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Delhi : महिलाओं के प्रति बढ़ती हिंसा और मीडिया की भूमिका पर मंथन, अर्णिमा त्यागी को ‘रंग साहस’ सम्मान

Sun, 06 Oct 2024 04:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 06 Oct 2024 04:09 AM IST
सार

इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी) में आयोजित संगोष्ठी में बड़ी संख्या में छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता समेत कई लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में अमर उजाला मीडिया सहयोगी रहा।

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Delhi: Brainstorming on increasing violence against women and role of media
कार्यक्रम में अमर उजाला मीडिया सहयोगी रहा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरा रंग फाउंडेशन ने आठ वर्ष पूरे होने पर ‘महिलाओं के प्रति बढ़ती हिंसा और मीडिया की भूमिका’ विषय पर शनिवार को संगोष्ठी का आयोजन किया।  इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी) में आयोजित संगोष्ठी में बड़ी संख्या में छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता समेत कई लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में अमर उजाला मीडिया सहयोगी रहा। संगोष्ठी को लेखिका अणु शक्ति सिंह ने मॉडरेट किया। इस मौके पर गाजियाबाद की पूर्व महिला प्रधान अर्णिमा त्यागी को वर्ष 2024 के ‘’रंग साहस’’ अवार्ड से सम्मानित किया गया। 

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अंग्रेजी की वरिष्ठ पत्रकार सुजाता मधोक ने कहा कि पहले से समाज के साथ मीडिया आगे बढ़ा है। यह अंदरूनी फर्क है। उन्होंने कहा कि मीडिया को अपनी भूमिका को और बढ़ाना होगा। सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों पर काम कर रही पत्रकार प्रियंका दुबे ने कहा कि रिपोर्टिंग में खर्च करना जरूरी है। पहले महिलाओं से संबंधित खबर को पास कराना कठिन था, लेकिन अब उसे लोग समझते हैं। 
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कवि-स्त्रीवादी आलोचक और डीयू में प्रो. सुजाता ने कहा कि लोग लड़कियों के अंदर बदलाव देखना चाहते हैं, लेकिन लड़कों के अंदर नहीं। जेंडर विमर्श और महिला सशक्तिकरण के लिए काम कर रही संस्था मेरा रंग फाउंडेशन की संस्थापक शालिनी श्रीनेत ने कहा कि अमर उजाला ने हमेशा आम आदमी के हित में पत्रकारिता की है।  

महिलाओं की कोई जाति नहीं होती : पंवार
लेखक प्रो. कौशल पंवार ने कहा कि समाज में दलित महिलाएं हाशिए पर हैं। उनसे संबंधित मुद्दों पर रिपोर्टिंग कम होती है। उन्होंने कहा कि महिला, केवल महिला होती है। उनकी कोई जाति नहीं है। अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता आजाद सिंह ने कहा कि कोर्ट की शब्दावली में बदलाव होना चाहिए। अगर कोई पीड़ित महिला है तो उसके साथ सभ्य भाषा में बात करनी चाहिए।

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