तार
दिल्ली उच्च न्यायालय ने अभिनेत्री जूही चावला से बुधवार को कहा कि वह देश में 5जी वायरलेस नेटवर्क स्थापित करने के खिलाफ दायर अपनी याचिका पर एक संक्षिप्त नोट दाखिल करें।
चावला ने देश में 5जी वायरलेस नेटवर्क स्थापित करने के खिलाफ सोमवार को उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उन्होंने अपनी याचिका में नागरिकों, जानवरों, वनस्पतियों और जीवों पर इस प्रौद्योगिकी के विकिरण के प्रभाव संबंधी मुद्दों को उठाया।
न्यायमूर्ति जे आर मिढ़ा ने कहा कि वादी अपराह्न ढाई बजे तक दो पृष्ठीय नोट दाखिल करें और अदालत अपराह्न तीन बजे मामले की सुनवाई करेगी। अदालत ने कहा कि वह याचिका की सुनवाई शुरू करने समेत चावला और दो अन्य याचिकाकर्ताओं की चार अर्जियों पर विचार करेगी।
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अदालत ने दूरसंचार विभाग का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील अमित महाजन को डेढ़ पृष्ठ का नोट दाखिल करने की अनुमति दी, ताकि यह पता किया जा सके कि उस पर सुनवाई की आवश्यकता है या नहीं।
न्यायाधीश ने कहा, बचावकर्ता मेरे नोटिस जारी करने तक सुनवाई के अधिकार का दावा नहीं कर सकते। मैं देखूंगा कि क्या उन्हें अधिकार है। अधिवक्ता दीपक खोसला के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि इन 5जी योजनाओं से मनुष्यों पर गंभीर, अपरिवर्तनीय प्रभाव और पृथ्वी के सभी पारिस्थितिक तंत्रों को स्थायी नुकसान पहुंचने का खतरा है।
चावला, वीरेश मलिक और टीना वचानी ने याचिका दायर करके कहा है कि यदि दूरसंचार उद्योग की 5जी संबंधी योजनाएं पूरी होती हैं तो पृथ्वी पर कोई भी व्यक्ति, कोई जानवर, कोई पक्षी, कोई कीट और कोई भी पौधा इसके प्रभाव से नहीं बच सकेगा।
याचिका में प्राधिकारियां को यह प्रमाणित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि 5जी प्रौद्योगिकी किस तरह से मानव जाति, पुरुषों, महिलाओं, वयस्कों, बच्चों, शिशुओं, जानवरों और हर प्रकार के जीवों, वनस्पतियों के लिए सुरक्षित है।
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चावला ने देश में 5जी वायरलेस नेटवर्क स्थापित करने के खिलाफ सोमवार को उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उन्होंने अपनी याचिका में नागरिकों, जानवरों, वनस्पतियों और जीवों पर इस प्रौद्योगिकी के विकिरण के प्रभाव संबंधी मुद्दों को उठाया।
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न्यायमूर्ति जे आर मिढ़ा ने कहा कि वादी अपराह्न ढाई बजे तक दो पृष्ठीय नोट दाखिल करें और अदालत अपराह्न तीन बजे मामले की सुनवाई करेगी। अदालत ने कहा कि वह याचिका की सुनवाई शुरू करने समेत चावला और दो अन्य याचिकाकर्ताओं की चार अर्जियों पर विचार करेगी।
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अदालत ने दूरसंचार विभाग का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील अमित महाजन को डेढ़ पृष्ठ का नोट दाखिल करने की अनुमति दी, ताकि यह पता किया जा सके कि उस पर सुनवाई की आवश्यकता है या नहीं।
न्यायाधीश ने कहा, बचावकर्ता मेरे नोटिस जारी करने तक सुनवाई के अधिकार का दावा नहीं कर सकते। मैं देखूंगा कि क्या उन्हें अधिकार है। अधिवक्ता दीपक खोसला के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि इन 5जी योजनाओं से मनुष्यों पर गंभीर, अपरिवर्तनीय प्रभाव और पृथ्वी के सभी पारिस्थितिक तंत्रों को स्थायी नुकसान पहुंचने का खतरा है।
चावला, वीरेश मलिक और टीना वचानी ने याचिका दायर करके कहा है कि यदि दूरसंचार उद्योग की 5जी संबंधी योजनाएं पूरी होती हैं तो पृथ्वी पर कोई भी व्यक्ति, कोई जानवर, कोई पक्षी, कोई कीट और कोई भी पौधा इसके प्रभाव से नहीं बच सकेगा।
याचिका में प्राधिकारियां को यह प्रमाणित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि 5जी प्रौद्योगिकी किस तरह से मानव जाति, पुरुषों, महिलाओं, वयस्कों, बच्चों, शिशुओं, जानवरों और हर प्रकार के जीवों, वनस्पतियों के लिए सुरक्षित है।