शिक्षा का बजट काट, MCD कर्मचारियों को सैलरी
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कूड़ा-कूड़ा हो चुकी दिल्ली में पिछले आठ दिन से जारी दोनों निगमों की हड़ताल पर बुधवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने समाधान तो पेश किया लेकिन, समस्या सुलझेगी इसकी संभावना कम ही दिखती है।
अपना इलाज कराने बंगलुरु गए सीएम केजरीवाल ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि वो एमसीडी कर्मचारियों का दुख समझते हैं। वो सब भी हमारे परिवार की तरह हैं। पिछले चार महीने से उन्हें वेतन नहीं मिला है।
उनके घरों का खर्च कैसे चल रहा है ये चिंता की बात है। अभी दिल्ली सरकार के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की परीक्षाएं होनी वाली है। स्कूल बंद होने से उनकी पढ़ाई पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
समाधान सुझाने से पहले केजरीवाल ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर हमला करते हुए कहा कि हमने पिछली सरकारों की तुलना में दोनों ही निगमों को ज्यादा पैसा दिया है, लेकिन बीजेपी इस पर राजनीति कर रही है और दिल्ली में कूड़ा फैला रही है।
केंद्र सरकार चाहती है राष्ट्रपति शासन
केजरीवाल ने कहा कि असल में केंद्र सरकार दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाना चाहती है इसलिए वह जानबूझकर इस तरह की चीजें कर रही है।
हालांकि केजरीवाल ने एमसीडी कर्मचारियों की मांग पर अपना पक्ष रखे हुए कहा कि दिल्ली सरकार ने तय किया है कि शिक्षा के बजट में से पैसा निकाल कर कर्मचारियों को 31 जनवरी तक की सैलरी दी जाएगी। इसके लिए दोनों निगमों को 550 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
केजरीवाल ने कहा कि उनकी सरकार पहले ही पूरा पैसा दोनों एमसीडी को दे चुकी है। बीजेपी को इस बात का जवाब देना चाहिए कि आखिर वो पैसे कहां गए।
सीबीआई से कराई जाए जांच
सीएम ने सैलरी न देने की बात पर कहा कि इसकी भी जांच होनी चाहिए कि वो पैसे कहां गया। केजरीवाल ने कहा कि इसमें घोटाले की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
केजरीवाल ने कहा कि सैलरी कहां गई और दोनों निगमों को दिए गए पैसे कहां खर्च हुए इसकी जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए।
इस बीच उत्तरी नगर निगम के मेयर रविंद्र गुप्ता ने आरोप लगाते हुए कहा कि केजरीवाल अपना इलाज कराने के बहाने बंगलुरु निकल गए और अब वहां से राजनीति कर रहे हैं।