शादी का वादा करके लगा दी 83 लाख की चपत
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खुद को गुड़गांव की एक कंपनी का असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बता एक युवक ने एक दिल्ली के एक परिवार से लाखों की ठगी कर ली।
युवक ने बड़ी ही चालाकी से उन्हें झांसे में लेते हुए उनकी बेटी से शादी के अलावा फ्लैट दिलाने की बात कह 83 लाख रुपये ठग लिए और चंपत हो गया। मामला खुलने के बाद लड़की के पिता ने पुलिस को सूचना दी। जिस पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरु कर दी है।
दिल्ली स्थित आईपी एक्सटेंशन में रहने वाले एसके देव ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 2011 में जयपुर निवासी कनिष्क अग्रवाल नामक के युवक से गुड़गांव में मुलाकात हुई थी।
बेटी से शादी करने का किया था वादा
मुलाकात के दौरान युवक ने अपने आपको गुड़गांव की एक कंपनी में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बताया। कई मुलाकातों के बाद आरोपी ने उनकी बेटी से शादी करने की इच्छा जाहिर की जिस पर वे राजी हो गया।
आरोप है कि युवक ने बड़ी ही चालाकी से 2011 से 2014 में गुड़गांव में उनकी बेटी के लिए एक फ्लैट लेने के लिए 82.40 लाख रुपये ले लिए। तीन साल में उसने फ्लैट को लेकर लगातार झांसा देता रहा। आरोप है कि पिछले कई महीनों से जब फ्लैट के कागजात मांगे गए तो उन्हें टकरा दिया।
धोखाधड़ी का अहसास होने पर उन्होंने पुलिस को सूचना दी जिस पर गुड़गांव पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने जांच शुरु कर दी। मामला सही पाए जाने पर सुशांतलोक थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
केस 2: फ्लैट के नाम पर लाखों की धोखाधड़ी
गुड़गांव में फ्लैट के नाम पर लाखों की धोखाधड़ी के आरोप में पुलिस ने नामी बिल्डर पॉल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने कंपनी प्रबंधन के चार अधिकारियों को आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 406, 420 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार इस केस के संबंध में जल्द ही कंपनी प्रबंधन से पूछताछ की जा सकती है।
दिल्ली विकासपुरी में रहने वाले बिजनेसमैन पवन सचदेवा ने पुलिस आयुक्त को दी शिकायत में बताया था कि 12 मार्च 2008 में पॉल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के रेवाड़ी में चल रहे हाउसिंग प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कराया था।
जिसमें कंपनी प्रबंधन से हुई डील के मुताबिक आठ लाख रुपये का चैक दिया था। जिसे कंपनी प्रबंधन ने कैश करा लिया। आरोप है कि कंपनी प्रबंधन ने छह सालों में प्रोजेक्ट में फ्लैट को लेकर कब्जा नहीं दिया। पुलिस आयुक्त को दी शिकायत के बाद मामला आर्थिक अपराध शाखा को सौंपा गया, जहां मामला सही पाए जाने के बाद डीएलएफ फेज एक थाना पुलिस ने कंपनी प्रबंधन के हरपाल सिंह, हंसराज यादव, मानव चंद्र, राजेश कुमार यादव के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है।