फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Cyclone forecast 60 km before by satellite image

सैटेलाइट इमेज से 60 किमी पहले से ही चक्रवात का पूर्वानुमान 

Fri, 15 Nov 2019 04:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा सर्वेश कुमार, नई दिल्ली
सर्वेश कुमार, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 15 Nov 2019 04:24 AM IST
विज्ञापन
Cyclone forecast 60 km before by satellite image
demo pic - फोटो : PTI
इसरो के पूर्व चेयरमैन व पद्म विभूषण के. कस्तूरीरंगन ने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत इतना विकसित हो चुका है कि इसका कई क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जा रहा है। डाटा, इमेज के आधार पर मॉडल तैयार कर पूर्वानुमान के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। 
विज्ञापन


किसी भी क्षेत्र में चक्रवात के पहुंचने से करीब 50-60 किलोमीटर पहले ही पूर्वानुमान लगाया जाता है। कुछ देर पहले जानकारियां मिलने से चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों की आबादी को विस्थापित कर राहत और बचाव के लिए माकूल तैयारियां का मौका मिलता है। 
विज्ञापन


हालांकि भारत के तटीय क्षेत्रों में अधिक आबादी होने की वजह से चक्रवात से प्रभावित क्षेत्रों का दायरा 150 किलोमीटर तक बढ़ जाता है। ऐसे में जरूरी है कि पूर्वानुमान कुछ और पहले लगाए जाएं ताकि अधिक से अधिक लोगों को चक्रवात के विपरीत प्रभावों और नुकसान से बचाया जा सके। इसके लिए देश के अंतरिक्ष वैज्ञानिक लगातार प्रयासरत हैं। कस्तूरीरंगन बृहस्पतिवार को टेरी इंस्टीट्यूट आफ एडवांस स्टडीज के 12वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए।   
विज्ञापन
विज्ञापन


इसरो के पूर्व चेयरमैन ने बताया कि चक्रवात से पहले स्थानीय मौसम में कई तरह के बदलाव दिखने लगते हैं। सैटेलाइट इमेज, सेंसर के जरिये चक्रवात के लिए जिम्मेवार कारक हवा की रफ्तार, तापमान, दबाव सहित अन्य पहलुओं की निगरानी के आधार पर पूर्वानुमान किया जाता है।

 सभी संबंधित पहलुओं की निगरानी 15, 30, 45 मिनट या एक-एक घंटे के अंतराल पर करते हुए इमेज और डाटा के आधार पर पूर्वानुमान किया जाता है। इसके तहत इंफ्रारेड, थर्मल और अल्ट्रा वॉयलेट इमेज लिए जाते हैं ताकि जानकारियां सटीक हो। 

सैटेलाइट डाटा से कृषि, मौसम सहित कई क्षेत्रों को मिल रहा है फायदा 
सतत विकास में अंतरिक्ष विज्ञान के योगदान विषय पर परिचर्चा के दौरान के. कस्तूरीरंगन ने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत पहले अमेरिका और फ्रांस पर निर्भर था। लेकिन अंतरिक्ष विज्ञान के जरिये देश में कृषि, मौसम, भूजल, पर्यावरण सहित कई क्षेत्रों से संबंधित सैटेलाइट डाटा से हासिल अहम डाटा का उपयोग किया जा रहा है। 

उन्होंने पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं से प्रभावित दिल्ली के बारे में कहा कि इसकी भी लगातार निगरानी की जाती है। पराली जलाने की कितनी घटनाएं हो रही हैं इसके लिए इमेज जारी किए जाते हैं। 


मिशन चंद्रयान के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने अभियान के दौरान हासिल अनुभवों के आधार पर अगला कदम बढ़ाने के पहले के सभी पहलुओं को खास ध्यान रखा जाता है। विक्रम लैंडर दोबारा मिलने के बारे में उन्होंने कहा कि इसका आकलन नहीं किया जा सकता है। लेकिन इस क्षेत्र में इसरो की कोशिशें जारी है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed