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Delhi: तिहाड़ जेल परिसर में बनाई नई गोशाला, कैदियों को मिलेगी गो थेरेपी; बंदियों की आय बढ़ाने की भी कवायद

Thu, 20 Nov 2025 02:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 20 Nov 2025 02:15 AM IST
सार

उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने दिल्ली के गृह विभाग मंत्री आशीष सूद और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में इनका उद्घाटन किया।

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Delhi: A new cowshed has been built in the Tihar Jail premises, where prisoners will get cow therapy.
तिहाड़ जेल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तिहाड़ जेल में बुधवार को नई गोशाला और सूचना और संचार प्रौद्योगिकी से जुड़ी तीन सेवाएं शुरू की गईं। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने दिल्ली के गृह विभाग मंत्री आशीष सूद और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में इनका उद्घाटन किया। एलजी ने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी के विजन से प्रेरित ये कदम तिहाड़ को सिर्फ एक जेल नहीं, बल्कि सीखने, संवेदना और आत्मनिर्भरता के केंद्र में बदलने का काम करेगा।

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गोशाला में खासतौर पर देशी साहीवाल गायों की देखभाल की जाएगी। यह केवल पशुपालन नहीं, बल्कि कैदियों के भीतर शांत भाव, जिम्मेदारी और आत्मविश्वास पैदा करने का माध्यम बनाेगा। यहां काम करने से कैदी न केवल आय कमा सकेंगे, बल्कि अपने परिवार को भी आर्थिक मदद भेज पाएंगे। सबसे बड़ी बात जो कैदी अकेलेपन से जूझते हैं या जिन्हें लंबे समय से घर से मुलाकात नहीं मिली, उनके लिए गो-थेरेपी शुरू की गई है। गायों के साथ समय बिताने से मिलने वाली शांति और अपनापन कई कैदियों के लिए भावनात्मक सहारा बन सकता है।
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कैदियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने की पहल
दूसरी पहल तिहाड़ बेकिंग स्कूल का डिजिटल इंटीग्रेशन है। अब तिहाड़ के बेकरी उत्पाद ओएनडीसी और माई स्टोर प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे। इससे कैदियों के बनाए केक, बिस्कुट और अन्य सामान सीधे लोगों के घर तक पहुंच सकेंगे।
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सामान की खरीद फरोख्त पारदर्शी होगी
तीसरी पहल इन्वेंटरी मैनेजमेंट सिस्टम है, जिसके जरिये खाने-पीने की चीजों, दवाओं और जरूरी सामान की खरीद फरोख्त को बेहद पारदर्शी और तेज बनाया जाएगा। रियल टाइम ट्रैकिंग और री ऑर्डर अलर्ट से कैदियों को जरूरी सुविधाएं समय पर मिलेंगी।


एनजीओ के लिए नई वेबसाइट की लॉन्च
तिहाड़ से जुड़े एनजीओ के लिए एक नई वेबसाइट भी लॉन्च की गई है। अब एनजीओ मुफ्त रजिस्ट्रेशन के बाद सीधे अपने प्रोजेक्ट और गतिविधियां ऑनलाइन साझा कर सकेंगे। इससे कैदियों के कल्याण के लिए काम करने वाले सभी संगठनों का समन्वय और प्रभाव बढ़ेगा। डीजी तिहाड़ एसबीके सिंह ने कहा है कि तिहाड़ जेल को एक ऐसे मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां सजा काटते हुए भी कैदी आत्मनिर्भर बन सकें, मानसिक रूप से मजबूत हों और बाहर निकलकर नई शुरुआत का साहस जुटा सकें।

 

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