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सिंदूर और बिंदिया में घातक तत्वों की होगी जांच, एम्स ने माना हो रहा त्वचा को नुकसान

Sun, 01 Sep 2019 05:28 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Sun, 01 Sep 2019 05:28 AM IST
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Deadly elements will be investigated in Sindoor and Bindi
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों ने सिंदूर और बिंदिया में घातक तत्व मिलाए जाने का खुलासा करने के बाद सरकार जल्द ही इसके निर्माण संबंधी नियमों को तैयार कर सख्ती से लागू कर सकती है। हाल ही में एम्स के अलावा देश के कई बड़े सरकारी संस्थानों के त्वचा रोग विशेषज्ञों के साथ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों की हुई बैठक में यह फैसला लिया है। 

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एम्स के त्वचा रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. वीके शर्मा ने बताया कि बिंदी और सिंदूर भारतीय महिलाओं के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा है। छोटे छोटे शहरों तक में इसका निर्माण हो रहा है। इसे लेकर न नियम है और न ही किसी तरह का कोई कानून। शायद इसीलिए सिंदूर और बिंदी में एजीडाई नामक घातक तत्व मिलाया जा रहा है। इसका असर त्वचा पर पड़ रहा है। आखिर में परिणाम जटिल ऑपरेशन के रूप में देखने को मिल रहे हैं। 
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उन्होंने बताया कि एजीडाई नामक रासायनिक तत्व न सिर्फ त्वचा को भीतर से जलाकर पतला करता है बल्कि कई बार वह त्वचा पर एलर्जी भी करता है। उन्होंने कहा कि माथे पर जिस जगह बिंदी लगाई जाती है अक्सर महिलाओं को सफेद निशान पड़ जाता है। इसके लिए ऑपरेशन तक करना पड़ता है। चूंकि बिंदी और सिंदूर हमारी संस्कृति का हिस्सा है, इसलिए रोक नहीं लगाई जा सकती, लेकिन इसके निर्माण पर पर सख्ती लगाई जा सकती है। 
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दरअसल एम्स में दिल्ली, यूपी, बिहार, हरियाणा, पंजाब इत्यादि राज्यों से मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। डॉक्टरों की मानें तो उनके यहां इलाज के लिए आने वाली महिलाओं की मांग में सिंदूर देखते हैं। गौर करने वाली बात है कि हर महिला का सिंदूर अलग ही रंग का होता है। किसी का बहुत गहरा तो किसी का हल्का रंग, कई बार उन्होंने पीला भी देखा है। इसके अलावा बड़ी तादाद में महिलाएं हर्बल उत्पादों का इस्तेमाल भी करती हैं। इन हर्बल में एजोडाई के अलावा पांच तरह के एलर्जिन मिल रहे हैं, जिनमें से एक है पीपीडी। 

डॉक्टरों का कहना है कि हर्बल उत्पाद, मेंहदी इत्यादि में इन रासायनिक तत्वों की जांच के लिए दिल्ली और अन्य राज्यों से 55 सैंपल एकत्रित किए गए हैं। इन सैंपल की जांच चल रही है। अगले महीने एम्स पूरी दुनिया के सामने हर्बल उत्पादों की सच्चाई लेकर आने वाला है। डॉक्टरों का कहना है कि बालों की डाई, मेहंदी में पीपीडी रसायन का इस्तेमाल हो रहा है। इसीलिए एम्स के शोध में आईआईटी रुड़की और ऋषिकेश एम्स की मदद ली गई है।   

क्रीम और डाई से त्वचा का रंग तक फीका

डॉ. वीके शर्मा ने बताया कि आजकल तमाम तरह की क्रीम और बालों में डाई का इस्तेमाल लोग कर रहे हैं, लेकिन इन उत्पादों को खरीदने से पहले वे जांच करना भी मुनासिब नहीं समझते। कई बार पॉर्लर में बैठकर वे बालों में डाई जरूर लगाते हैं, लेकिन उत्पाद के बारे में उन्हें भी नहीं पता होता।
  
इसलिए एम्स ने हाल ही में एक अध्ययन किया जिसमें चौंकाने वाले परिणाम सामने आए। इस अध्ययन के बारे में एम्स की त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. रीति भाटिया ने बताया कि 106 मरीजों पर किए अध्ययन में 74 मरीज ऐसे थे जिनकी आंखों के नीचे काले घेरे मिले, जबकि 24 मरीजों में एलर्जी मिली और बाकी मरीजों को खुजली इत्यादि की परेशानी।  

इस अध्ययन में डॉक्टरों को सबसे बड़ी बात ये लगी कि सभी मरीज बालों में डाई लगाते थे और चेहरे पर तमाम तरह की क्रीम भी। रात में सोते वक्त भी ये चेहरा साफ करके नहीं सोते थे। इनमें से करीब 10 मरीज भी मिले थे जिनकी त्वचा का रंग सफेद से हल्का भूरा और काला भी पड़ गया था। 
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