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Delhi Elections : मुख्यमंत्री बने नेताओं का उपलब्धियों भरा रहा सियासी सफर, कई ने राष्ट्रीय स्तर पर दी दस्तक

Wed, 22 Jan 2025 03:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 22 Jan 2025 03:33 AM IST
सार

इन नेताओं ने न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। कांग्रेस नेता चौधरी ब्रह्मप्रकाश, गुरमुख निहाल सिंह और आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शुरुआत में कम राजनीतिक अनुभव के बावजूद बड़ी सफलता हासिल की। 

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Delhi Assembly Elections: The political journey of leaders who became Chief Ministers
सुषमा स्वराज और शीला दीक्षित... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली के मुख्यमंत्री बने नेताओं का राजनीतिक सफर उपलब्धियों भरा रहा है। इन नेताओं ने न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। कांग्रेस नेता चौधरी ब्रह्मप्रकाश, गुरमुख निहाल सिंह और आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शुरुआत में कम राजनीतिक अनुभव के बावजूद बड़ी सफलता हासिल की। 

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कांग्रेस नेता शीला दीक्षित को राजनीतिक तौर पर जबरदस्त संजीवनी मिली। भाजपा के मदनलाल खुराना, साहिब सिंह वर्मा और सुषमा स्वराज ने भी अपनी मजबूत राजनीतिक छवि बनाई। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद इन नेताओं को उनकी पार्टी ने केंद्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारियां दीं। केजरीवाल ने अपनी पार्टी को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का काम मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए किया। 
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चौ. ब्रह्मप्रकाश (1952-1955) : पहले मुख्यमंत्री
आजाद होने के बाद हुए पहले चुनाव में वर्ष 1952 में मुख्यमंत्री बने। वर्ष 1955 में मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद वह वर्ष 1957 में दिल्ली सदर, 1962 व 1967 में बाहरी दिल्ली से कांग्रेस सांसद बने, वहीं वर्ष 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर बाहरी दिल्ली से सांसद चुने गए। वह वर्ष 1979 में चौ. चरण सिंह की सरकार में केंद्रीय मंत्री बने।
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गुरमुख निहाल सिंह (1955-1956) : दूसरे मुख्यमंत्री
दिल्ली के विकास को नई दिशा देने का काम किया। उनके कार्यकाल में शहरीकरण को बढ़ावा मिला और दिल्ली के बुनियादी ढांचे में सुधार की पहल की गई। मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद वे वर्ष 1956 में राजस्थान के पहले राज्यपाल बने।

मदनलाल खुराना (1993-1996) : तीसरे मुख्यमंत्री
वर्ष 1993 में भाजपा की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री बने। उस समय वह दक्षिण दिल्ली से सांसद थे। मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद वह केन्द्र सरकार में मंत्री बने। इसके अलावा दिल्ली मेट्रो रेल के चेयरमैन भी रहे और वह राजस्थान के राज्यपाल बने।

साहिब सिंह (1996-1998): चौथे मुख्यमंत्री
दिल्ली के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच संतुलन स्थापित करने की कोशिश की। वे ग्रामीण पृष्ठभूमि से थे। मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद वह बाहरी दिल्ली से सांसद चुने गए और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में श्रम मंत्री बने।

सुषमा स्वराज (1998, दो माह) :
पांचवीं मुख्यमंत्री भाजपा ने वर्ष 1998 में केंद्रीय मंत्रिमंडल से दिल्ली भेज दिया। वह करीब दो माह तक मुख्यमंत्री रही। उसके बाद वह राष्ट्रीय राजनीति में वापस लौट आईं।


शीला दीक्षित (1998-2013) : छठी मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री बनने से पहले लगातार चार बार लोकसभा चुनाव हार चुकी थीं। वह तीन बार उत्तर प्रदेश व एक बार दिल्ली में हारी थी। इसके बाद वह वह 15 वर्षों तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रही। मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद उन्होंने केरल की राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला।

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