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Delhi: सांसों पर संकट...हवा गंभीर श्रेणी में बरकरार, वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 पार, गैस चेंबर बनी दिल्ली
Tue, 20 Jan 2026 05:15 AM IST
Digvijay Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, नई दिल्ली
संवाद न्यूज एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Tue, 20 Jan 2026 05:15 AM IST
सार
राजधानी में पारा गिरने और खराब मौसम की स्थिति ने दिल्ली को गैस चेंबर बना दिया है। राजधानी में लगातार दूसरे दिन हवा गंभीर श्रेणी में बरकरार रही। सुबह की शुरुआत धुंध और कोहरे की मोटी परत से हुई।
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दिल्ली की जहरीली हवा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी में पारा गिरने और खराब मौसम की स्थिति ने दिल्ली को गैस चेंबर बना दिया है। राजधानी में लगातार दूसरे दिन हवा गंभीर श्रेणी में बरकरार रही। सुबह की शुरुआत धुंध और कोहरे की मोटी परत से हुई। वहीं, पूरे दिन आसमान में स्मॉग की मोटी चादर भी दिखाई दी। इसके चलते कई इलाकों में दृश्यता बेहद कम रही।
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यही नहीं, सांस के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। साथ ही, लोगों को आंखों में जलन जैसी समस्या हुई। इसके अलावा, सड़कों पर लोग मास्क पहने हुए दिखे। ऐसे में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 410 दर्ज किया गया। यह हवा की गंभीर श्रेणी है। इसमें रविवार की तुलना में 30 सूचकांक की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, एनसीआर में गाजियाबाद की हवा सबसे अधिक प्रदूषित रही। यहां एक्यूआई 425 दर्ज किया गया, यह हवा की गंभीर श्रेणी है। वहीं, नोएडा में 412, गुरुग्राम में 379 और ग्रेटर नोएडा में 375 एक्यूआई दर्ज किया गया। इसके अलावा, फरीदाबाद की हवा सबसे साफ रही। यहां सूचकांक 253 दर्ज किया गया। यह हवा की मध्यम श्रेणी है।
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वाहन से होने वाला प्रदूषण 10.75 फीसदी रहा
फिलहाल, राजधानी में ग्रेप के चार चरण लागू है। दिल्ली में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए निर्णय सहायता प्रणाली के अनुसार, वाहन से होने वाला प्रदूषण 10.75 फीसदी रहा। इसके अलावा पेरिफेरल उद्योग से 8.08, आवासीय इलाकों से 2.84, निर्माण गतिविधियों से 1.37 और रोड से उड़ने वाली धूल की 0.71 फीसदी की भागीदारी रही। सीपीसीबी के अनुसार, सोमवार को हवा उत्तर-पश्चिम दिशा से 5 किलोमीटर प्रतिघंटे के गति से चली। वहीं, अनुमानित अधिकतम मिश्रण गहराई 950 मीटर रही। इसके अलावा, वेंटिलेशन इंडेक्स 200 मीटर प्रति वर्ग सेकंड रहा। दूसरी ओर, दोपहर तीन बजे हवा में पीएम10 की मात्रा 371 और पीएम2.5 की मात्रा 239.8 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। वहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का पूर्वानुमान है कि मंगलवार को हवा बेहद खराब श्रेणी में पहुंचने की आशंका है। इससे लोगों को फोरी राहत मिल सकती है।
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ग्रेप 4 के नियमों का नहीं हो रहा पालन
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लागू किए गए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) के चरण तीन और चार के दौरान नियमों के पालन में गंभीर लापरवाही सामने आई है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की समीक्षा में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और एनसीआर के राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (एसपीसीबी) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। सीएक्यूएम के ग्रेप मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम ने पाया कि वायु प्रदूषण कम करने के लिए जरूरी कई अनिवार्य काम या तो बहुत कम किए गए या बिल्कुल नहीं किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, कई मामलों में तय लक्ष्य के मुकाबले 7 प्रतिशत से लेकर 99.6 प्रतिशत तक की कमी देखी गई। यही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि ग्रेप के तहत 500 वर्ग मीटर से बड़े निर्माण और विध्वंस स्थलों का निरीक्षण बेहद कम किया गया। ग्रेप चरण तीन और चार दोनों में ही दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के एनसीआर क्षेत्रों में निरीक्षण की स्थिति बेहद कमजोर रही। कई राज्यों में 90 प्रतिशत से ज्यादा की कमी दर्ज की गई।
50 से 80 प्रतिशत तक शिकायतें अनसुलझी रहीं: सड़कों की मशीनों से सफाई और मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों की तैनाती भी संतोषजनक नहीं पाई गई। दिल्ली और हरियाणा में इन कार्यों में भारी कमी रही, जबकि कुछ राज्यों में जरूरत से ज्यादा काम किया गया, जिससे समन्वय की कमी साफ नजर आई। इसके अलावा, सोशल मीडिया के माध्यम से मिली वायु प्रदूषण संबंधी शिकायतों के निपटारे में भी गंभीर लापरवाही देखी गई। चरण तीन और चार के दौरान दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में 50 से 80 प्रतिशत तक शिकायतें अनसुलझी रहीं।