एम्स से सीवीओ के नियुक्ति की फाइल गायब
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीवीओ के पद पर संजीव चतुर्वेदी की नियुक्ति संबंधी फाइल एम्स से गायब हो गई है। संजीव की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। आशंका है कि फाइल गायब कराने में एम्स के ही किसी अधिकारी का हाथ है। हालांकि केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के मुख्य सतर्कता अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की नियुक्ति गलत थी।
यदि मंत्रालय अपने इस फैसले पर कायम रहता है तो एम्स सीवीओ के कार्यकाल में लिए गए फैसले अमान्य हो सकते हैं। इसका सीधा लाभ उन अधिकारियों और कर्मचारियों को मिल सकता है जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में कार्रवाई की गई है।
इसमें आईएएस और आईपीएस अधिकारी तक शामिल हैं। चतुर्वेदी को सीवीओ के पद से हटाने के फैसले पर यदि मंत्रालय कायम रहता है तब इसका सीधा लाभ हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव विनीत चौधरी को मिल सकता है। क्योंकि एम्स सीवीओ के आदेश पर ही उनके खिलाफ सीबीआई में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
सीवीओ की पहल पर मेजर पेनाल्टी लगाने का फैसला लिया गया जो अमान्य हो सकता है। एम्स में विनीत चौधरी के डिप्टी डायरेक्टर (एडमिनिस्ट्रेशन) रहते कई गैर कानूनी कार्य करने के आरोप लगे, जिस पर सीवीओ की ओर से कार्रवाई की गई थी। साथ ही तमिलनाडू कैडर के आईपीएस अधिकारी और वर्तमान में तिरुची के पुलिस कमिश्नर शैलश यादव को भी राहत मिल सकती है।
सीवीओ की पहल पर इनके खिलाफ भी सीबीआई में मुकदमा दर्ज कराया गया था। उन पर पसंदीदा सुरक्षा एजेंसी को टेंडर देने में करोड़ों रुपये के घपले का आरोप लगा था। वहीं कांग्रेस के पूर्व विधायक अशोक आहूजा के एम्स परिसर में बनी दवा दुकान ऑल इंडिया मेडिकोज को नकली दवा बेचने पर बंद करने के आदेश देने के बाद सीवीओ ने 50 लाख रुपये की सुरक्षा राशि जब्त करने के आदेश दिए थे।
इसके अलावा सुपरिटेंडेंट इंजीनियर बीएस आनंद को मार्च 2013 में नौकरी से निकालने के आदेश दिए। साथ ही पूर्व रजिस्ट्रार, पूर्व चिकित्सा अधीक्षक, डिप्टी सिक्योरिटी ऑफिसर, चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर, वित्तीय सलाहकार, न्यूक्लीयिर मेडिसीन विभाग के प्रमुख डॉ. सीएसबल के अलावा कई अन्य कर्मचारियों के खिलाफ कड़े फैसले लिए।
संजीव ने की सबीआई जांच की मांग
भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) संजीव चतुर्वेदी को समय से पहले पद से हटाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री कार्यालय और स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र लिख कर पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। पत्र की कॉपी सीबीआई को भी भेजी गई है।
इस बीच संजीव अनिश्चितकालीन छुट्टी पर चले गए हैं। उन्होंने इसकी अर्जी दी थी, जिसे बृहस्पतिवार को स्वीकार कर लिया गया। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सीवीओ ने पत्र में लिखा है कि एम्स जैसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान में भ्रष्ट लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने पर उन्हें पद से हटाने का आदेश दिया गया है।
जबकि 23 नवंबर 2012 को प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से स्पष्ट आदेश जारी किया गया था कि बिना पीएमओ को सूचित किए एम्स के सीवीओ को उनके पद से नहीं हटाया जाएगा। पत्र में लिखा है कि उनके सीवीओ बनने के बाद से लगातार उन्हें हटाने की कोशिश की जा रही थी। इसलिए इस बात की सीबीआई से जांच कराई जानी चाहिए कि उन्हें पद से हटाने के पीछे कौन-कौन से लोग शामिल हैं।
पत्र में उन्होंने खुद के कार्यकाल की जांच करवाने की भी बात कही है। संजीव का कहना है कि है कि बेहतर कार्य करने वाले को सजा दी जा रही है और जिनका काम सही नहीं है उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। चतुर्वेदी ने केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव को भी मामले की पूरी जानकारी दी है।
नियुक्ति गलत थी: हर्षवर्धन
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन कहते हैं कि संजीव चतुर्वेदी को सीवीओ बनाने के पहले केंद्रीय सतर्कता आयुक्त से मंजूरी नहीं ली गई थी। उनकी नियुक्ति गलत थी, इसी वजह से उन्हें पद से हटा दिया गया। जबकि सीवीसी की वेबसाइट पर उन्हें सीवीओ बताया गया है। यही नहीं एम्स के सीवीओ और सीवीसी के बीच जो भी कागजी आदान प्रदान हुआ है, उसमें सीवीसी की ओर से संजीव चतुर्वेदी को सीवीओ बताया गया है।