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50 हजार का इनामी देबू गिरफ्तार

Tue, 18 Aug 2015 01:37 PM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Tue, 18 Aug 2015 01:37 PM IST
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prize of 50 thousand Debu arrested.
सात साल से यूपी की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल 50 हजार के इनामी देवेंद्र उर्फ देबू को गिरफ्तार कर लिया गया। यूपी एसटीएफ की नोएडा विंग ने सोमवार को उसे कविनगर के स्वर्णजयंतीपुरम से .32 बोर की पिस्टल के साथ पकड़ा।
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देबू दिल्ली पुलिस का बर्खास्त सिपाही है। वह यहां रिश्तेदार से मिलने आया था। देबू ने 2008 में पत्नी के इलाज के िलए इंदिरापुरम में आईसीआईसीआई बैंक में 32 लाख की लूट की थी।
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इसके अलावा 2009 में ज्वैलरी शॉप से दो किलो सोना लूटा था। इसने गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, हापुड़, मेरठ और राजस्थान में डकैती और लूट के 20 से ज्यादा केस दर्ज हैं।
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एसटीएफ एसपी अजय सहदेव ने बताया कि देवेंद्र उर्फ देबू पुत्र राजेंद्र सिंह बुलंदशहर के सैदपुर का रहने वाला है। वह 1989 में दिल्ली पुलिस में भर्ती हुआ था। उसके दो भाई और जीजा के अलावा दो सगे भाई भी दिल्ली पुलिस में हैं।

1997-1998 में लूट की दो घटनाओं में उसका नाम आया तो उसे सस्पेंड फिर बर्खास्त कर दिया। इसका देबू के नाम से गैंग था, जिसका सदस्य अजय उर्फ पिंटू मुठभेड़ में मारा गया था।

इसके बाद वह कुछ सदस्यों के साथ बैंकों में लूटपाट करता था। लूटपाट करने के दौरान ही गार्ड की रायफल भी लूटी थी और दो लोगों को गोली मारकर रुपये भी लूटे थे। पुलिस पीछे पड़ी तो देहरादून भाग गया और वहां से मध्यप्रदेश के ग्वालियर में परिवार के साथ रहने लगा था।

एसटीएफ के डीएसपी राजकुमार मिश्रा ने बताया कि मोबाइल कई माह से सर्विलांस पर था और 16 अगस्त को वह गाजियाबाद आने लगा तो क्राइम ब्रांच गाजियाबाद को सूचित किया गया।

दिल्ली पुलिस में रहते हुए उसने एक ट्रक खरीदकर ट्रांसपोर्ट का काम किया था, लेकिन उसे घाटा हो गया तो उसने दिल्ली में ही शराब बिक्री का काम कराया, लेकिन वह भी दिल्ली में ज्यादा दिन तक नहीं चला था तो उसके बाद लूटपाट की घटनाएं करना शुरू कर दिया था।

पत्नी के इलाज के लिए मेहनत नहीं की, बैंक लूटा

देबू ने स्वीकार किया कि 2008 में कौशांबी में हुई आईसीआईसीआई बैंक की लूट में वह शामिल था। लूट की साजिश उसके ड्राइवर पिंटू उर्फ अजय ने तीन साथियों नवीन, काला और उपेश के साथ की थी।

अजय निवासी बुलंदशहर जबकि उसके दोस्त हरियाणा में रोहतक के रहने वाले थे। पत्नी उन दिनों अस्पताल में थी। बिल जमा करने का पैसा नहीं था। बैंक में अजय व उसके साथी थे, वह बाहर रेकी कर रहा था।

नवीन को गिरफ्तार कर लूटकांड का खुलासा हुआ था, लेकिन देबू, उपेश फरार थे। देबू पर 50 हजार और उपेश पर 15 हजार का इनाम यूपी पुलिस ने घोषित किया था।

नवीन की गिरफ्तारी से पुलिस का खुलासा झूठा निकला था। लूटे गए 32 लाख में से उसे डेढ़ लाख मिले थे, इसके बाद वह परिवार समेत देहरादून शिफ्ट हो गया। दिल्ली पुलिस ने उसे बर्खास्त कर दिया।

शास्त्रीनगर में लूटा था दो किलो सोना

शास्त्रीनगर में 2009 में राधाकृष्ण ज्वैलरी शॉप लूटने का आरोप भी देबू सहित छह लोगों पर है। यह ज्वैलरी शॉप दिनदहाडे़ लूटी थी, बदमाश 2 किलो सोना और 1.5 लाख की नगदी ले गए थे।

दुकानदार संजय वर्मा निवासी जीडीए कालोनी शास्त्रीनगर ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी, बाद में देबू और साथियों का नाम लूट में उजागर हुआ था।

देबू का कहना है कि वह इस लूट में शामिल नहीं था, लूट उसका ड्राइवर अजय शामिल था, इसीलिए पुलिस उस पर भी लूट में शामिल होने का शक था। एसएचओ का कहना है कि इस लूटकांड में उपेश और देबू की गिरफ्तारी शेष थी।

पत्नी जीती थी जिला पंचायत सदस्य का चुनाव
देबू की पत्नी हापुड़ से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव 2005 में जीती थी। इसके बाद एमएलए के चुनाव की तैयारी करने लगा।

देबू का कहना है कि यही वह दौर था जब कुछ राजनेताआ ने उसके खिलाफ बुलंदशहर में फर्जी रिपोर्ट लिखवानी शुरू कर दी।

पब्लिक में पीटने पर दर्ज हुआ था पहला केस

देबू ने बताया कि दिल्ली कोतवाली में उसके खिलाफ पहला आपराधिक मामला 1997 में दर्ज हुआ था, ड्यूटी पर तैनात था तभी एक व्यक्ति की पिटाई कर दी थी। इस मामले में 6 महीने सस्पेंड हुआ, साढे़ 4 साल तक केस चला।


2006 में लूट का मुकदमा बुलंदशहर में दर्ज और मुठभेड़ में गिरफ्तार हुआ। डासना जेल में 9 माह तक रहा। लूट का मुकदमा फर्जी था, वारदात के दिन वह मसूरी में था।
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