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जेएनयू छात्रा के निष्कासन पर लगी रोक, वार्डन पर लगाया था यौन शोषण का आरोप

Mon, 04 Jul 2016 01:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 04 Jul 2016 01:23 AM IST
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JNU student's expulsion ban, imposed on warden accused of sexual abuse
यौन उत्पीड़न - फोटो : Demo Pic
यौन शोषण पीड़ित छात्रा के निष्कासन पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा छात्रा को निष्कासित करने के लिये विश्वविद्यालय ने तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्रा ने वार्डन पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। 
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जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने  जेएनयू के 30 मई के उस निर्णय पर रोक लगा दी है जिसमें छात्रा को एक सैमेस्टर के लिये निष्कासित करने का आदेश दिया गया था। कोर्ट ने कहा छात्रा को कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिये पर्याप्त समय नहीं दिया गया। ऐसा लगता है कि यह आदेश बिना किसी जांच के ही दे दिया गया।
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कोर्ट ने यह फैसला छात्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुये दिया है। छात्रा की याचिका पर कोर्ट ने जेएनयू प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई के लिये 23 अगस्त की तारीख तय की है। तब तक जेएनयू प्रशासन का आदेश स्थगित रहेगा। 
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झूठी शिकायत के आरोप में छात्रा को किया था निष्कासित

JNU student's expulsion ban, imposed on warden accused of sexual abuse
कोर्ट, अदालत - फोटो : फाइल फोटो

जेएनयू प्रशासन ने यौन शोषण कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर एक सैमेस्टर के लिये निष्कासित कर दिया था। प्रशासन का कहना था कि छात्रा ने वार्डन के खिलाफ झूठी शिकायत दी थी।

छात्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि यौन शोषण कमेटी द्वारा तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया और उसे अपील करने का समय भी नहीं दिया गया। प्रशासन ने 20 मई को नोटिस जारी किया लेकिन यह उसे 27 मई को दिया गया।

उसके जवाब का इंतजार किये बिना ही उसे निष्कासित कर दिया गया। कमेटी की रिपोर्ट भी उसे नहीं दी गई। छात्रा ने इस मामले में 22 नवंबर 2015 को वसंत कुंज थाने में वार्डन की शिकायत की थी। इसके बाद विश्वविद्यालय की यौन शोषण कमेटी ने वार्डन के खिलाफ जांच की थी।

लड़की की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज की थी। यौन शोषण जांच समिति ने वार्डन को क्लीन चिट दी थी और झूठी शिकायत व वार्डन की मानहानि के लिये छात्रा को निष्कासित करने की सिफारिश की थी।

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