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तस्वीरों में खौफ का मंजर: 'मैं जानती थी, मम्मी मुझे लेने तुम जरूर आओगी' मां-बाप को देख बिलख पड़े बच्चे

Wed, 01 May 2024 05:52 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 01 May 2024 05:52 PM IST
सार

प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्रों के बीच अधिक डर का माहौल था। उन्हें संभाल पाना भी स्कूल प्रबंधन के लिए मुश्किल हो रहा था। स्कूल प्रबंधन उन्हें गर्मी के चलते छुट्टी होने की बात बता रहे थे, जिससे बच्चे पैनिक न हो। 

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Delhi Bomb Threat Tears in the eyes of children after seeing their parents
अपने अपने बच्चों को सुरक्षित लाने पहुंचे अभिभावक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

'मम्मी मुझे पता था आप जरूर लेने आओगी। आप भी यहां से जल्दी चलो। यहां बम हो सकता है। इधर से दूर चलो तुरंत, मैं काफी घबरा गई हूं। कुछ भी हो जाए मुझे अब आपके साथ ही घर जाना है।' स्कूल से बाहर निकलते हुए यह बातें लोधी रोड स्थित सरदार पटेल विद्यालय में सातवीं कक्षा की छात्रा नेहा मिश्रा ने रोते हुए कही। उनकी माता कनिका ने बताया कि वह ऑफिस पहुंची ही थी कि वैसे ही स्कूल में बम होने की सूचना मिली। 

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उन्होंने बताया कि पहली सूचना व्हाट्सएप समूह में आई। उस संदेश को उन्होंने नजर अंदाज कर दिया। लेकिन, लगातार तीन बार स्कूल की तरफ से कॉल आई, तो वह परेशान हो गईं और फौरन वहां से स्कूल के लिए निकल गईं। वह फफक-फफककर रोते हुए कहती रहीं कि उनकी इकलौती बच्ची है। अगर उसे भी कुछ हो जाएगा तो वह अपना जीवन कैसे व्यतीत करेंगी।

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Delhi Bomb Threat Tears in the eyes of children after seeing their parents
अपने बच्चे को घर लेकर जाते अभिभावक - फोटो : अमर उजाला

बम की सूचना मिलने के बाद ऐसी ही स्थिति नई दिल्ली के कई स्कूलों के बाहर दिखने के मिली। स्कूलों में अफरा-तफरी का माहौल दिखा और स्कूल के बाहर अभिभावक हताश, निराश व चीख-पुकार करते दिखे। हर कोई अपने बच्चों की एक झलक पाने के लिए बेताब नजर आया। छोटे बच्चों से लेकर बड़े छात्रों के बीच डर का माहौल साफ देखा जा सकता था। वहां हर कोई बस यही दुआ कर रहा था दिखा कि बच्चे सुरक्षित अपने घर लौट जाएं। अपने बच्चों को लेने के लिए कोई अभिभावक ऑफिस से वापस लौटे, तो कोई ऑफिस बीच में ही छोड़कर जस-तस की स्थिति में स्कूल पहुंचते दिखे। 

खासकर छोटे बच्चों के अभिभावक रोते-बिखलकते हुए स्कूल परिसर के अंदर दाखिल होते नजर आए। हालांकि, उन्हें पूछताछ के बाद ही स्कूल परिसर में प्रवेश दिया जा रहा था। स्कूलों के बाहर पुलिस की कड़ी तैनाती दिखी। तो वहीं, स्कूल प्रबंधन अंदर बच्चों को सुरक्षित जगह पर ले जाते दिखे। अभिभावकों का कहना था कि गनीमत यह है कि ये बम की फर्जी मेल व कॉल थी।

Delhi Bomb Threat Tears in the eyes of children after seeing their parents
क्लासरूम से बाहर निकलते छात्र - फोटो : अमर उजाला

आरके पुरम स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल के बाहर अपने अभिभावकों के साथ मायूस होकर घर जा रहे अंकित सिंह ने बताया कि वह अपनी कक्षा में बैठे थे। उनका गणित का पीरियड चल रहा था। लेकिन, अचानक से नीचे से आवाज आई की सभी बच्चों को ग्राउंड में लाया जाए। देखते ही देखते पूरा स्कूल ग्राउंड में आ गया। कुछ ही देर में स्कूल के अंदर भारी पुलिस बल आता दिखा। जिससे मन अंदर से घबरा गया। कुछ देर में ही डॉग स्क्वायड ने पूरे स्कूल की तलाशी ली। उन्होंने बताया कि इसके बाद स्कूल को सुरक्षित घोषित किया गया।

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Delhi Bomb Threat Tears in the eyes of children after seeing their parents
बच्चों को सुरक्षित लेकर जाते अभिभावक - फोटो : अमर उजाला

बच्चों के रोने की आवाज सुनाई दे रही थी बाहर
प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्रों के बीच अधिक डर का माहौल था। उन्हें संभाल पाना भी स्कूल प्रबंधन के लिए मुश्किल हो रहा था। स्कूल प्रबंधन उन्हें गर्मी के चलते छुट्टी होने की बात बता रहे थे, जिससे बच्चे पैनिक न हो। उधर, लोधी स्टेट स्थित दिल्ली कन्नड़ शिक्षण संस्थान के अंदर से छोटे बच्चों के रोने की आवाज साफ सुनाई दे रही थी। 

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स्कूल का मंजर बताते छात्र - फोटो : अमर उजाला

अंदर बच्चे अभिभावकों के पास जाने की जिद्द कर रहे थे। हालांकि, उन्हें अंदर लंच और खाने का सामान दिया जा रहा था। अपने बच्चों को लेकर आए राहुल सिंह कहते हैं कि उनका घर द्वारका में है और बच्चे लोधी स्टेट में पढ़ते हैं। वह कहते हैं कि पहले तो वह इतना घबरा गए, लेकिन जैसे-तैसे वह यहां पहुंचे। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंधन का इंतजाम नहीं है, बच्चों को धूप में बैठा रखा था। उन्होंने बताया कि उन्हें सूचना स्कूल के व्हाट्सएप समूह के माध्यम से मिली थी। जैसे ही उनके बच्चे दिखे तो अभिभावकों ने राहत की सांस ली।

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छात्रा को सुरक्षित घर लेकर जाते अभिभावक - फोटो : अमर उजाला

कैब वालों को नहीं दिए बच्चे
बस की सूचना मिलने के बाद कई अभिभावक काम व घर दूर होने के चलते समय पर स्कूल नहीं पहुंचे। ऐसे में कई अभिभावकों ने अपने रिश्तेदारों व पड़ोसियों को बच्चों को लेने के लिए भेजा था। लेकिन, स्कूल प्रबंधन ने रिश्तेदारों व पड़ोसियों को बच्चों को नहीं सौंपा। जो भी अभिभावक स्कूल पहुंच रहे थे, उनका पहचान पत्र जांच कर ही उन्हें बच्चे दिए जा रहे थे। उधर, कैब वालों को भी बच्चे नहीं दिए जा रहे थे। कन्नड स्कूल में अपने भतीजों को लेने आए दीपक डागर ने कहा कि उनके दो भतीजे इस स्कूल में पढ़ते हैं, लेकिन स्कूल प्रबंधन उनको बच्चे नहीं सौंपे। प्रबंधन का कहना है कि बच्चे केवल अभिभावकों के साथ ही जाएंगे। उन्होंने बताया कि बच्चों के माता-पिता दिल्ली से बाहर गए हैं।

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