बार काउंसिल ने 2000 वकीलों से पूछा- क्या असली है आपकी डिग्री
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली में वकालत कर अपनी आजीविका चलाने वाले लगभग दो हजार वकीलों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। दिल्ली पुलिस और बार काउंसिल इन वकीलों की डिग्री की जांच कर तय करेगा कि इन्हें वकालत करने की अनुमति देना उचित था या नहीं।
असल में इन वकीलों का संबंध उन विश्विद्यालयों से है जहां से दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर ने डिग्री हासिल की थी। बता दें कि अपनी डिग्री के फर्जी होने के आरोप में तोमर फिलहाल जेल में हैं।
सूत्रों की मानें तो दिल्ली में वकालत कर रहे उन वकीलों के डिग्रियों की भी जांच की जाएगी जिन्होंने अवध या बुंदेलखंड यूनविर्सिटी से स्नातक और तिलका मांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री ली है।
वकीलों के खिलाफ हो सकती है एफआईआर
बार काउंसिल भी इन वकीलों के डिग्रियों की जांच के लिए विशेष कार्यक्रम चलाएगा। बता दें कि तोमर की फर्जी डिग्री का मामला सामने आने के बाद जांच में फर्जी डिग्री बांटने वाले रैकेट का भी पता चला था।
दिल्ली के त्रिनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक जितेंद्र सिंह तोमर पर बीएससी और लॉ की डिग्री फर्जी होने का आरोप लगा था जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।
सूत्रों की मानें तो पुलिस की एक विशेष टीम बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी द्वारा पिछले दो दशकों में दी गई डिग्रियों और छात्रों के रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।
ऐसे में अगर दिल्ली में प्रैक्टिस कर रहे वकीलों की डिग्री में किसी तरह की अनयिमितता पाई जाती है तो इनके खिलाफ अलग से एफआईआर दर्ज की जा सकती है।
और भी डिग्री निकल सकती है फर्जी
सूत्रों की मानें तो पुलिस को जांच में कुछ ऐसे तथ्य मिले हैं जो चौंकाने वाले हैं। जांच के दौरान एक खास वर्ष में यूनिवर्सिटी ने लगभग 500 डिग्रियां दी हैं जबकि उस साल एडमिशन लेने वाले छात्रों की संख्या केवल 120 है।
कहा तो यह भी जा रहा है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बार काउंसिल ने इन तीन (अवध, बुंदेलखंड और तिलका मांझी) यूनिवर्सिटी से डिग्री लेने वालों को नोटिस जारी कर एक शपथपत्र देने को कहा है जिसमें वह स्वीकार करें कि उनके द्वारा जमा की गई डिग्री सही और प्रामणिक है।